फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Journey of the lioness of the jungle: From the valleys of Kashmir to the dense forests

जंगल की शेरनी का सफर: कश्मीर की वादियों से घने जंगलो तक

Fri, 15 Mar 2024 12:38 PM IST
Anu Arshita अनु अर्शिता
Updated Fri, 15 Mar 2024 12:38 PM IST
सार

एक फोटोग्राफर के रूप में, लतिका ने जंगल के बीचों-बीच जाकर, उसकी सुंदरता और चुनौतियों का दस्तावेजीकरण करके रूढ़ियों को तोड़ा। अपने लेंस के माध्यम से, उन्होंने न केवल वन्यजीवों की असुरक्षा को बल्कि महिला भावना की ताकत और लचीलेपन को भी प्रदर्शित किया।

विज्ञापन
Journey of the lioness of the jungle: From the valleys of Kashmir to the dense forests
लतिका नाथ। - फोटो : अनु अर्शिता

विस्तार

भारत के हृदय में, जहां जंगलों और नदियों के रहस्यमय परिदृश्य मिलते हैं, वहां एक ऐसी कहानी मौजूद है जो इस भूमि की तरह ही मंत्रमुग्ध कर देने वाली है। ये कहानी है भारत की बाघ राजकुमारी लतिका नाथ की, जिसमें साहस, जुनून और प्रकृति के प्रति गहरा प्रेम शामिल है। ऐसी दुनिया में जहां जंगली जानवर लगातार खतरे में हैं, लतिका आशा की किरण बनकर खड़ी है और जंगलों में रहने वाले जीवों की रक्षा के लिए अथक प्रयास कर रही है।

विज्ञापन


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस उपलक्ष्य में, लतिका नाथ के साथ हुए साक्षात्कार (इंटरव्यू) की एक झलक को प्रस्तुत किया है जिसकी यात्रा शक्ति, जुनून और वन्यजीव संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में सामने आती है। भारत की बाघ राजकुमारी (दी टाइगर प्रिंसेस) के रूप में जानी जाने वाली लतिका की कहानी सिर्फ शाही विरासत के बारे में नहीं है, बल्कि उन महिलाओं की शक्ति का प्रमाण है जो बाधाओं को तोड़ती हैं और साहस और दृढ़ विश्वास के साथ अपनी नियति को आकार देती हैं।
विज्ञापन


लेंस के माध्यम से रूढ़िवादिता को तोड़ना

एक फोटोग्राफर के रूप में, लतिका ने जंगल के बीचों-बीच जाकर, उसकी सुंदरता और चुनौतियों का दस्तावेजीकरण करके रूढ़ियों को तोड़ा। अपने लेंस के माध्यम से, उन्होंने न केवल वन्यजीवों की असुरक्षा को बल्कि महिला भावना की ताकत और लचीलेपन को भी प्रदर्शित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


लतिका मानती हैं की जब भी आप किसी ऐसी जगह जाते हैं जहां पर प्रकृति अपने आप में संपूर्ण होती है तब ऐसा लगता है की आप भगवान के बनाये एक मंदिर में हो। और जैसे लोग खुद को फोकस्सड रखने के लिए मैडिटेशन करते हैं और जैसा उस समय वो लोग महसूस करते है, मुझे वैसा ही महसूस होता है जब में प्रकृति क नज़दीक होती हूं फिर चाहे वो हिमालय की छोटी हो या फिर घाना जंगल, या एक शेर के साथ बैठना या फिर किसी कछुए को समुद्र से आते देखना या फिर एक चिड़िया को अपना घोसला बनाते हुए देखना ये नजारा सच में मंत्र मुग्ध कर देने वाला होता है। कैमरा के लेंस से जब हम एक चीज पर फोकस करते हैं तब हम सारी दुनिया भूल जाते है और यही उनके लिए मैडिटेशन है।

चैंपियन संरक्षण

लतिका की यात्रा में एक गहरा मोड़ आया क्योंकि वह वन्यजीव संरक्षण के लिए एक सशक्त शक्ति के रूप में विकसित हुई। मुख्य रूप से पुरुषों के कब्जे वाले क्षेत्र में, उन्होंने निडर होकर भारत की लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा के लिए अपने प्रयासों को समर्पित करते हुए, इस मुद्दे का समर्थन किया। लतिका ने साझा किया की बहुत से पुरुष कंजर्वेशनिस्ट्स ने भी उन्हें अपना निशाना बनाया और जिसकी वजह से लतिका को शोध तक छोड़नी पड़ी। परिवार और दोस्तों से सहायता मिलने के बावजूद यह यात्रा फूलों से भरी तो बिलकुल भी नहीं थी।

