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विश्व महिला दिवस विशेष: घटनाएं गवाह हैं, महफूज नहीं 'आधी आबादी'

Mon, 08 Mar 2021 04:08 AM IST
Narednra Bharati नरेंद्र भारती
Updated Mon, 08 Mar 2021 04:08 AM IST
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international women's day 2021 rape cases in india
International Womens Day 2021 - फोटो : istock

बेशक 8 मार्च 2021 को विश्व महिला दिवस मनाया जा रहा है। भारत में जब तक महिलाएं सुरक्षित नहीं होगी तब तक इन दिवसों की सार्थकता नहीं होगी। प्रतिदिन हैवानियत  की हदें लांघी जा रही हैं। महिलाओं की अस्मिता का जनाजा निकाला जा रहा है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक मंहिलाएं असुरक्षित हैं। आज हर जगह दुशासन महिलाओं की इज्जत नीलाम कर रहे हैं। विश्व गुरु कहलाने वाले भारत में महिलाओं पर जुल्मों की सूची लंबी होती जा रही है।

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जब देश की राष्ट्रीय राजधानी ही सुरक्षित नहीं है तो महानगरों व छोटे कस्बों का क्या हाल होगा इससे अदांजा लगाया जा सकता है। 2020 में लाॅकडाउन के समय महिलाएं सुरक्षित थीं मगर ज्यों ही लाॅकडाउन खुल गया हैवानों ने हैवानियत शुरू कर दी है। आज महिला दिवस पर ऐसे आयोजन केवल मात्र औपचारिकता भर रह गए हैं क्योंकि हर वर्ष एक संकल्प लिया जाता है कि महिलाओं को अत्याचारों से मुक्ति दिलाई जाएगी। अत्याचारों का खात्मा किया जाएगा सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, मगर धरातल की सच्चाईयां बेहद ही खौफनाक तस्वीरें प्रस्तुत कर रही हैं।
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आधी दुनिया पर बढ़ते अत्याचार देश के लिए अशुभ संकेत हैं। आज महिलाएं हर क्षेत्र में सफलता की बुलंदियां छू रही हैं। चांद तक अपनी काबलियत का परचम लहरा रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए सैंकड़ों कड़े कानून बनाए गए हैं, मगर यह कानून सरकारी फाईलों की धूल चाट रहे हैं। अगर सही तरीके से लागू किए होते तो इन मामलों में इजाफा नहीं होता। आज महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, चाहे घर हो दफतर हो, बस, सड़क, गली या चौराहा हो महिलाएं हर जगह असुरक्षित ही महसूस कर रही हैं।
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वर्ष 2021 में भी हालात सुधर नहीं रहे हैं। देश में बेटियां हर जगह असुरक्षित महसूस कर रही हैं। बेटियों की सुरक्षा के दावे कहां हैं। यह एक यक्ष प्रशन है यह सुलगते सवाल हैं कि बेटियां कब सुरक्षित होंगी। साल के 365 दिन महिलाओं पर अत्याचार होते रहते हैं। आज महिलाओं पर अनगिनत अत्याचार हो रहे हैं मगर सरकारों की कुंभकरणी नींद नहीं टूट रही है। आज कोई भी विश्वास के योग्य नहीं रहा है किस पर विशवास करें, अपने ही हैवान बन रहे हैं।

आज बाबुल की गलियां ही नरक बन गई हैं। अपने रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। बहु-बेटियां घर में ही असुरक्षित हैं समय- समय पर ऐसे घिनौने कर्म होंतें है कि कायनात कांप उठती है कि आदमी इतने नीच काम क्यों कर रहा है। महिलाएं कहीं भी महफूज नहीं हैं। महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। देश में प्रतिदिन घटित हो रही वारदातों से महिलाओं की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगता जा रहा है कि महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं।

