फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   iran america tension impact on india

अमेरिका-ईरान विवादः खाड़ी की आग का असर इस रूप में दिखेगा भारत पर, कितनी अलर्ट है मोदी सरकार?

Mon, 06 Jan 2020 05:27 PM IST
Sanjiv Pandey संजीव पांडेय
Updated Mon, 06 Jan 2020 05:27 PM IST
विज्ञापन
iran america tension impact on india
भारत, अमेरिका, ईरान के विवाद पर नजर बनाए रखे हुए है। - फोटो : अमर उजाला

बगदाद की घटना का असर लंबे समय तक पड़ सकता है। पश्चिम एशिया से लेकर दक्षिण एशिया तक इसका प्रभाव पड़ सकता है। शीर्ष ईऱानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की ईऱाक के बगदाद एयरपोर्ट पर अमेरिकी हमले में मौत के बाद भारत भी परेशान है। हमले के तत्कालिक कारण कई हैं। लेकिन इसका भारत पर प्रभाव पड़ना लाजिमी है।

विज्ञापन


दरअसल, भारत सिर्फ प्रमुख तेल आयातक देश ही नहीं है, बल्कि भारत खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर डॉलर की आय भी करता है। लगभग चालीस लाख भारतीय खाड़ी में रोजगार पाए हुए हैं। इनसे सलाना चालीस अरब डॉलर की आय भारत को होती है, जो सीधे भारतीय बैंकों में डॉलर के रूप में आते हैं। वैसे में डोनाल्ड ट्रंप की यह खतरनाक चाल उनके घरेलू राजनीति में बेशक लाभ दे, पर भारत के आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। हमले के बाद ही अंतराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 3 से 4 डॉलर का इजाफा देखा गया। यह भारत के भुगतान संतुलन को खराब करेगा, चालू खाता घाटा को बढ़ाएगा।

विज्ञापन

तेल की कीमतें बढ़ेगी, आपूर्ति भी प्रभावित होगी
अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता रहा तो तेल की कीमतें भी बढ़ेगी और आपूर्ति भी प्रभावित होगी। ईऱान के प्रभाव वाले हरमुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल निकलता है। ईरान इसे कभी भी प्रभावित कर सकता है। इस रास्ते से सऊदी अरब और इराक का तेल दुनिया के लिए जाता है। भारत का तेल भी इसी रास्ते से आता है। भारत सबसे ज्यादा तेल इराक और दूसरे नंबर सऊदी अरब से तेल आयात करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन


भारत प्रतिदिन लगभग 40 लाख बैरल तेल का आयात करता है। वर्ष 2018-19 में भारत का घरेलू तेल उत्पादन 34 मिलियन टन रहा। वहीं 220 मिलियन टन तेल का आयात किया। भारत प्रतिदिन लगभग 30 लाख बैरल तेल खाड़ी के देशों से आयात करता है, इसलिए इस इलाके में तनाव बढ़ना तेल आपूर्ति को प्रभावित करेगा। तेल की कीमत अगर अंतराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी तो घरेलू मोर्चे पर तेल की कीमतें बढ़ेगी। इससे महंगाई बढ़ेगी।

भारत के पास तेल आयात का वैकल्पिक रूट चीन की तरह नहीं है। चीन बहुत पहले भविष्य में आने वाले उर्जा संकट को समझ चुका था, इसलिए चीन ने तेल के बजाए गैस पर निर्भरता बढ़ाने का फैसला लिया था। रूस से चीन तक गैस पाइप लाइन भी बन गया, गैस आपूर्ति का काम भी शुरू हो गया। लेकिन अभी तक भारत के पड़ोसी मुल्कों से खराब संबंध के कारण न कोई गैस पाइप लाइन बना है न तेल पाइप लाइन।

iran america tension impact on india
अमेरिका ईरान विवाद से दुनिया में तनाव बढ़ा है। - फोटो : social media

