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कश्मीर और इतिहासः जब लॉर्ड माउंटबेटन की सलाह पर चल रहे थे नेहरू

Jay singh Rawatजयसिंह रावत Updated Wed, 07 Aug 2019 01:37 PM IST
जम्मू-कश्मीर से अलग हुआ लद्दाख
जम्मू-कश्मीर से अलग हुआ लद्दाख - फोटो : अमर उजाला
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भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और अखण्ड भारत की एकता के प्रतीक सरकार बल्लभभाई पटेल जिस जम्मू और कश्मीर रियासत का भारत संघ में पूर्ण विलय का काम अधूरा छोड़ गए थे उसे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनके गृहमंत्री अमित शाह कर गए।
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मोदी सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 की विभिन्न धाराओं के निरसन तथा संविधान की धारा 3 के तहत जम्मू-कश्मीर के विखण्डन की प्रकृया शुरू किए जाने के साथ ही अब तक विशेषाधिकार प्राप्त रहे जम्मू और कश्मीर के भारत संघ में पूर्ण विलय की प्रकृया शुरू हो गई है।

तो क्या पहले नहीं हुआ था विलय?  
भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत इस राज्य का पूर्ण विलय हुआ ही नहीं था और इसकी सम्प्रभुता केवल महाराजा हरिसिंह और गवर्नर जनरल माउण्टबेटन के बीच हुए ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ के तहत ही भारत संघ में निहित थी। जब रियासत के ही टुकड़े हो जाएगे तो उसके अपने अलग संविधान का भी कोई अस्तित्व नहीं रह जायेगा।

दरअसल, शायद कभी किसी ने सोचा भी न होगा कि कहां तो जम्मू-कश्मीर के लोगों को मौजूदा स्वायत्तता और विशेषाधिकार कम पड़ रहे थे और वे 1965 से पहले की स्थिति की मांग कर रहे थे और कहां उनका पूर्ण राज्य का दर्जा भी छिन गया। उनका पूर्ण राज्य का दर्जा ही नहीं छिना बल्कि उन्हे पार्ट-सी का उपराज्य बनाने के साथ ही सीधे केन्द्र सरकार के नियंत्रण में रख दिया।

कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदारी होती है और यही सत्ता की प्रतीक भी होती है। लेकिन दिल्ली की तरह जम्मू-कश्मीर के लोगों के हाथो से यह शक्ति भी छिन गई है। यही नहीं अब दिल्ली की ही तरह रियासत के लोगों द्वारा चुनी गई सरकार पर दिल्ली से नियुक्त उप राज्यपाल की ही बादशाहत चलेगी।

 
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