इन वारदातों से हर भारतीय उद्वेलित है। सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इतंजाम करने होगें तभी इन पर रोक लग सकती है। जघन्य व दिल दहला देने वाली दुष्कर्म की घटनाओं से जनमानस खौफजदा है। आखिर कब तक बेटियां दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी। ऐसी वारदातें बहुत ही चिंतनीय हैं। बेखौफ दरिदें अराजकता फैला रहे हैं। दरिदों की दरिंदगी की वारदातें कब रुकेंगी, अपराध की तारीख बदल जाती है, मगर तस्वीर नहीं बदलती।

आंकड़ों के अनुसार 12 सितंबर 2018 को हरियाणा के रेवाड़ी में एक 19 साल की मेधावी छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म कर दिया था। 27 जून 2018 को मध्यप्रदेश के मंदसौर में एक सात साल की नाबालिग स्कूली बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य घटना से हर भारतीय उद्वेलित हुआ था। यह बच्ची तीसरी में पढ़ती थी। मासूम से हुई दरिदगी व हैवानियत की यह घटना बहुत ही दिल दहलाने वाली थी। दरिदों ने जिस बर्बरता व हैवानियित से घटना को अंजाम दिया था उससे रौगटे खडे़ हो जाते हैं।

वर्ष 2021 के जनवरी माह से देश के हर राज्य में इन मामलों में बेतहासा वृद्धि होती जा रही है

international women's day 2021 rape cases in india
दरिदों ने दरिदंगी की हदे पार कर दी थी - फोटो : सोशल मीडिया

दरिदों ने दरिदंगी की हदे पार कर दी थी। 16 दिसंबर 2012 सामूहिक दुष्कर्म करने वाले दुष्कर्म की वारदात से हर भारतीय उद्वेलित हुआ था। यह रौंगटे खड़े कर देने वाली घटना बहुत ही दुखद थी। हर रोज अस्मत लूटी जा रही है। दरिंदों द्वारा हर राज्य में दरिदगी का सामाज्य बना रहे है। दरिदों की अराजकता बढ़ती ही जा रही है। जंगलराज स्थितियां बन रही हैं। कानून को धता बताकर दरिंदें दरिंदगी का तांडव कर रहे हैं।

दरिंदों को सरेआम मौत के घाट उतारना हागा ताकि आने वाले समय में दरिंदें कई बार सोचेगें की उनकी करतूतो का क्या अंजाम होगा। अब समय आ गया है कि दरिंदों को फांसी की सजा से ही इन मामलों पर विराम लग सकता है। वर्ष 2021 के जनवरी माह से देश के हर राज्य में इन मामलों में बेतहासा वृद्धि होती जा रही है। साल के दो माह में यह दुष्कर्म रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकार को इन मामलों पर त्वरित कारवाई करनी होगी।

हर रोज दरिंदें दरिंदगी का तमाशा कर रहे हैं। देश में दुष्कर्म के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इससे पहले कठुआ में भी एक बच्ची के साथ दरिंदगी का मामला प्रकाश में आया था। प्रतिदिन इन अपराधों में इजाफा होता जा रहा है। देश में दरिंदगी की वारदातेें कब रुकेगीं। गत वर्ष हिमाचल में भी गुडिया कांड हुआ था। इससे पहले देश की राजधानी दिल्ली में दिल दहला देने वाला कृत्य हुआ था जब द्वारका नार्थ इलाके में देर रात टैक्सी से घर लौट रही एक महिला से उबर जैसे रेप का मामला घटित हो गया था। यह बहुत ही घिनौना कृत्य है कि ऐसे प्रकरण थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

देश में लड़कियां कितनी महफूज है इन घटनाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है। 26 मार्च 2017 को  उतर प्रदेश के लखीमपुरीमें दो नाबालिग बहनों के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। ऐसी वारदातें खौफनाक हैं। रेप व हत्या की ऐसी घटनाएं दिल दहला देने वाली हैं। 26 मार्च को ही नई दिल्ली में एक युवक ने एक बच्ची को टाॅफी दिलाने के बहाने दुष्कर्म किया। देश में हर रोज अबोध बच्चियों से लेकर अधेड़ उम्र की महिलाओं से दुष्कर्म कर रहे हैं।