तेल की कीमत बढ़ी तो भारतीय इकनॉमी होगी प्रभावित
आज भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करता है। तनाव बढ़ने के कारण तेल की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ेगा। अगर तेल की कीमतें बढ़ी तो इसका सीधा असर भारत की इकनॉमी पर पड़ेगा। भारतीय इकनॉमी इस समय खस्ता हाल है। अगर तेल की कीमत बढ़ी तो पहले से ही कर संग्रहण में परेशानी का सामना कर रही सरकार को घऱेलू मोर्चे पर और परेशानी बढ़ जाएगी।

तेल महंगा और डॉलर में ज्यादा पैसे का भुगतान करना पड़ेगा। इससे चालू बचत खाते का घाटा बढ़ेगा। भारत ने वर्ष 2018-19 मे तेल आयात पर 111 अरब डॉलर खर्च किया था। इस साल मई जून में उम्मीद थी कि तेल की कीमतें नहीं बढ़ने के कारण भारत लगभग 233 मिलियन टन तेल का आयात करेगा और इसपर 113 अरब डॉलर का खर्च आएगा। लेकिन अगर तेल की कीमतें बढ़ी तो तेल आयात खर्च 125 अरब डॉलर पार कर सकता है।

अफगानिस्तान में ईऱान की घुसपैठ और भारत  
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अफगानिस्तान मे दिखेगा। अफगानिस्तान में भारतीय हित है और अफगानिस्तान में भारत के पहुंचने का रास्ता ईरान का चाबहार बंदरगाह है, इसलिए भारत पर सीधा असर अफगानिस्तान में होने वाले परिवर्तन पर पड़ेगा। ईरान अगर अफगानिस्तान में अमेरिकी हितों पर चोट करेगा तो इसका सीधा असर तालिबान पर पड़ेगा। तालिबान मजबूत होगा और भारत के हितों के खिलाफ तालिबान हमेशा रहा है। इससे नुकसान भारत को होगा। हालांकि ईऱान अगर अफगानिस्तान में अमेरिकी हितों पर चोट करेगा तो कारण अफगानिस्तान में शांति को लेकर चल रही शांति वार्ता कमजोर पड़ सकती है। अफगानिस्तान मे मौजूद अमेरिकी  सैन्य बेसों पर भी हमला हो सकता है। भारतीय हितों पर भी तालिबान चोट कर सकता है। इसके कारण मौजूद है।

iran america tension impact on india
भारत को अपनी अर्थव्यवस्था पर नजर बनाए रखनी होगी। - फोटो : SELF

कासिम सुलेमानी के नजदीक रहे है तालिबान कमांडर
ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की तालिबान कमांडरों खासे नजदीक रहे हैं। 2006 के बाद लगातार तालिबान कमांडरों की नजदीकी सुलेमानी से बढ़ी। 2014 के बाद यह नजदीकी और मजबूत हुई। इसका एक कारण इस्लामिक स्टेट था। इस्लामिक स्टेट के बढ़ते प्रभाव से रूस भी परेशान था और ईरान भी परेशान था, क्योंकि इस्लामिक स्टेट कटटर सुन्नी संगठन था। इससे ईरान को खतरा था। वहीं रूसी प्रभाव वाले मध्य एशिया के देशों में भी इस्लामिक स्टेट घुसपैठ की कोशिश कर रहा था। इस्लामिक स्टेट के बढ़ते प्रभाव से इराक की शिया आबादी और और सीरिया में बशर अल असद की सरकार को भी खतरा था।

इधर, इस्लामिक स्टेट खालिस सुन्नी स्टेट की अवधारणा लेकर अफगानिस्तान में भी घुसपैठ कर रहा था। इस्लामिक स्टेट की अफगानिस्तान में बढ़ते प्रभाव से अफगान तालिबान परेशान था। अफगान तालिबान के कई नीचले कमांडर पैसे के लोभ में इस्लामिक स्टेट से मिल गए थे। वैसे में तालिबान कमांडरों ने ईऱानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मदद ली।

