जिंदगी खूबसूरत है, बस एक मुस्कान ही उसकी जरूरत है..!
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अक्सर हर छोटी बात पर परेशान होने वाला इंसान ये याद नहीं रख पाता कि यदि कोई एक छोटी चीज हमें इतना परेशान कर देती है तो यदि कुछ बड़ा घटित हो जाए तो क्या होगा या फिर जिन लोगों को वास्तव में हमसे कहीं ज्यादा बड़ी समस्याएं परेशान कर रही हैं उनका तो क्या हाल होता होगा या यूं कहे कि हमारे दृष्टिकोण से उनका तो अंत ही हो जाता होगा?
दरअसल, जब हम खुद को किसी समस्या में उलझा हुआ पाते हैं तो उस समय उसमें उलझने और अपनी सोचने समझने की क्षमता को ध्वस्त करने से कहीं बेहतर है उससे निपटने की तरफ ध्यान देना और वो बिलकुल मुमकिन है इन तरीकों से-
हंसते रहें और खुश रहने को अपनी आदत बना लें
मुस्कुराना कोई कठिन कार्य नहीं है, परंतु फिर भी आपको कम ही लोग ऐसे दिखेंगे जो हर वक्त खुश दिखते हैं या मुस्कुराते रहते हैं, ये वो लोग है जिनके अंदर खुशी का संचार 24 घंटे ही बना रहता है, जिनको तनाव वाली स्थितियां अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाती, क्योंकि खुशी उनके व्यक्तित्व का एक अहम हिस्सा बन जाती है जिसको बदलना इतना आसान नहीं, ऐसे व्यक्तित्व के आस पास भी आप रहेंगे तो खुशी ही महसूस करते हैं।
इस आदत को उनसे सीखिए और अपने अंदर उतारने का प्रयत्न कीजिए, क्योंकि दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं जो आप नहीं सीख सकते बशर्ते 100 फीसदी मेहनत की हो।
सोच को सुलझी हुई बनाएं, उलझी हुई नहीं
इंसान अपनी सोच से ही बनता है ये तो हम जानते हैं और ये सोच ही कितना ज्यादा हमारी चीजों को प्रभावित करती है इसको यदि आजमाना है तो एक दिन सुबह उठते से ही बस सोचिए की मैं खुश हूं और पूरे दिन यही याद रखिए तो यकीनन आप अपने अंदर खुशी महसूस करेंगे। फिर अगले दिन सोचिए आज बहुत परेशान हूं तो पूरे दिन बिना वजह भी आप परेशानी ही महसूस करेंगे, इस अंतर का कारण हमारी सोच है।अतः हमेशा अपने अंदर चीजों को सुलझाने वाली सकारात्मक विचारधारा को प्रवाहित होने दें और उसी दिशा में अपनी सोच को रखने के निरंतर प्रयास करते रहें।
अपने आप से प्यार करें और खुद को स्वीकार करें
ये तो हम सब जानते ही हैं कि जिस भी चीज को हम प्यार करते हैं चाहे वो इंसान हो, जानवर हो कोई वस्तु हमें वो चीज हमेशा खुशी ही देती है और ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी सोच में उसके प्रति सिर्फ सकारात्मकता ही निहित रहती है।
बस ठीक वैसे ही यदि हम खुद से प्यार करेंगे तो हमें अपनी खुशियों के लिए कभी भी किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, क्योंकि तब हम खुद ही खुद को खुश रख पाएंगे और अपने आप में खुशी ढूंढने से पहले आप जैसे है वैसे ही स्वयं को स्वीकार करें। दूसरों को देखकर खुद से उम्मीद करने से कही बेहतर है, खुद से उम्मीद कम और प्यार ज्यादा करें।
जीवन को महत्व दें और ईश्वर को धन्यवाद
इंसान के रूप में हमको मिला ये जीवन पहले ईश्वर की और फिर मां की कृपा के रूप में आपको प्राप्त हुआ है अर्थात् जितना हम जीवन को खुद का समझ कर उलझनों में उलझ जाते हैं इसके बजाय ईश्वर का समझ कर, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता जताकर भी अपने मन को पुनः ऊर्जावान किया जा सकता है।
जैसे वर्तमान में जीना सर्वश्रेष्ठ माना गया है, ठीक वैसे ही ये भी मान लीजिए की ये जीवन इस बार इंसान के रूप में मिला है तो इसको क्यों परेशान होकर व्यर्थ करें, क्योंकि न तो हमें पिछला जीवन क्या था वो पता है ना अगला क्या होगा वो पता है, तो भला इसको ही मुस्कुराते हुए समझदारी से क्यों ना जी लिया जाए। ध्यान रहे, आपकी सिर्फ एक मुस्कान ही अच्छे विचारों को आकर्षित और बुरे विचारों को विकर्षित करने की क्षमता रखती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।