कर्नाटक चुनाव परिणाम 2023: क्या बीजेपी के लिए बंद हो गया दक्षिण का द्वार? लोकसभा चुनावों से पहले ये बड़ा झटका
कर्नाटक के जरिए बीजेपी दक्षिण में अपना पैर पसारना चाहती थी लेकिन यहां उसे सफलता नहीं मिली है। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटें हैं और यहां बीजेपी की हार निश्चित रूप से पार्टी के लिए बड़ा झटका है। कर्नाटक में फिलहाल बीजेपी के पास 25 लोकसभा सांसद हैं जबकि कांग्रेस-जेडीएस के पास केवल 2 लोकसभा सांसद हैं। इस चुनाव परिणाम का असर बाकी राज्यों पर भी पड़ने की संभावना है
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत हासिल हो गया है। 224 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को 130 के करीब सीटें मिलती दिख रही हैं। इस चुनाव का सियासी अहमियत सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से भी अहम माने जा रहे हैं।
कर्नाटक में बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा है। चुनावी नतीजों से साफ है कि जनता में सरकार के खिलाफ नाराजगी थी। बीजेपी ने दियुरप्पा की जगह बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया था लेकिन जनाधार के मामले में बोम्मई का कुछ खास प्रभाव नहीं रहा।
राज्य में बीजेपी को तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले येदियुरप्पा को साइड लाइन करने और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार और पूर्व डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावदी को टिकट नहीं देने की वजह से लिंगायत समुदाय में भी नाराजगी दिखी है। ये सभी लिंगायत समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं और इनको नज़रअंदाज करना कहीं न कहीं पार्टी को भारी पड़ी है।
वहीं, कांग्रेस के पास डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया जैसे मजबूत नेता थे और उनके सामने बोम्मई कुछ खास नहीं कर पाए। इसके अलावा, कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया। पूरे कैंपेन में पार्टी 40 फीसदी कमीशन के मुद्दे को उठाती रही और बीजेपी इसका काट नहीं निकाल पाई।
कर्नाटक की जनता ने ध्रुवीकरण की राजनीति को भी नकार दिया है। बजरंगबली का मुद्दा हो या मुस्लिम आरक्षण खत्म करने मुद्दा, बीजेपी ने अपनी तरफ से हिंदुत्व कार्ड खेलने की कोशिश तो पूरी की लेकिन कर्नाटक की जनता ने इसमें बहुत दिलचस्पी नहीं ली। जहां तक बात सियासी समीकरण की है, तो बीजेपी न ही अपने कोर वोट बैंक लिंगायत समुदाय को अपने साथ जोड़े रख पाई और ना ही दलित, आदिवासी, ओबीसी और वोक्कालिंगा समुदाय का दिल जीत सकी।
बीजेपी के लिए दक्षिण के द्वार बंद?
इस हार के साथ ही दक्षिण भारत से बीजेपी का सूपड़ा साफ हो गया है और पार्टी को मिशन-साउथ में बहुत बड़ा झटका लगा है। यही नहीं, इससे बीजेपी के अखिल भारतीय पार्टी होने वाले दावे को भी झटका लगा है।
दक्षिण के छह राज्यों में 130 लोकसभा सीटें आती हैं जो कुल लोकसभा सीटों का करीब 25 फीसदी हैं। ऐसे में सियासी तौर पर केंद्र में सरकार बनाने के लिहाज से दक्षिण भारत भी काफी महत्वपूर्ण है। बीजेपी अपने दम पर दक्षिण के राज्यों में से सिर्फ कर्नाटक में ही जड़ें जमा पाई थी। आंध्र प्रदेश, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और तेलंगाना में बीजेपी अभी तक खुद को स्थापित नहीं कर पाई है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कर्नाटक और तेलंगाना में सीटें मिली थी, लेकिन दक्षिण के बाकी राज्यों में उसे सीट नहीं मिली थी।
कर्नाटक के जरिए बीजेपी दक्षिण में अपना पैर पसारना चाहती थी लेकिन यहां उसे सफलता नहीं मिली है। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटें हैं और यहां बीजेपी की हार निश्चित रूप से पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। कर्नाटक में फिलहाल बीजेपी के पास 25 लोकसभा सांसद हैं जबकि कांग्रेस-जेडीएस के पास केवल 2 लोकसभा सांसद हैं। इस चुनाव परिणाम का असर बाकी राज्यों पर भी पड़ने की संभावना है।
तमिलनाडु और तेलंगाना में, बीजेपी सत्ताधारी दलों- डीएमके और बीआरएस के खिलाफ आक्रामक कैंपेन चला रही है। साथ ही, पीएम मोदी केरल को भी लगातार सौगात दे रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी की इस हार से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित दक्षिण के बाकी राज्यों में उसको बड़ा सियासी नुकसान हो सकता है।
पीएम मोदी की छवि को नुकसान
लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, किसी भी चुनाव में बीजेपी के लिए पीएम मोदी ही चेहरा रहते हैं। हमेशा की तरह कर्नाटक में भी बीजेपी के पूरे चुनावी कैंपेन का मुख्य चेहरा पीएम मोदी ही रहे। इस साल की शुरुआत से लेकर चुनाव तक पीएम मोदी लगातार कर्नाटक दौरे पर थे और चुनावी कैंपेन के आखिरी चरण में ही उन्होंने राज्य में 20 से ज्यादा रैलियां की थी।
ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में लोगों के बीच एक मैसेज जा सकता है कि पीएम मोदी का चेहरा अब उतना असरदार नहीं रह गया है। विपक्ष का यह भी मानना है कि मोदी मैजिक अब ठहर सा गया है।
इस चुनाव परिणाम से बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत कैंपेन को भी बड़ा झटका लगा है। 2024 में लोकसभा के चुनाव हैं और इससे पहले राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में चुनाव होने हैं। इनमें से राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है और मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस की स्थिति ठीक-ठाक है।
इन नतीजों से राहुल गांधी की इमेज पर एक सकारात्मक असर हो सकता है और कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी एकता को मजबूत करने का रास्ता भी खुल सकता है। कुल मिलाकर, कांग्रेस के लिए कर्नाटक की जीत 2024 में बड़ी लड़ाई से पहले माहौल बनाने का अच्छा मौका है और यह पार्टी के लिए संजीवनी का काम करेगी।
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