फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   jharkhand assembly election 2019 bjp citizenship amendment act protest

एनआरसी और नागरिकता कानून: झारखंड चुनावों में कितनी मदद मिलेगी भाजपा को?

Sat, 21 Dec 2019 06:10 PM IST
Sanjiv Pandey संजीव पांडेय
Updated Sat, 21 Dec 2019 06:10 PM IST
विज्ञापन
jharkhand assembly election 2019 bjp citizenship amendment act protest
हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में धारा-370 एक मुख्य चुनावी मुद्दा था। - फोटो : अमर उजाला

हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में धारा-370 एक मुख्य चुनावी मुद्दा था। अब झारखंड में भी विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया। झारखंड के अंतिम तीन चरणों के चुनाव में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी चुनावी मुद्दा बन गया। झारखंड में हो रहे चुनावों के बीच ही देश भर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन शुरु हो गए।

विज्ञापन


दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में विरोध प्रर्दशन के दौरान हिंसा हो गई। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड में चुनावी सभा में नागरिकता संशोधन विधेयक का उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर राष्ट्रविरोधी ताकतों को हवा दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
विज्ञापन


अब बहस यही हो रही है कि झारखंड के चुनावी समर में भाजपा को नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी कितना मदद देगी? क्योंकि भाजपा ने काफी सोच-समझ कर एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून को मुद्दा बनाया। दरअसल राज्य में लगभग 15 प्रतिशत मुस्लिम आबादी होने के कारण राज्य धार्मिक तौर पर संवेदनशील रहा है। राज्य में हिंदू-मुस्लिम तनाव का पुराना इतिहास है। राज्य के शहरी इलाको में मुस्लिम आबादी है, कई शहर हिंदू-मुस्लिम दंगों के गवाह भी रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

jharkhand assembly election 2019 bjp citizenship amendment act protest
झारखंड में नागरिकता संशोधन बिल पारित होने के बाद तीन चरण के चुनाव संपन्न हुए। - फोटो : AMAR UJALA

बिल पारित होने के बाद तीन चरण के चुनाव हुए
झारखंड में नागरिकता संशोधन बिल पारित होने के बाद तीन चरण के चुनाव संपन्न हुए। इस दौरान पूरे देश में तनाव फैल गया था। बिल का विरोध असम और पूरे पूर्वोतर भारत में शुरू हो गया था। वहीं दिल्ली में भी बवाल मच गया था। झारखंड में 12, 16 और 20 दिसंबर को जिन इलाकों में चुनाव हुए वे पहले से ही सांप्रदायिक तनाव के लिए जाने जाते है।

इन इलाको में तनाव कई बार हुए है। धनबाद, गिरिडीह से लेकर रांची, हजारीबाग, कोडरमा, चतरा आदि इलाके में कई बार हिंदू-मुस्लिम आबादी के बीच तनाव हुआ है। वैसे में भाजपा ने काफी सोच समझ कर नागरिकता संशोधन कानून को मुद्दा बनाया, ताकि दोनों समुदायों के बीच वोटिंग के दौरान तीखा विभाजन हो और इसका लाभ भाजपा को मिले।

अंतिम चरण में जिन इलाको में चुनाव हुए है, वहां कुछ इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या भी है। वैसे में नागरिकता संशोधन विधेयक का लाभ भाजपा ने अंतिम तीन चरण में उठाने की कोशिश की है। हजारीबाग तो किसी जमाने में दंगों के लिए मशहूर था।

प्रधानमंत्री ने चुनावी भाषण में नागरिकता कानून को बनाया मुद्दा
12 दिसंबर को आयोजित तीसरे चरण में 17 विधानसभा सीटों पर चुनाव संपन्न हुआ। इससे ठीक एक दिन पहले 11 दिसंबर को राज्यसभा ने नागरिकता संशोधन विधेयक को हरी झंडी दे दी थी। इसके बाद देश भर में कई जगहों पर तनाव पैदा हुआ। उधर भाजपा ने नागरिकता संशोधन विधेयक को झारखंड में चुनावी मुद्दा बना दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुमका में आयोजित रैली में कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कल तक जो पाकिस्तान करता आया था आज वो कांग्रेस कर रही है। उन्होंने कहा कि जो आगजनी फैला रहे है, उनके कपड़ों से पता चल जाता है। निश्चित तौर पर भाजपा को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री के इन भाषणों का लाभ बचे चरणों में मिलेगा। 16 दिसंबर को चौथे चरण में कोयलांचल की 15 सीटों पर चुनाव हुआ था।

