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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष: जयपुर के इस मंदिर में होती है श्रीकृष्ण के चरणों की पूजा

Thu, 07 Sep 2023 01:41 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Thu, 07 Sep 2023 01:41 PM IST
सार

चरण मंदिर जयपुर शहर में अरावली की पहाड़ियों में स्थित है। यह प्रसिद्ध जयगढ़ किले और नाहरगढ़ किले के करीब बना हुआ है। कहा जाता है कि जयपुर के राजा मान सिंह प्रथम को एक दिन भगवान श्रीकृष्ण ने स्वप्न में आकर अंबिका वन, जिसे इन दिनों आमेर की पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है, में अपने चरण चिन्ह का स्थान बताया।

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Janmashtami 2023: The History Of Charan Mandir, When Lord Krishna came in the king's dream
चरण मंदिर जयपुर शहर में अरावली की पहाड़ियों में स्थित है। यह प्रसिद्ध जयगढ़ किले और नाहरगढ़ किले के करीब बना हुआ है। - फोटो : विनोद पाठक

विस्तार

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी देश-दुनिया में उत्साहपूर्वक मनाई जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित चरण मंदिर में भी विशेष आयोजन हो रहे हैं। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की नहीं, बल्कि उनके चरणों की पूजा होती है। चरण मंदिर के लिए प्रसिद्ध है कि द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्णा स्वयं यहां आए थे और उनके दाहिने चरण का चिन्ह पत्थर पर अंकित हो गया। मंदिर में गायों के पांच खुरों के चिन्ह के भी दर्शन होते हैं।
 

 

चरण मंदिर जयपुर शहर में अरावली की पहाड़ियों में स्थित है। यह प्रसिद्ध जयगढ़ किले और नाहरगढ़ किले के करीब बना हुआ है। कहा जाता है कि जयपुर के राजा मान सिंह प्रथम को एक दिन भगवान श्रीकृष्ण ने स्वप्न में आकर अंबिका वन, जिसे इन दिनों आमेर की पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है, में अपने चरण चिन्ह का स्थान बताया।

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चरण पूजन की कथा और महत्व  

भगवान ने राजा को मंदिर बनाने का आदेश दिया। सुबह राजा मान सिंह जब उठे तो अपने सेवकों के साथ अंबिका वन पहुंचे। स्वप्न में बताए स्थान को खोजा। कहा जाता है कि राजपुरोहितों ने राजा को बताया कि यह चरण चिन्ह द्वापरयुग के हैं। श्रीमद्भागवत कथा के दसवें स्कंध के चौथे अध्याय में वर्णित विद्याधर (सुदर्शन) के उद्धार से चरण चिन्ह का जुड़ाव बताया गया है। 

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ऐसी मान्यता है कि द्वापरयुग में पांडवों ने यहीं एक साल का अज्ञातवास बिताया था। इसी कालखंड में भगवान श्रीकृष्ण अंबिका वन आए थे। मंदिर में लगे बोर्ड पर लिखा है कि एक बार नंदबाबा, श्रीकृष्णा और ग्वालों ने अंबिका वन की यात्रा की थी। उन दिनों अंबिका वन में बड़ा अजगर रहता था। उसने नंदबाबा का पैर पकड़ लिया था। नंदबाबा ने अपनी सहायता के लिए श्रीकृष्ण को पुकारा। भगवान श्रीकृष्ण ने अजगर को अपने दाहिने पैर से स्पर्श किया तो अजगर देह छोड़कर सुंदर रूपवान पुरुष बन गया।

Janmashtami 2023: The History Of Charan Mandir, When Lord Krishna came in the king's dream
राजा मान सिंह कच्छवाहा राजपूत राजा थे। वो भगवान श्रीकृष्ण के बड़े अनुयायी थे। - फोटो : विनोद पाठक

उस पुरुष से दिव्य प्रकाश निकल रहा था। वह हाथ जोड़कर भगवान श्रीकृष्ण के सामने खड़ा हो गया और उसने बताया कि मैं इंद्र पुत्र विद्याधर हूं। मेरा नाम सुदर्शन है। एक दिन अपने विमान से आकाश विहार कर रहा था। तभी मैंने अंगिरा गोत्र के कुरूप ऋषियों को देखा। अपने सौंदर्य के घमंड में उनकी हंसी उड़ाई। मेरे इस कृत्य से क्रोधित होकर ऋषियों ने मुझे अजगर योनि में जाने का श्राप दे दिया। 

राजा मान सिंह प्रथम ने भगवान श्रीकृष्ण के दाहिने पैर के चरण चिन्ह मिलने के बाद यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वो प्रतिदिन मंदिर में दर्शन के लिए आया करते थे। मंदिर में सेवा भोग भी राजा की ओर से लगाया जाता था। आज भी मंदिर में भक्तों का तांता लगता है। विशेष रूप से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में भक्त यहां आते हैं।

राजा मान सिंह और श्री कृष्ण 

राजा मान सिंह कच्छवाहा राजपूत राजा थे। वो भगवान श्रीकृष्ण के बड़े अनुयायी थे। उन्होंने वृंदावन में सात मंजिला कृष्णजी (गोविंददेव जी) मंदिर भी बनवाया था। हिंदू राजा मान सिंह ने गंगा पर बनारस के घाट, पटना के घाट, हरिद्वार के घाटों का निर्माण कराया। उड़ीसा में जगन्नाथ पुरी का मंदिर तोड़कर पठान सुल्तान मस्जिद बनाना चाहते थे। इसकी सूचना जब राजा मान सिंह को मिली तो उन्होंने अपनी सेना का दल उड़ीसा भेजा था, लेकिन विशाल सेवा के कारण सभी वीरगति को प्राप्त हुए।

उसके बाद राजा मान सिंह स्वयं उड़ीसा गए और दो पठान भाइयों का सिर काट दिया। उनके सहयोगी हिंदू राजाओं को कुचल कर रख दिया और भगवान जगन्नाथ के मंदिर की रक्षा की। जितने मंदिर मध्यकाल से पूर्व मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़े थे, सभी का पुनर्निर्माण राजा मान सिंह ने कराया था।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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