ईऱान ने तालिबान कै पैसे और हथियार दोनों दिए। कासिम सुलेमानी की मौत के बाद आशंका जताई जा रही है कि ईरान के दबाव में तालिबान अमेरिका के साथ चल रहे शांति वार्ता से पीछे हट सकता है। यही नहीं अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक शिया हजारा जनजाति के लगभग बीस हजार लोगों की मिलिशिया भी कासिम सुलेमानी ने तैयार की थी। ये हजारों मिलिशिया गुट ईराक, अफगानिस्तान और सीरिया में ईरान के इशारे पर लड़ रहे थे।

दरअसल ईऱान अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच भारत के रूख को देख रहा है। अगर भारतीय रुख अमेरिका के संतुलित रहा तो ईऱान भारत को अफगानिस्तान में नुकसान नहीं करेगा। अगर संतुलित नहीं रहा तो ईरान के इशारे पर अफगानिस्तान में भारतीय हितों पर चोट हो सकती है। वैसे भी अगर ज्यादा तनाव बढ़ा तो भारत को ईऱान के चाबहार बंदरगाह पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

बासमती चावल उद्योग भी प्रभावित होगा
भारत बड़े पैमाने पर बासमती चावल खाड़ी देशों को निर्यात करता है। 2018-19 में अकेले ईरान ने भारत से लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की बासमती की खरीद की। भारत ने 2018-19 में लगभग 33 हजार करोड़ रुपये की बामसती निर्यात की थी। अमेरिकी हमले के बाद भारतीय बासमती निर्यातक परेशान है। क्योंकि उनका ईरान में पैसे का भुगतान रुका हुआ है। ईरान पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के कारण भुगतान की समस्या पहले से ही भारतीय बासमती निर्यातक झेल रहे हैं। लेकिन इस हमले के बाद हालात और खराब हो सकते हैं, इसलिए अमेरिकी हमले में कासिम सुलेमानी की मौत से भारतीय  बासमती निर्यातकों में खासी चिंता है।

भारतीय निर्यातकों के लगभग एक हजार करोड़ रुपये इस साल जून तक ईऱान में बासमती चावल के भुगतान में मिलने वाले फंसे हुए थे। इस हमले के बाद परेशानी और बढ़ेगी। क्योंकि भारत और ईऱान के बीच पैसों का भुगतान अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के कारण विशेष मैकेनिज्म के तहत होता है। भारतीय चीनी और सोयाबीन उधोग को भी तनाव से नुकसान होगा। क्योंकि ईरान इस समय भारत से इन दोनों वस्तुओं का बड़ा खरीदार बन रहा है।

खाड़ी देशों में काम करने वाले 75 लाख भारतीयों पर सीधा असर होगा
लगभग 75 लाख भारतीय अरब देशों में रोजगार प्राप्त है। ये अरबो डॉलर भारत में कमा कर भेजते हैं। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी मदद मिलती है। इस समय भारत को सलाना 80 अऱब डॉलर की आय विदेशी में काम करने वाले भारतीयों के कारण हो रही है। इसमें से लगभग 40 अरब डॉलर भारत को खाड़ी के देशों से आता है। भारत को सबसे ज्यादा रकम संयुक्त अरब अमीरात से मिल रहा है। यहां लगभग 35 लाख भारतीय कामकाजी है। जबकि सऊदी अरब में 30 लाख भारतीय कामकाजी है। कुवैत में भी लगभग 11 लाख भारतीय कामकाजी हैं।

अगर ईऱान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा तो इसका सीधा असर सऊदी अरब, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात औऱ ओमान पर पड़ेगा। इन मुल्कों की अर्थव्यवस्था ईऱान के कारण पहले भी प्रभावित होती रही है। सऊदी अरब पहले ही ईऱान के हमलों से परेशान है। अगर इन मुल्कों की तेल इकनॉमी प्रभावित हुई तो भारतीय कामगारों की छंटनी शुरू हो जाएगी। भारतीयों को अपने मुल्क में वापसी करनी पड़ सकती है। इसका सीधा नुकसान भारत को होगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed