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जीवन धारा: ताकि अंत में पछताना न पड़े... इच्छाएं और व्याकुलताएं हमें भटकाती हैं; खुद को गंभीरता से लेना सूत्र
Mon, 16 Jun 2025 07:04 AM IST
ज्योति भास्कर
हेनरी डी. थोरो
हेनरी डी. थोरो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 16 Jun 2025 07:04 AM IST
सार
हमारे हर कदम पर जटिलता हमें बांध लेती है। अनगिनत इच्छाएं व व्याकुलताएं हमें भटकाती हैं और हमारा जीवन छोटी-छोटी बातों में बर्बाद हो जाता है। इसलिए हमें हर छोटे पल को पूर्ण रूप से जीना चाहिए।
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इच्छाएं और व्याकुलताएं हमें भटकाती हैं (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
मैंने प्रकृति का हाथ थामा और वन में गया, क्योंकि मैं जीना चाहता था। मैं जीवन के आवश्यक सत्य को सामने लाना चाहता था और देखना चाहता था कि यह मुझे क्या सिखा सकता है, ताकि मरते वक्त पछताना न पड़े कि मैंने जीवन जिया ही नहीं। मेरे लिए जीना बहुत प्रिय है। हमारे लिए जो सच में मायने रखता है, शांत चिंतन, प्रकृति की लय, सत्य की खोज, यही जीवन है। हमारे जीवन में खुशी केवल चीजों का संग्रह करने में नहीं, बल्कि आवश्यक चीजों को पहचानने में है।
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जीवन का मतलब है, हर कदम सोच-समझकर उठाना और समय के साथ उसका मूल्य तौलना। हमारे प्रत्येक कदम पर जटिलता हमें बांध लेती है। अनगिनत इच्छाएं और व्याकुलताएं हमें भटकाती हैं। इस तरह हमारा जीवन छोटी-छोटी बातों में बर्बाद हो जाता है। इसलिए हमें हर छोटे पल को पूर्ण रूप से जीना चाहिए। जीवन अनेक ‘छोटे क्षणों’ का संग्रह है और प्रत्येक क्षण में अनगिनत संभावनाएं मौजूद हैं। हर पल को थाम लें और दुनिया से पूरी तरह जुड़ जाएं। चाहे पौधे उगाना हो या चींटियों को देखना, हर चीज में अनोखा आनंद है। यह सजगता हमें वर्तमान में ले आती है।
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इस धरती पर जीवन जीना मुश्किल नहीं, बल्कि एक खेल है, अगर हम सरलता और बुद्धिमानी से जिएं। ज्यादातर लोग निराशा का जीवन जीते हैं। इससे बचने के लिए, हमें अपना रास्ता स्वयं बनाना होगा, सच्चे मन से जीना होगा। एक हल्की-सी बारिश घास पर जमी धूल को साफ कर उसे हरा कर देती है। इसी तरह बेहतर विचारों के आने से हमारी संभावनाएं उज्ज्वल हो जाती हैं। यदि हम हमेशा वर्तमान में जिएं और प्रत्येक बदलाव का लाभ उठाएं, जैसे घास हल्की ओस के प्रभाव को स्वीकार करती है, तो जीवन का असली आनंद उठा सकेंगे।
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जीवन में प्रकृति खुशी की राह का केंद्र है। पत्तियों की सरसराहट, नदी की लहरें, ये केवल दृश्य नहीं, बल्कि सार्थक जीवन के साथी हैं। प्रत्येक मौसम को जिएं। प्रकृति की गोद में हमें शांति और ऊर्जा, दोनों मिलती हैं। हमारा जीवन नदी के पानी की तरह है, जो लगातार बहता रहता है, बदलता रहता है, और गति से भरा रहता है। जिस तरह नदी का पानी ऊंचा-नीचा या शांत-अशांत हो सकता है, उसी तरह जीवन में हमारे अनुभव और भावनाएं भी हो सकती हैं।
यदि कोई अपने सपनों की ओर आत्मविश्वास से बढ़े और वह जीवन जिए, जिसकी उसने कल्पना की, तो उसे ऐसी सफलता मिलेगी, जो सामान्य घड़ी में नहीं मिलती। सच्चे सपनों का पीछा करें। सरलता, सजगता, और प्रकृति के साथ मिलकर जीवन जिएं। जीवन जीने का कोई खास समय नहीं होता, इसलिए हर पल खुश रहें। खुशी मंजिल नहीं, बल्कि यात्रा है। खुशी एक तितली की तरह है, जितना अधिक आप इसका पीछा करेंगे, उतना ही यह आपसे दूर भागेगी, लेकिन यदि आप अपने आसपास की अन्य चीजों पर ध्यान देंगे, तो यह धीरे से आकर आपके कंधे पर बैठ जाएगी।
सूत्र: खुद को गंभीरता से लें
हमारा स्वयं को देखने का नजरिया मायने रखता है। जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण ही अहम होता है। यदि आप खुद को बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो बहुत जल्द आप अपने रोजमर्रा के जीवन में हंसी के पात्र बन जाएंगे। हर पल अपने विचार को बेहतर करें और जीवन को सुंदर बनाएं।