इंडो-नेपाल: रिश्तों को और मजबूत करने की दरकार
दोनों देशों से मधुर संबंध होने के बावजूद नेपाल में भारतीय रुपयों पर एक तरह से अघोषित बैन लग चुका है। यहां भंसार (नेपाल में प्रवेश के लिए वाहनों की कागजी प्रक्रिया) कार्यालय में 'नेपाली करंसी ओनली' का पोस्टर चिपका हुआ है।
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भारत हमेशा से अपने पड़ोसी देशों के प्रति उदार रहा है। नेपाल में बिना किसी स्वार्थ के भारत ने बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए उसके बावजूद हाल के दिनों में नेपाल की एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन का भारत के प्रति रवैया चौंकाने वाला है
नेपाल न सिर्फ भारत का एक पड़ोसी देश है बल्कि यह ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और भौगोलिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। नेपाल से भारत का रिश्ता बेटी-रोटी का है। दोनों देश के लोगों के बीच आज भी वैवाहिक रिश्ते होना आम बात है। नेपाल से तो बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए भारत आते ही है, भारत से भी कई लोग रोजी-रोटी की तलाश में नारायणगढ़, काठमांडू और पोखरा जैसे बड़े शहरों का रुख करते हैं।
इंडो-नेपाल बॉर्डर (रक्सौल, रामगढ़वा) के समीप घर होने और पापा के नेपाल में व्यवसाय होने के कारण मेरा बचपन से नेपाल आना-जाना लगा रहा, जिससे नेपाल और वहां के लोगों को समझने में काफी आसानी हुई। इस बार छुट्टी में काफी दिनों बाद नेपाल जाना हुआ। रक्सौल से बीरगंज (नेपाल सीमा) में प्रवेश करते ही मुझे सीमा द्वार पर दो हाथ मिलाती प्रतीकात्मक तस्वीर दिखी जिसमें एक पर भारत और दूसरे पर नेपाल का झंडा लगा था। यह प्रतीक है भारत-नेपाल की दोस्ती का। इसे देखकर लगा कि हाल के दिनों में दोनों देशों के रिश्ते और प्रगाढ़ हुए हैं। लेकिन, आगे जो देखने को मिला वह बेहद चौंकाने वाला था।
दोनों देशों से मधुर संबंध होने के बावजूद नेपाल में भारतीय रुपयों पर एक तरह से अघोषित बैन लग चुका है। यहां भंसार (नेपाल में प्रवेश के लिए वाहनों की कागजी प्रक्रिया) कार्यालय में 'नेपाली करंसी ओनली' का पोस्टर चिपका हुआ है। मजबूरी में लोग अधिक कमीशन (बट्टा) पर रुपये बदल पा रहे हैं। भारतीय रुपये का नेपाल में वर्तमान वैल्यू 1.6 (1 भारतीय रुपये=1.6 नेपाली रुपये) है। लेकिन यहां दुकानदार इसे 1.5 या 1.55 के दर से ले रहे हैं। अगर कोई 5000 से ज्यादा रुपये लेकर जाना चाहता है तो इसके लिए उसे अनुसूची 17 फॉर्म भरकर इसकी घोषणा करनी पड़ती है कि वह रुपये क्यों लेकर जाना चाहता है।
जानबूझकर परेशान करती है नेपाली पुलिस
सीमा पर तैनात नेपाली पुलिस के जवान जानबूझकर भारतीय को परेशान करते हैं। यहां कोई स्कैनर नहीं लगा है। चेकिंग के नाम पर जवान बड़े-बड़े थैले और बैग को खोलकर पूरा सामान तितर-बितर कर देते हैं। एक किलोमीटर की दूरी में ही इस तरह की चेकिंग 2-3 जगहों पर होती है। रोजमर्रा की वस्तुएं भी ले जाने पर अलग-अलग तरीकों से परेशान करते हैं।
अभी हाल में एक खबर पढ़ने को मिली कि नेपाल की सुरक्षा एजेंसी ने भारतीय टैक्सी चालकों के नेपाल से यात्रियों को लाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। झूलाघाट थाना पुलिस ने टैक्सी संचालकों को निर्धारित स्थल पर ही टैक्सी खड़ा करने का निर्देश दिया है।
रिश्तों में उतार-चढ़ाव
