'जनता कर्फ्यू' : इसी तरीके से देश दे सकता है कोरोना वायरस को मात
जब से कोरोना वायरस फैला है और उस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या पूरे विश्व में बढ़ती जा रही हैं, तब से एक चीज गौर करने वाली है कि यह वायरस हवा के माध्यम से नहीं फैलता बल्कि यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के द्वारा उपयोग की जाने वाली चीजों के संपर्क में आने और उन को छूने से फैलता है, तो फिर हम क्यों न सोशल डिस्टेंस बनाएं।
कुछ दिन के लिए हम घर पर रहें, बाहर न निकलें क्योंकि भारत में यह वायरस कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्टेज में नहीं है, परंतु सरकार ने एकदम संतुलित सटीक और सहयोगी कदम उठाते हुए कोरोनावायरस से लड़ने के लिए रविवार को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया है। 22 मार्च दिन रविवार को सुबह 7 से रात 9 बजे तक सभी नागरिकों को बाहर न निकलने की बात कही गई है। हां, जरूरी सेवा करने वाले लोगों को इससे छूट दी गई है। अर्थात् वे उस दिन बाहर निकल सकते हैं, परंतु सामान्य लोगों से रविवार को घर से बाहर निकलने की प्रधानमंत्री ने अपील की है।
कोरोना के फैलने के सबसे अधिक चांस कहां पर हैं?
रिसर्च के मुताबिक किसी भी स्थान पर कोरोनावायरस का लाइफ स्पैन अर्थात जिसे सामान्य भाषा में जीवनकाल कहा जाता है वह, बारह घंटे का है। कोरोना के फैलने के सबसे अधिक चांस कहां पर हैं? सार्वजनिक स्थानों पर। सार्वजनिक स्थानों पर अगर सुबह सात से रात नौ बजे तक अर्थात चौदह घंटे का कर्फ्यू या उन जगहों पर आवाजाही बंद हो जाए तो वायरस लाइफ चेन ही टूट जाएगा, जिसमें एक बड़ा लाभ यह भी होगा कि हमारी सड़के, बसें और ट्रेनें ऑफिस के दरवाजे रेलिंग लिफ्ट,डोर नाब अपने आप ही हो जाएंगे।
प्रधानमंत्री का यह जनता कर्फ्यू का आईडिया निश्चित तौर पर हमारे देश के वैज्ञानिक और वर्तमान समय में धरती पर भगवान, डॉक्टर के साथ एक साथ विचार-विमर्श से निकला होगा। शानदार आईडिया कह सकते हैं, हो सकता है आने वाले दिनों में हमारे पड़ोसी नेपाल, बांग्लादेश अफगानिस्तान पाकिस्तान में विश्व के अन्य देशों में भी इसका चलन शुरू हो क्योंकि इस रोग से बचने के लिए पूरा विश्व भारतीय संस्कृति की पहचान नमस्ते को अपना रहा है।
भारत सिर्फ यही तक रुका नहीं है, उसने सार्क देशों के साथ कोरोनावायरस पर नेतृत्व करने के बाद अब वह जी-20 के माध्यम से पूरे विश्व को एक मंच पर लाना चाहता है। इसके लिए जल्द ही वर्चुअल मीटिंग आयोजित होने वाली है, जिसकी मंजूरी मिल चुकी है। पूरी दुनिया इस वक्त और सदमे में जी रही है, जहां कभी लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था, जहां पर पैर रखने की जगह नहीं होती थी आज उन जगहों पर सन्नाटा पसरा है। इन सब बुरी खबरों के बीच कुछ अच्छी खबरें भी हमें नई उम्मीद जगाती हैं।
कोरोना वायरस के फेज 3 में पहुंचते ही हमारी हालत क्या होगी?
सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने इलाज ढूंढते हुए मलेरिया की दवा क्लोरोक्विन का प्रयोग करके मरीजों को ठीक किया। क्लोरोक्विन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी के तहत प्रयोग किया गया जिसके अच्छे परिणाम आए, जिसे अमेरिका ने भी मंजूरी दी है जिसकी घोषणा उनके राष्ट्रपति खुद की काबिलियत हमारे प्रतिभा और हमारे संस्कृतियों तथा परंपराओं का मजाक उड़ाने वाले हंसी बनाने वाले को इस वायरस के कहर ने सिखा दिया कि अंततः सनातन धर्म की परंपरा ही सर्वश्रेष्ठ है।
अब जो लोग इस भ्रम में है कि यह कोई आम वायरस है जो आता जाता रहता है न्यूजपेपर और न्यूज़ चैनलों का सुर्खियां बनता है और डराता है फिर अचानक जाता है तो है तो ऐसे लोगों को अब सतर्क रहने की आवश्यकता है तथा उन्हें अपनी मानसिकता त्याग देनी चाहिए और भीड़भाड़ जगहों में आना-जाना कम करना चाहिए तथा मास्क लगाकर सैनिटाइजर का उपयोग कर प्रधानमंत्री जी द्वारा दिए गए जरूरी बातों का पालन कर इस महामारी की लड़ाई को जीतने में सहयोग करना चाहिए पर इस महामारी में कुछ लोग जमकर लोगों का शोषण भी कर रहे हैं।
