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जीवन धारा: जीवन एक पतंग की तरह है, जिम्मेदारी से आगे बढ़ना ही सूत्र

Wed, 14 Jan 2026 07:20 AM IST
देवेश त्रिपाठी क्लिफ जेम्स
क्लिफ जेम्स Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Wed, 14 Jan 2026 07:20 AM IST
सार

जीवन पतंग के समान है, जिसकी सुंदरता ऊंचाई में नहीं, बल्कि उड़ान के संतुलन में निहित है। पतंग की डोर अनुशासन, मूल्यों और मेहनत का प्रतीक है, जबकि हवा उन बाहरी शक्तियों का, जो हमारे वश में नहीं हैं।

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Life is like a kite moving forward responsibly is the key
जीवन एक पतंग की तरह - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

जिंदगी की सबसे अच्छी यात्राओं की कोई मंजिल नहीं होती, खुशी शांत पलों में मिलती है। जैसे पतंग को उड़ने के लिए विपरीत हवा चाहिए होती है, वैसे ही हमें भी जीवन में चुनौतियों में ही अपनी ताकत ढूंढनी चाहिए, न कि आसान क्षणों में। जीवन भी एक पतंग की तरह है, जिसकी सुंदरता उसकी ऊंचाई में नहीं, बल्कि उड़ान के संतुलन में छिपी होती है। मनुष्य अक्सर स्वतंत्रता को निरंकुश उड़ान मान लेता है, पर बिना डोर की पतंग जितनी जल्दी ऊपर जाती है, उतनी ही तेजी से गिर भी जाती है। हम अक्सर सब कुछ नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन पतंग तभी ऊंची उड़ती है, जब हम हवा के रुख को समझते हैं और उसके साथ तालमेल बिठाते हैं। पतंग को उड़ाने के लिए आकाश, हवा और हाथ, तीनों का सामंजस्य आवश्यक है।
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पतंग की डोर हमारे अनुशासन, मूल्यों और मेहनत का प्रतीक है, जबकि हवा उन बाहरी शक्तियों का, जो हमारे वश में नहीं हैं। जब मनुष्य भय से मुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेता है, तब उसकी पतंग नई ऊंचाइयों को छूती है। पर यह आत्मविश्वास अहंकार नहीं होना चाहिए, क्योंकि अहंकार हवा का वह झोंका है, जो जीवन की पतंग को गलत दिशा में बहा ले जाता है।
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बिना डोर के पतंग भटक जाएगी और बिना हवा के वह कभी उड़ नहीं पाएगी। इसी तरह जीवन में सफलता पाने के लिए हमें यह स्वीकार करना होगा कि हम पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं, बल्कि हमें कुछ सीमाओं के भीतर ही अपनी उड़ान तय करने की कोशिश करनी चाहिए। जिस तरह एक पतंग तभी ऊपर उठती है, जब हवा उसके विपरीत चलती है, ठीक उसी तरह जीवन की चुनौतियां हमें रोकने के लिए नहीं, बल्कि हमें और अधिक ऊंचाई पर ले जाने के लिए आती हैं। यदि जीवन में कोई प्रतिरोध न हो, तो हम स्थिर हो जाएंगे। पतंग का फटना या धागे का उलझना जीवन की असफलताओं को दर्शाता है। लेकिन एक कुशल पतंगबाज जानता है कि धागे को कब ढीला छोड़ना है और कब खींचना है। इसलिए, मानसिक रूप से लचीला होना ही कठिन समय में जीवित रहने का एकमात्र तरीका है।
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जिस तरह आकाश में एक ही पतंग नहीं होती, बल्कि अनेक पतंगें साथ उड़ती हैं, उसी प्रकार जीवन भी प्रतिस्पर्धा से अधिक सहभागिता मांगता है। दूसरों की पतंग काटने की लालसा अंततः आपके अपने ही आकाश को संकीर्ण कर देती है। इसलिए, सच्ची सफलता वही है, जिसमें हम खुद भी उड़ें और दूसरों को भी उड़ते देखने का आनंद ले सकें। यही जीवन का भी यथार्थ है कि स्वतंत्रता तब ही सार्थक होती है, जब उसके साथ जिम्मेदारी जुड़ी हो।


सूत्र: जीवन में संतुलन और स्वतंत्रता का महत्व है, लेकिन इसका अर्थ दिशाहीन होना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना है। चुनौतियां जीवन की विपरीत हवा हैं, जो हमें रोकने नहीं, ऊपर उठाने आती हैं। अनुशासन, मूल्य और परिश्रम वे डोर हैं, जो हमें भटकने से बचाती हैं, जबकि प्रकृति हमें जमीन से जुड़े रहना सिखाती है।
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