आज से करीब 30 दशक पहले जब मुट्ठी भर औरतें विज्ञान जैसे सब्जेक्ट में अपना भविष्य बनाने के बारे में सोचती थी और उसमे भी अगर कोई महिला वन्य जीवन (वाइल्डलाइफ) जैसी फील्ड में जाना चाहती हो जो की बेहद जोखिम भरी होने के साथ साथ पुरुष प्रमुख थी उसमे आगे बढ़ना चाहती है तो यकीन मानिए समाज में कुछ पुरुष प्रधान सोच रखने वाले लोगो की कमी नहीं रही होगी जिन्होंने हर कदम पर मुश्किलें खड़ी की और हर कदम पर ये जताने की कोशिश की होगी की एक औरत कैसे काम करेगी इस फील्ड में और ये सिलसिला शुरुआत के कुछ सालो तक नहीं बल्कि बहुत लम्बे समय तक चलता रह। लेकिन वह मानती हैं की जब आप खुद पर भरोसा करते है की आपको इसी राह में आगे बढ़ना है तो कोई मुश्किल आपका रास्ता नहीं रोक सकती।

भारत और पर्यावरण संरक्षण

हम अपने आप में सौभाग्यशाली है की हमारी इतनी आबादी होने के बावजूद हम इस पृथ्वी के सबसे ज्यादा जैव विविधता से भरपूर की में हैं और हमारे अंदर एक अंदरूनी भावना है की हम पृथ्वी और प्रकृति का इतना आदर करते है। भारत सही दिशा में कदम बढ़ा रहा है लेकिन अपनी बहुत काम करना बाकी है और समय की मांग यही है की सिटीजन साइंस, प्राइवेट सेक्टर, और गवर्नमेंट एक जुट होकर प्रकृति को बचाए।

लतिका बताती हैं की अगर हम प्लेनेट अर्थ के इतिहास को खंगाले तो हम देखेंगे की परिवर्तन हमेशा से हुए है और प्रकृति अपने तरीके से इंसान को दिखा रही है की यूं तो इंसान खुद को बहुत शक्तिशाली तो समझता है लेकिन वो भी मात्र एक भाग है प्रकृति का क्योंकि अगर पृथ्वी पर जीवन ही खत्म हो जयेगा तो इंसान का वजूद भी खत्म हो जएगा। इसीलिए हमें अपने तरीके बदलने होंगे और हम सभी को मिलकर इसे सफल बनाना होगा।

सहानुभूति और जुड़ाव

लतिका की कहानी भावनात्मक स्तर पर गूंजती है, न केवल एक संरक्षणवादी के रूप में बल्कि एक महिला के रूप में जो पुरुष-प्रधान क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। लतिका में, हम एक ऐसी महिला को पाते हैं जो मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच की दीवारों को तोड़ती है, करुणा और समझ पर बने संबंध बनाती है।

इनका जीवन बिलकुल भी आसान भी थी इन्होने भी बहुत से उतार चढाव देखे है अपनी इस यात्रा में बहुत सी कठिनाइयों का सामना किया पर कभी हार नहीं मानी उनका डट कर सामना किया बहुत सी लड़ाइयां लड़ने के बाद आज यहाँ तक का सफर तय कर पाई हैं। "गलती से सीखो, उठो और आगे बढ़ो उस गलती में दलदल की तरह फस्स के मत रह जाओ आगे बढ़ना जरुरी है। जब हम डर के सामने निडर होकर कदम बढ़ाते है तब वही असली बहादुरी कहलाती है"- लतिका नाथ।

वैश्विक आह्वान

इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर, लतिका नाथ महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण प्रबंधन के प्रतिच्छेदन के लिए एक वैश्विक राजदूत के रूप में खड़ी हैं। उनकी यात्रा हमें संरक्षण में महिलाओं के अमूल्य योगदान को पहचानने के लिए प्रेरित करती है, और दुनिया भर के लोगों को उस ग्रह की रक्षा में हाथ मिलाने के लिए आमंत्रित करती है जिसे हम सभी अपना घर कहते हैं।

उनकी कहानी हर जगह महिलाओं के लिए प्रेरणा का काम करती है, उन्हें सामाजिक बाधाओं से मुक्त होने और निडर होकर अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है।जैसा कि हम दुनिया भर में महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करते हैं, आइए लतिका की कहानी को एक ऐसे भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक आह्वान में बदलें, जहां महिलाएं हमारी प्राकृतिक दुनिया के आश्चर्यों को संरक्षित करने में नेतृत्व करती रहें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed