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जग्गू भाई: ग़ज़ल की ख़ुमारी में भीगी जवानी और वो परीक्षा का टोटका

Viplove Gupteविप्लव गुप्ते Updated Mon, 12 Aug 2019 04:56 PM IST
हम जगजीत सिंह को गजलजीत सिंह कहकर याद करते रहे
हम जगजीत सिंह को गजलजीत सिंह कहकर याद करते रहे - फोटो : फाइल फोटो
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हर शुभ काम से पहले हम कोई न कोई टोटका तो ज़रूर करते हैं। परीक्षा से पहले या घर से बाहर निकलने से पहले दही शक्कर। मम्मी का धूपबत्ती की भभूति लगाना या मंदिर के सिन्दूर/ चन्दन से टीका लगा के घर से बाहर भेजना। घर में कोई भी नया काम शुरू करने से पहले पूजा।
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शादी हो गई तो पहले सत्यनारायण की पूजा फिर कोई काम दूजा। लोगों की बुरी नज़र न लग जाए इसलिए कोई गंडा- तावीज़ बंधवाना। हर परीक्षा से पहले एक तय शुदा मंदिर पर मत्था टेकना। हमेशा राइट पैर का मोज़ा और जूता पहले पहनना। इंटरव्यू के लिए एक लकी रूमाल या शर्ट। एग्जाम में लकी पेन से शुरुआत करना। लकी कंपास बॉक्स लेकर जाना और भी बहुत कुछ।  

कॉलेज आने तक मुझे टोटके नहीं आते थे। छोटे मोटे यानी लकी पेन या पेंसिल, या फिर लकी शर्ट तक ही सीमित रहे। पिताजी ने कभी किसी और के सहारे टिकने को मना किया था। जो किया है वो भुगतोगे. जो होगा देखा जाएगा। कंचे, क्रिकेट, कॉमिक्स के आगे कभी कुछ सूझा भी नहीं, जो समय बचा वो पढ़ाई में लगा दिया और कभी टोटका करने का मौका ही नहीं पड़ा।  

ये वो समय था जब हम लोग जग्गू भाई को डिस्कवर कर रहे थे। जग्गू भाई याने जगजीत सिंह या जैसे उनके फैन कहते हैं - ग़ज़लजीत सिंह। मेरे फुफेरे भाई आशीष रोहतगी के घर सोनीपत में समवन समवेयर नाम का एल्बम बज रहा था। जगजीत सिंह ग़ज़ल गाता है। ग़ज़ल कठिन होती है। भारी उर्दू। तबला पेटी और सारंगी पर म्यूजिक थोड़ी बनता है।

भला हो मेरे भाई का कि उसने ज़बरदस्ती वो एल्बम सुना सुनाकर मुझे जगजीत स्कूल ऑफ़ ग़ज़ल्स एंड सिंगिंग से परिचय कराया। ये तो वॉइलिन है, गिटार है। संतूर, कीबोर्ड। अरे ये क्या कर रहा है।  जगजीत की ग़ज़ल सुनना और साथ में गा पाना तो बड़ा आसान है। बिना बात की मुकरी नहीं है।  इतना डिफिकल्ट नहीं है। बेटे विवेक की असामयिक मृत्यु की पीड़ा और आदमी आदमी को क्या देगा...मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ है, क्या मेरे हक़ में फैसला देगा।
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