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जीवन धारा: भाग्य से प्रेम करने का साहस रखें...भविष्य से नहीं डरना ही एकमात्र सूत्र

Wed, 07 Jan 2026 08:17 AM IST
पवन पांडेय फ्रेडरिक नीत्शे
फ्रेडरिक नीत्शे Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 07 Jan 2026 08:17 AM IST
सार

हर घटना को अपनी नियति का आवश्यक अंग मानें। यह स्वीकृति आपको गुलाम नहीं बनाती, बल्कि आपको मुक्त करती है। तब आप भाग्य के अधीन नहीं रहते, बल्कि उसके साथ नृत्य करने लगते हैं।

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Jeevan Dhara: Have the courage to love destiny...the only formula is not to fear the future
जीवन धारा: भाग्य से प्रेम करने का साहस रखें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीवन अक्सर हमारी योजनाओं के अनुसार नहीं चलता। वह अपनी ही लय में चलता है-कभी हमें ऊंचाइयों पर ले जाता है, कभी गहराइयों में धकेल देता है। इसमें पीड़ा है, असफलताएं हैं, अपमान है और ऐसे क्षण भी आते हैं, जब लगता है कि पूरा संसार हमारे विरुद्ध खड़ा हो गया है। लेकिन यहीं से जीवन का एक गहरा और क्रांतिकारी सत्य प्रकट होता है-सच्ची शक्ति परिस्थितियों को बदलने में नहीं, बल्कि उन्हें पूरे हृदय से स्वीकार करने और उनसे प्रेम करने में है। यही है अमोर फाति, यानी अपने भाग्य से प्रेम करना।
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अमोर फाति का अर्थ समर्पण नहीं, बल्कि स्वीकृति है। यह कहना नहीं कि ‘मुझे सहना ही होगा’, बल्कि यह कहना है कि मैं इसे चाहता हूं। जो घट रहा है, वह केवल सहने योग्य नहीं, बल्कि आवश्यक है। यह दृष्टि जीवन को युद्धभूमि नहीं, बल्कि आत्म-निर्माण की प्रयोगशाला मानती है। जो तुम्हें तोड़ता है, वही तुम्हें गढ़ता है। जो तुम्हें चोट पहुंचाता है, वही तुम्हें गहराई देता है। बुरी चीजों को भी सुंदर देखना सीखो। तब तुम उन लोगों में से एक बन जाओगे, जो स्वयं चीजों को सुंदर बना देते हैं। बीमारी, हानि, तिरस्कार-ये कोई अभिशाप नहीं, बल्कि भाग्य के उपहार हैं। इनके विरुद्ध युद्ध मत छेड़ो। जो तुम्हारे हिस्से आया है, उसे गले लगाओ। भाग्य से लड़ने वाला थक जाता है, लेकिन भाग्य से प्रेम करने वाला शक्तिशाली हो जाता है।
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स्वयं से एक कठोर प्रश्न पूछो-यदि यही जीवन, जैसा है, हर आनंद और हर पीड़ा के साथ, अनंत बार दोहराया जाए, तो क्या तुम इसे फिर भी ‘हां’ कहोगे? या स्वीकारोगे? यही अमोर फाति की अंतिम परीक्षा है। महान वही है, जो कह सके कि कुछ भी अलग नहीं होना चाहिए। अतीत को दोष मत दो, वर्तमान को कोसो मत। हर घटना को अपनी नियति का आवश्यक अंग मानो। यह स्वीकृति तुम्हें गुलाम नहीं बनाती, बल्कि यह तुम्हें मुक्त करती है। तब तुम भाग्य के अधीन नहीं रहते, बल्कि उसके साथ नृत्य करने लगते हो। यही स्वतंत्र आत्मा की पहचान है।
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अमोर फाति निष्क्रियता नहीं सिखाता। यह सक्रिय, साहसी और रचनात्मक स्वीकृति है। जब कोई रिश्ता टूटे, तो उसे पतन नहीं, विकास का द्वार समझो। जब जीवन तुम्हें चुनौती दे, तो उसे अवसर मानो-स्वयं को और ऊंचा उठाने का अवसर। खुद को ‘हां’ कहने वाला बनाओ। हर सुबह यह संकल्प लो कि आज जो भी आएगा, मैं उसका स्वागत करूंगा। दर्द आए, तो पूछो कि यह मुझे क्या मजबूत बना रहा है? सफलता मिले, तो कृतज्ञ बनो और उसे भाग्य का वरदान मानो। ऐसी मनोवृत्ति चिंता को जला देती है, भय को निष्प्रभावी कर देती है। तब तुम जीवन के साधारण पात्र नहीं रहते, तुम उसके नायक बन जाते हो। हर अध्याय को पूरे उत्साह से जीने वाले नायक। भाग्य से प्रेम जीवन को बोझ नहीं, उत्सव बना देता है। दुख में भी सौंदर्य खोजो, हर क्षण को अमर बनाओ। जब तुम अपने भाग्य से प्रेम करने लगते हो, तब जीवन भी तुमसे प्रेम करने लगता है।


भविष्य से डरें नहीं
जीवन को बदलने की कोशिश मत करो, उसे अपनाना सीखो। जो घट रहा है, वही आवश्यक है, चाहे वह सुख हो या दुख। भाग्य से लड़ने वाला थक जाता है, जबकि प्रेम करने वाला शक्तिशाली बनता है। हर पीड़ा तुम्हें गढ़ने आई है, हर असफलता तुम्हें गहराई देने। अतीत को दोष मत दो, वर्तमान को स्वीकारो और भविष्य से भय मत खाओ।
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