फांसी की सजा से ही इन मामलो पर विराम लग सकता है। 2018 में भी अत्याचारों का सिलसिला बेखौफ चलता रहा दरिदों ने अपनी दरिदगी का नंगा नाच जारी रखा। हजारों महिलाएं व नाबालिग बच्चियां दुष्कर्मो का शिकार हुई। वर्ष 2021 के प्रथम माह जनवरी से ही महिलाओं पर अत्याचारोें की शुरुआत हो चुंकी है। जनवरी से लेकर मार्च माह तक में देश में हजारों घटनाएं घटित हो चुकी हैं। प्रतिदिन ऐसे मामले हो रहे हैं और निरंतर इन मामलों में बेतहासा वृद्वि हो रही है।

छेड़छाड के अलावा तेजाब व दुष्कर्म की घटनाएं भी बदस्तूर जारी हैं। वर्ष 2019 में एक खौफनाक व दरिंदगी की हदें पार करने वाला घटनाक्रम पंजाब के मोगा में हुआ था जब बदमाशों ने चलती बस में लडकी से छेड़छाड़ की और विरोध करने पर बस से फैंक दिया जिस कारण उस लड़की की मौत हो गई थी। गत वर्ष उतर प्रदेश का बंदायू एक बार फिर शर्मसार हुआ था जहां एक बार फिर दो नाबालिग चचेरी बहनों से गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया था पांच आरोपियों ने शौच को गई नाबालिगों को अगवा करके उनके साथ बदूंक की नोक पर दुष्कर्म किया था।

देश में आज भ्रूण हत्याएं हो रही हैं...

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कानून के रखवालों को भी समाज में घटित इन हादसों पर गहराई से चितंन करना चाहिए - फोटो : फाइल फोटो

आज बाल-विवाह हो रहे हैं नाबालिग लड़कियों की शादियां अधेड़ो से की जा रही है ऐसे लोगों के विरुद्व समाज को कारवाई करनी चाहिए। 16 दिसंबर 2012 को जो हादसा दिल्ली में निर्भया के साथ हुआ था उसके बाद देश में महिलाओं से होने वाले दुष्कर्मों की बाढ़ सी आ गई कि हर दिन राजधानी से लेकर शहर व गांवों में सामूहिक दुष्कर्म थमनें का नाम ही नहीं ले रहे हैं। निर्भया के दरिंदों को तो उनके पाप की सजा फांसी के रुप में मिल गई है।

देश में आज भ्रूण हत्याएं हो रही हैं, नवजात शिशु झाड़ियों व कूड़ेदानों व मंदिरों में मिल रहे हैं जिनमें ज्यादातर शिशु लड़कियां ही होती हैं। आज लड़कियों से इतनी नफरत क्यों की जा रही है। आदमी यह कैसे भूल रहा है कि जिसने उसे जन्म दिया वह भी एक लड़की ही थी। देश में ऐसे मामले प्रतिदिन घटित हो रहे हैं। नवजात व अबोध बच्चियो से दुष्कर्म हो रहे हैं। हिमाचल में हुए गुड़िया कांड ने भी देवभूमि को हिला कर रख दिया था।

दिल्ली में गुड़िया के साथ ऐसा ही एक दरिंदगी हुई थी जब एक किराएदार ने उसके साथ रूह कंपा देने वाला घिनौना काम किया था। दरिंदें हर जगह दरिंदगी की शरणस्थली बना रहे। कुछ बीमार मानसिकता के लोगों ने भारत की छवि को दागदार किया है जनमानस को अब संकल्प लेना होगा तथा एकजुट होकर ऐसे लोगों का खात्मा करना होगा जो देश के लिए कंलक हैं।