मास्क को उचित दाम पर ना बेचकर औने पौने दाम पर बेच रहे हैं क्या इमरजेंसी की हालात में हम ऐसे अपने देश की सेवा करेंगे अभी हम कोरोनावायरस के फेज टू में हमें इसी यहीं पर रोकना होगा अर्थात 31 मार्च तक फेज 3 में जाने से रोक दिया तो हमने कोरोनावायरस से समझ लो जीत जंग जीत ली अन्यथा फेज 3 में पहुंचते ही हमारी हालत क्या होगी उसकी कल्पना करना भी भयावह है।
जो लोगआइसोलेशन से भाग जा रहे हैं इन्हें सीधे जेल में डाला जाना चाहिए
अब सरकार उन लोगों से सख्ती से निपट जो लोग आइसोलेशन से भाग जा रहे हैं इन्हें सीधे जेल में डाला जाना चाहिए क्योंकि बीते दिनों इस प्रकार की खबरें भी कोरोना वायरस की तरह ही फैल रही है ऐसे लोगों की सोच समझ से परे है अरे भाई सरकार तुम्हें आइसोलेशन में रखना चाहती है तो तुम फिर उस से भागकर खुद की जान के साथ दूसरे की जान क्यों खतरे में डाल रहे हो।
विदेशों में सेलिब्रिटी भी इसके गिरफ्त में आ चुके हैं तो हमारे यहां भी इसक रुझान आने शुरू हो गए हैं बेबी डॉल का गाना गाकर चर्चा में आई कनिका कपूर का टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव आया है जिससे लखनऊ में हड़कंप मच चुका है वह अभी आइसोलेशन में है लखनऊ के कुछ क्षेत्र सील कर दिए गए हैं कनिका कपूर ने हाल ही में पार्टी की थी जिसमें पांच सौ लोग मौजूद थे, अब सरकार उन्हें ढूंढ रही हैं इन सेलिब्रिटीओं को तो कम से कम जागरूकता का ध्यान रखना चाहिए।
इनमें कई बड़ी हस्तियां भी शामिल हैं जिनमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके बेटे दुष्यंत सिंह भी शामिल है जिन्होंने 19 मार्च को लोकसभा सत्र में भी भाग लिया था अब अगर लोग यूं ही सरकारी दिशानिर्देशों का मजाक उड़ाते रहेंगे तो अकेले सरकार कहां तक इसका रोकथाम कर पाएगी। यह भी तो नहीं है कि अब भागकर विदेश में अपना इलाज करा लेंगे वहां की स्थिति तो यहां से भी बदतर है इटली और यूरोप का हाल और आंकड़े उठाकर देख लीजिए फिर हम क्यों इसे फैलाने में सहयोग कर रहे हैं हम इसे रोकने में सरकार की सहयोग क्यों नहीं करते इन दिनों दुनिया के कुछ हिस्सों में हीर्ड इम्यूनिटी की बात चल रही है
पूरी दुनिया में महामारी की हालत है
आइए जानते हैं क्या है अगर आज सरकार यह कहे कि देखो भैया हमने तो पहले ही करो ना को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दी है पूरी दुनिया में महामारी की हालत है। अब आप सभी हमारी हेल्थसिस्टम देख रहे हैं। अब सरकार कुछ करेगी नहीं अब सीधे ही को फॉलो करें मतलब जो व्यक्ति खुद इस बीमारी से लड़े वही जिएगा अर्थात जो खुद को आइसोलेट कर या जिसके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी उसके शरीर में इसरो के एंटीबॉडी खुद बन जाएंगे और वहीं जीवित रहेंगे मतलब एकदम डार्विन के सर्वाइवल ऑफ फिटेस्ट जिसे हमने जीव विज्ञान में उत्तरजीविता का सिद्धांत के रूप में पढ़ा है।
इसे ब्रिटेन फॉलो कर रहा है तो वहीं इटली में जहां मौत का आंकड़ा चीन को भी पीछे छोड़ रहा है वहां तो लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर बुजुर्गों को हटाकर युवाओं को वरीयता दी जा रही है। यह दुनिया के सबसे विकसित कहलाने वाले देशों का असली चरित्र है और वही हमारे यहां सारी सुविधाएं देने के बावजूद लोग आइसोलेशन से भाग रहे हैं। विदेश से आने पर प्रशासन को सूचित नहीं कर रहे हैं। लक्षण होने पर चेक करवाने से डर रहे हैं जबकि विदेशी मीडिया तो जलन के मारे पूरे पेज भर भर कर लेख लिख रही है कि भारत में इतने कम लोग क्यों मर रहे हैं।
अरे विदेशी मीडिया वालों जरा यह भी तो देखो कि हमारे यहां पर एयरपोर्ट पर थर्मल स्कैनिंग और आइसोलेशन की प्रक्रिया कब से शुरू हो गई हमारे प्रधानमंत्री जो जनता से ने का कोई मौका नहीं छोड़ते विदेश के सबसे बड़े त्योहारों में से एक होली मिलन को रद्द कर देते हैं यह हमारी कोरोना से लड़ने की प्रतिबद्धता ही तो है जो आज हमें सुरक्षित बनाए हुए हैं पर हमें अभी पूरी जंग जीतनी है जिसके लिए सामाजिक दूरी जरूरी है इस कारण अब हम सब का यही नारा होना चाहिए कोरोना को देंगे मात जनता कर्फ्यू के साथ।
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