भारत-नेपाल संबंधों की शुरुआत मैत्रीपूर्ण तरीके से हुई थी। आजादी के बाद भी 1923 की संधि जारी रखी गई। इसी का नतीजा है कि आज भी भारतीय सेना में नेपाल के गोरखा लोगों की भर्ती होती है। यहां तक के नेपाल के संविधान निर्माण में भी भारतीय राजनीतिज्ञ श्री प्रकाश की सेवा ली गईं।
1955 में भारत ने ही नेपाल को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता दिलवाई। उसके बावजूद इस दौर में नेपाल का झुकाव चीन की ओर होने लगा। इसी का नतीजा रहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री ने 1956 में न सिर्फ चीन का दौरा किया बल्कि एक मैत्री संधि पर हस्ताक्षर भी किया। इसके बाद भारत ने दोनों देशों के बीच पनपी गलतफहमियों को दूर करने के लिए 1964 में नौ करोड़ की लागत से सगौली-ओश्वरा सड़क निर्माण किया। काठमांडू-रक्सौल सड़क निर्माण को मंजूरी दी।
1975 में सिक्किम को भारत में मिलाने और नेपाल को तेल का कोटा नहीं देने पर भी दोनों देशों के संबंधों में खटास आई। इसके बाद 1981 में नीलम संजीव रेड्डी, 1986 में राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और 1992 में विदेश मंत्री नरसिम्हा राव ने नेपाल की यात्राएं कीं। उधर से महाराज वीरेंद्र (1980, 1985) और प्रधानमंत्री सूर्यबहादुर थापा (1983) ने भारत की यात्राएं कीं।
भारत अपने पड़ोसी देशों के प्रति हमेशा उदार रहा है। इसके लिए 1996 में देवगौड़ा सरकार में गुजराल सिद्धांत के तहत कुछ नियम तय किए गए। जिसके तहत भारत अपने पड़ोसियों से बिना कोई अपेक्षा किए नेक नियती से वह सब कुछ देता है जो वह दे सकता है।
पहले ही दौरे पर मोदी ने दिया था हिट फॉर्मूला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले नेपाल दौरे पर ही दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से हिट (हाईवे, आईवे और ट्रांसवे) फार्मूला दिया था। 2020 में केपी ओली सरकार द्वारा भारत के लिपिया धुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल के नक्शे में दिखाने पर दोनों देशों में फिर से दूरियां बढ़ीं।
हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल प्रचंड चार दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे थे। यहां उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल से व्यापार पारगमन और सीमा मुद्दों चर्चा की। उन्होंने सीमा विवादों को कूटनीतिक तरीकों से सुलझाने की बात कही। इस दौरान दोनों देशों के बीच खासकर उर्जा व्यापार समझौते हुए। पीएम मोदी और प्रचंड ने रेलवे के कुपो-बिजलपुरा सेक्शन की ऑनलाइन शुरुआत की। बथनाहा से नेपाल कस्टम यार्ड तक जाने वाली मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाई।
रूपडीहा और नेपालगंज सीमा पर एकीकृत सीमा चौकी का उद्घाटन किया। गोरखपुर-बुटवल सबसेक्शन पर 400 केवीए के बिजली वितरण लाइन की शुरुआत की। मोतिहारी-अमलेखगंज तेल पाइपलाइन परियोजना का शिलान्यास किया। प्रचंड ने अपने दौरे में भारतीय निवेशकों को नेपाल में निवेश के लिए आमंत्रण दिया।
ऐसे दोस्ताना माहौल सीमा पर नेपाल की एजेंसियों और वहां के स्थानीय प्रशासन का भारतीय लोगों के प्रति रवैया न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि चिंताजनक भी है। अगर नेपाल भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना चाहता है तो उसे सीमा पर इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाते हुए भारतीयों के लिए आवागमन और व्यापार को सरल बनाना होगा।
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