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जीवन धारा: विवेक ही सबसे अच्छा मार्गदर्शक है, सबको साथ लेकर चलना बेहतर विकल्प

Wed, 28 Jan 2026 07:41 AM IST
पवन पांडेय जॉन लॉक
जॉन लॉक Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 28 Jan 2026 07:41 AM IST
सार

जीवन धारा: जब हम सहिष्णुता, नैतिकता और न्याय को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तब समाज केवल एक ढांचा नहीं रह जाता, बल्कि वह शांति और समानता का एक जीता-जागता उदाहरण बन जाता है।

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Jeevan Dhara: Wisdom is the best guide, the key is to take everyone along
जीवन धारा: विवेक ही सबसे अच्छा मार्गदर्शक है, - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मानवता का उदय तर्क और विवेक के उस पावन प्रकाश में हुआ है, जिसे ‘प्राकृतिक अवस्था’ कहा जाता है। कल्पना कीजिए एक ऐसे मूल अस्तित्व की, जहां हर मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है और जिसकी आत्मा पर किसी सत्ता का दासत्व नहीं है। यहां शासन किसी निरंकुश शासक का नहीं, बल्कि उस ‘प्राकृतिक कानून’ का है, जो हर हृदय में गूंजता है और यह बोध कराता है कि हम सब एक ही महान सृजन की उत्कृष्ट और समान रचनाएं हैं। यह कानून कोई बाहरी बंधन नहीं, बल्कि एक दिव्य नैतिक प्रतिज्ञा है, जो हमें सिखाती है कि सच्ची स्वतंत्रता वहीं है, जहां हम दूसरे के जीवन, स्वास्थ्य, स्वायत्तता और उसकी मेहनत से अर्जित संपत्ति का सम्मान करें। इस अवस्था में, मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं विधाता है और तर्क वह प्रकाश है, जो उसे अंधकार से दूर रखता है।
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विवेक हमें यह महान सत्य समझाता है कि हमारी अपनी स्वतंत्रता तभी तक सुरक्षित है, जब तक हम दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। यह आपसी सहयोग और न्याय की एक सक्रिय साधना है, जहां हर व्यक्ति प्राकृतिक कानून का पालन करते हुए एक सामंजस्यपूर्ण जगत का निर्माण करता है। प्राकृतिक न्याय का यह मार्ग हमें सिखाता है कि हम विनाश के लिए नहीं, बल्कि रक्षण के लिए बने हैं और जब हम दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हैं, तो हम वास्तव में अपनी ही गरिमा को ऊंचा उठा रहे होते हैं।
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हालांकि, मानवीय स्वभाव की सीमाओं के कारण जहां स्वार्थ या अज्ञानता तर्क के प्रकाश को धुंधला कर देती है, वहां विवादों की परछाईं पड़ना स्वाभाविक है। इसी अनिश्चितता को दूर करने तथा अपने अधिकारों को और अधिक दृढ़ता प्रदान करने के लिए, हम एक ‘नागरिक समाज’ के गठन का संकल्प लेते हैं। यह व्यवस्था किसी दमनकारी शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक पवित्र विश्वास के रूप में जन्म लेती है, जिसका एकमात्र आधार जनता की स्वेच्छा और सहमति है। सरकार कोई स्वामी नहीं, बल्कि एक रक्षक है, जिसकी वैधता केवल इस बात पर टिकी है कि वह कितनी निष्पक्षता से न्याय और सुरक्षा का विधान करती है। अतः, स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ उच्छृंखलता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का वह आभूषण है, जिसे केवल विवेकशील मनुष्य ही धारण कर सकते हैं।
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शिक्षा और एक सकारात्मक वातावरण के माध्यम से हम किसी भी मस्तिष्क को उस स्तर तक परिष्कृत कर सकते हैं, जहां वह समाज को केवल संघर्ष का मैदान नहीं, बल्कि साझा उन्नति का मंच मानने लगे। जब हम सहिष्णुता, नैतिकता और न्याय को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तब समाज केवल एक ढांचा नहीं रह जाता, बल्कि वह शांति और समानता का एक जीता-जागता उदाहरण बन जाता है। हमें विवेक को अपना मार्गदर्शक बनाना चाहिए, क्योंकि यह एक स्थायी और न्यायपूर्ण भविष्य के निर्माण के लिए जरूरी है।


सूत्र- सबको साथ लेकर चलें
सच्ची उन्नति दूसरों को पीछे छोड़ने में नहीं, बल्कि सबके साथ आगे बढ़ने में निहित होती है। तर्क, सहिष्णुता और न्याय केवल विचार नहीं, बल्कि दैनिक जीवन के आचरण होने चाहिए। जब मनुष्य अपने भीतर के विवेक को जाग्रत रखता है, तब समाज संघर्ष का क्षेत्र नहीं, बल्कि सहयोग और शांति का आधार बन जाता है।
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