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छठ पर चलने वाली स्पेशल ट्रेनों का थकता सफर: न समय पर घर पहुंच पाते हैं लोग, न मना पाते हैं त्योहार

Wed, 13 Nov 2024 08:20 AM IST
Prakash chand Joshi प्रकाश चंद जोशी
Updated Wed, 13 Nov 2024 08:20 AM IST
सार

इस बार 4 नवंबर 2024 के दिन 3 करोड से अधिक यात्रियों ने देश भर के विभिन्न रूट्स पर ट्रेनों से सफर किया और ये भारतीय रेलवे का रिकॉर्ड था, लेकिन क्या ये सभी लोग तय समय पर घर पहुंचे? क्योंकि छठ और उसके आसपास चलने वाली ज्यादातर ट्रेनें देरी से पहुंची।

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Indian Railways Special Trains: why special trains get delayed in festive seasons
स्पेशल ट्रेनें देरी से क्यों चलती हैं? - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय रेलवे रोजाना एक बड़ी संख्या में ट्रेनों की आवाजाही करता है। अगर आंकड़े पर नजर डालेंगे तो भारत देश में हर रोज लगभग 23 हजार ट्रेनें चलती हैं जिसमें से अकेले लगभग 13 हजार ट्रेनें यात्री ट्रेनें होती हैं। वहीं, जब-जब त्योहार आते हैं और वो भी खासतौर पर दिवाली और छठ तो भारतीय रेलवे रोजाना चलने वाली ट्रेनों के अलावा कई स्पेशल ट्रेन भी चलाता है, लेकिन क्या ये ट्रेनें सच में स्पेशल होती है? क्या ये लोगों को अपने गंतव्य तक समय पर छोड़ पाती हैं? ऐसे कई सवाल हैं जो खुद रेलवे को सोचने चाहिए।
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स्पेशल ट्रेनें तो बहुत पर पहुंचने या चलने का समय तय नहीं

बात अगर इस बार की करें तो भारतीय रेलवे की तरफ से इस बार दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के लिए लगभग 6556 ट्रेनें चलाई गई। इनसे यात्रियों ने सफर तो किया, लेकिन इनमें से ज्यादातर ट्रेनें अपने तय वक्त पर या तो चली ही नहीं या फिर तय समय पर गंतव्य पर पहुंची ही नहीं। भले ही भारतीय रेलवे स्पेशल ट्रेनें चलाकर यात्रियों को सहूलियत देने और सुगम आवाजाही के कितने दावे भरता रहे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है।
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इस बार 4 नवंबर 2024 के दिन 3 करोड से अधिक यात्रियों ने देश भर के विभिन्न रूट्स पर ट्रेनों से सफर किया और ये भारतीय रेलवे का रिकॉर्ड था, लेकिन क्या ये सभी लोग तय समय पर घर पहुंचे? क्योंकि छठ और उसके आसपास चलने वाली ज्यादातर ट्रेनें देरी से पहुंची। यात्रियों को स्टेशनों पर तकलीफों का सामना भी करना पड़ा और सबसे ज्यादा चिंता इस बात की रही कि क्या वो छठ मनाने घर समय पर पहुंच पाएंगे की नहीं?
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यात्रियों को तकलीफ ही तकलीफ

बिहार को जाने वाली जितनी भी स्पेशल ट्रेनें चलाई गई उनमें से कई या तो देरी से चली या तो देरी से पहुंची और कई ट्रेनें तो 12-12 घंटों से भी ज्यादा देरी से चलीं। यही नहीं, आज यानी 12 नवंबर 2024 को बिहार से आने वाली स्पेशल ट्रेन नंबर 02563 नई दिल्ली क्लोन स्पेशल भी लगभग 8 घंटे देरी से चल रही है। यही नहीं ट्रेन नंबर 04651 स्पेशल ट्रेन 11 नवंबर 2024 को सुबह 7 बजे पुरानी दिल्ली पहुंचने वाली ट्रेन रात 10 बजकर 11 बजे पहुंची। 

यहां पर सवाल सिर्फ ट्रेनों के देरी से चलने का नहीं है बल्कि, ये भी है कि इससे यात्रियों को कितनी तकलीफें होती हैं। कोई अपने दफ्तर से छुट्टी लेकर गया होता है और तय समय पर पहुंचना चाहता है ताकि समय पर दफ्तर जा सके, तो किसी को तय समय पर स्कूल-कॉलेज जाना होता है, लेकिन इन स्पेशल ट्रेनों के लेट होने की वजह से यात्री समय पर नहीं पहुंच पाते हैं। साथ ही स्टेशन पर बिना तय समय के पहुंचने से अपने घर तक जाने में भी तकलीफें होती हैं। 

खानपान की भी व्यवस्था नहीं होती

यही नहीं, इन स्पेशल ट्रेनों में कोई पैंट्री कार नहीं होती है यानी यात्रियों के लिए भोजन तो छोड़िए पानी तक की व्यवस्था नहीं होती है। अगर आपको इन स्पेशल ट्रेन से सफर करना है तो आपको अपना खाना-पानी लेकर ही इन ट्रेनों में चढ़ना पड़ता है और अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपको भूखे-प्यासा ही रहना पड़ेगा या फिर किसी स्टेशन से आपको सामान लेना पड़ेगा। साथ ही छोटे बच्चों के लिए ये सफर दिक्कतों भरा भी नजर आता है।

ऐसे में भारतीय रेलवे भले ही हर साल दिवाली और छठ जैसे पर्व पर कितनी ही स्पेशल ट्रेनें चलाता हो, लेकिन यात्रियों को इनसे शिकायत तमाम रहती है जिसमें सबसे ज्यादा इनका देरी से चलना और गंतव्य पर 12-12 घंटे से भी ज्यादा देरी से पहुंचना बड़ा मुद्दा है। अभी तो देश में कोहरा नहीं छाया है और तब जाकर ट्रेनें इतनी देरी से चल रही हैं और जब कोहरा लगेगा तो फिर स्पेशल क्या रोजाना चलने वाली ट्रेनें भी देरी से चलती हुई या रद्द होती हुई नजर आने लगेंगी।

इसलिए देरी से चलती हैं स्पेशल ट्रेनें

स्पेशल ट्रेनें इसलिए देरी से चलती हैं क्योंकि भारतीय रेलवे पहले उन ट्रेनों को पास देते हैं जो रोजाना चलती हैं जैसे, सुपरफास्ट या अन्य ट्रेनें। पर बात जब स्पेशल ट्रेनों को पास करने की आती है या प्लेटफॉर्म पर बुलाने की बारी आती है तो पहले ये देखा जाता है कि कहीं कोई रोजाना चलने वाली ट्रेन तो कतार में नहीं है। अगर ऐसा है तो पहले रोजाना वाली ट्रेन को प्लेटफॉर्म पर बुलाया जाता है और स्पेशल ट्रेन को आउटर पर ही खड़ा रखा जाता है, फिर चाहे ये ट्रेनें कितने ही घंटे लेट क्यों न हो जाए।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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