फांसी के जितने भी मामले लंबित हैं त्वरित कारवाई करके दरिदों का सर्वनाश करना चाहिए। ताकि आने वाले समय में ऐसे अमानवीय कृत्यो पर लगाम लग सके। यदि अब भी कानूनों में सख्ती न बरती तो ऐसे दरिदें फिर से इन घिनौनी वारदातों को अंजाम देते रहेगें। इसलिए अब ऐसे लोगों को समाज से बहिष्कृत करना चाहिए। केंद्र सरकार को चाहिए कि देश के सार्वजनिक स्थलों पर हर समय सुरक्षा व्यवस्था कायम की जाए।

सादी वर्दी में महिला पुलिस तैनात करनी चाहिए। सरकार को बिना समय गंवाए इन दरिदों का खात्मा करना चाहिए। ऐसे दरिदें देश के लिए घातक हैऐसे दरिदें न जाने कैसे वातावरण में रहते होंगे। ऐसे लोगों को समाज की कोई  फिक्र नहीं होती कि उनके कृत्यों से पूरा समाज द्रवित होता है। समाज में ऐसे लोग बहुत ही घातक सिद्व हो रहे हैं। ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे।

ऐसे दुष्कर्म सामाजिक मूल्यों का पतन दर्शातें है कि समाज में विकृत मानसिकता के लोगों का बोलबाला होता जा रहा है। इन मामलों से इन्सानियत तार-तार हो रही है। समाज को ऐसे अपराधिक प्रवृति के लोगों की पहचान करनी होगी। यदि अब भी समाज के लोगों ने इन दरिंदों को सबक नहीं सिखाया तो फिर से कोई और लड़कियां व महिलाएं दरिदों की दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी। अब समाज को जागना होगा, दरिदों का खात्मा करना होगा।

कानून के रखवालों को भी समाज में घटित इन हादसों पर गहराई से चितंन करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे प्रकरणों पर विराम लग सके। ऐसे लोगो को समाज से बहिष्कृत करना चाहिए। अगर यह प्रवृति बढ़ गई तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। पुलिस को भी अपने कर्तव्य का निर्वाह करना होगा ताकि पुलिस  की छवि बरकरार रहे और समाज में ऐसे हादसे रुक सके।

केंद्र सरकार को भी इन हादसों पर बिना समय गंवाए इन दुष्कर्मो को रोकने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए ताकि देश में ऐसी वारदातों की पुनरावृति न हो सके । इनका नामोनिशन मिटाना होगा। तभी बहु-बेटियों बेखौफ होकर घूम सकती है हैं। हालातों को देखते हुए सरकार को प्राथमिक स्कूलों से लेकर कालेज स्तर तक की लड़कियों को आत्म रक्षा के गुर सिखाने होगें ताकि दरिदों को सबक मिल सके।

कुछ महिलाओं ने ऐसे लोगों के खिलाफ साहस का परिचय देकर मिसाले कायम की है ऐसे लोगों को चोराहो पर सरेआम पीटना चाहिए ताकि अन्य लोगों को ऐसा दुस्साहस करने की हिम्मत न पड़े।देश के नागरिको को महिला के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने के लिए एकजुट होना होगा। दहेज हत्या व हिसां के मामलों को रोकना होगा दहेज के लालचीयों को हवालात भिजवाना होगा।

सरकारों को चाहिए की महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करने के लिए हर गांव से लेकर शहर तक जागरुकता शिविर लगाने चाहिए। महिला संगठनों को भी आवाज उठानी चाहिए तथा  महिलाओं की रक्षा करनी चाहिए। महिला दिवस पर गोष्ठीयां करना महिला कानून के हक की बात करना बुरा नहीं है। मगर इन कानुनों को व्यावहारिक रुप से लागू करना होगा तभी इन अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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