धनबाद, बोकारो औऱ गिरिडीह जैसे जिले हिंदू-मुस्लिम तनाव के हिसाब से संवेदनशील जिले हैं। भाजपा को उम्मीद है कि इन सीटों पर प्रधानमंत्री दवारा उठाए गए राष्ट्रवादी मुद्दों का लाभ भाजपा को मिलेगा। कोयलांचल की ज्यादातर सीटें पिछली बार भाजपा ने जीती थी। इस बार भाजपा को झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन से कड़ी टक्कर कोयलांचल में मिल रही थी

कुछ दूसरे पहलू भी हैं
झारखंड चुनाव में कुछ दूसरे पहलू भी है। दरअसल भाजपा को नागरिकता संशोधन विधेयक का लाभ झारखंड में तभी मिलेगा जब आदिवासी मतदाता भाजपा के उठाए गए राष्ट्रवादी मुददों के प्रभाव में होंगे। शहरी मतदाता जिसमें अच्छी संख्या बिहारियों, बंगालियों और दूसरे राज्यो से आए हुए लोगों की भी है वे कुछ हद तक नागरिकता संशोधन विधेयक के कारण भाजपा के पक्ष मे जा सकते हैं, लेकिन प्रदेश की आदिवासी जनता इससे कितना पसंद कर रही है, इस पर कोई राजनीतिक पंडित खुलकर बताने को तैयार नहीं हैं।

राजनीतिक पंडितों के एक बडे वर्ग का कहना है कि अगर नागिरकता संशोधन विधेयक का मुद्दे का प्रभाव अंतिम तीन चरणों के चुनाव पर पड़ गया तो भाजपा का बचाव हो जाएगा। लेकिन झारखंड में इस बार आदिवासी बनाम गैर आदिवासी, बेरोजगारी, भूखमरी, बिजली और सड़क की खराब हालत बहुत बड़ा मुद्दा है।

इस कारण भाजपा की परेशानी खत्म होती नहीं दिख रही है। रही सही कसर शहरी इलाकों में प्याज, लहसुन और जरूरी खाद सामाग्री की बढ़ी कीमतों ने पूरी कर दी है। वैसे में शहरी हिंदू मतदाता बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर वोटिंग करेगा या भाजपा राष्ट्रवाद की धारा में बहेगा यह कहना मुश्किल है। राज्य के अंदर कारपोरेट के बढ़ते प्रभाव और आदिवासी बनाम गैर आदिवासी का मुद्दा भी आदिवासियों को प्रभावित कर रहा है। 

 

क्या महाराष्ट्र और हरियाणा की पुनरावृति होगी?
दरअसल, चुनावी पंडित झारखंड में हंग असेंबली की भविष्यवाणी कर रहे है। एग्जिट पोल भी हंग असेंबली के संकेत दे रहे है। हालांकि एग्जिट पोल पर भरोसा किया नहीं जा सकता। हो सकता है एग्जिट पोल के विपरित भाजपा पूर्ण बहुमत प्राप्त कर ले। यह भी हो सकता है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन को ही पूर्ण बहुमत मिल जाए। क्योंकि हरियाणा और महाराष्ट्र में ज्यादातर एग्जिट पोल गलत साबित हो गए। एग्जिट पोल दोनों राज्यों में भाजपा की भारी जीत बता रहे थे। लेकिन दोनों राज्यों में भाजपा को 2014 के विधानसभा चुनावों के मुकाबले नुकसान हो गया।

हरियाणा में तो भाजपा की सरकार किसी तरह से बच गई। लेकिन महाराष्ट्र में भाजपा के हाथ से सत्ता निकल गई। जबकि दोनों राज्यों के चुनावों के दौरान भाजपा ने राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाया था। भाजपा को खासा भरोसा था कि धारा-370 के विशेष प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर से हटाए जाने के बाद भाजपा को भारी राजनीतिक लाभ मिलेगा। दोनों राज्यों में भाजपा नेता अपने भाषण में स्थानीय मुद्दे भूल चुके थे।

वे चुनावों के दौरान अति राष्ट्रवादी मुद्दों पर भरोसा कर रहे थे। जिसमें पाकिस्तान और धारा-370 प्रमुख था। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में 370 को चुनावी मुद्दा बनाया था। लेकिन एकाएक दोनों राज्यों में चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिए कि राष्ट्रीय मुद्दे लोकसभा चुनावों में सही है, लेकिन विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय मुद्दों का कोई मतलब नहीं है। भाजपा को दोनों राज्यों में सीटों का नुकसान हो गया। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।       

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed