मॉनसून और सांप: भारत में सर्पदंश का कहर और सांपों से जूझती ग्रामीण आबादी
केंद्रीय स्वास्थ्य जांच ब्यूरो की रिपोर्ट (2016-2020) के अनुसार, भारत में सर्पदंश के मामलों की औसत वार्षिक आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) लगभग 3 लाख है और लगभग 2000 मौतें सर्पदंश के कारण होती हैं। जबकि सच्चाई यह है कि भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों की वास्तविक संख्या किसी के पास नहीं है,
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सांप को देखते ही शरीर में सिंहरन दौड़ पड़ती है। मनुष्य की इस स्वाभाविक प्रतिक्रिया से समझा जा सकता है कि आखिर झाड़ियों, घास में और बिल में दुबका हुआ सांप कितना खतरनाक होता है। बरसात के इन दिनों में धान आदि की खेती का मौसम है और यही समय सर्पदंश के लिए सर्वाधिक जोखिमपूर्ण है।
दरअसल, सांप के काटने की घटनाएं ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में घटती हैं। इससे आम किसान या कृषि श्रमिक और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। बच्चों को अक्सर वयस्कों की तुलना में अधिक गंभीर प्रभाव झेलना पड़ता है, क्योंकि उनका शरीर का वजन छोटा होता है। जहरीले सांपों के काटने से कुछ ही समय में मौत से लेकर लकवा, सांस लेने में दिक्कत, रक्तस्राव संबंधी विकार से घातक रक्तस्राव, अपरिवर्तनीय किडनी फेल्यौर, ऊतक क्षति से स्थायी विकलांगता और अंग विच्छेदन हो सकता है।
यह समस्या मुख्य रूप से विकासशील देशों की और खास कर कृषि प्रधान ग्रामीण और वनवासी जनजातियों की है। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य संकट पैदा करती है बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी डालती है। लेकिन इस समस्या को किसी भी स्तर पर मानव वन्यजीव संघर्ष की अन्य घटनाओं की तरह गंभीरता से नहीं लिया जाता है। संभवतः इसीलिये विश्व स्वास्थ्य
विश्व की आधा सर्पदंश मौतें होती हैं भारत में
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार दुनियाभर में हर साल 50.40 लाख लोग सांपों द्वारा काटे जाते हैं और 81,410 से लेकर 1,37,880 तक लोग सर्पदंश से मर जाते हैं तथा लाखों लोग विकलांगता और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। भारत का यह आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है।
हालांकि सर्पदंश पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन और नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरों के आंकड़ों में भारी अंतर है। फिर भी सरकार द्वारा गत् 12 मार्च 2024 को भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना की शुरुआत के समय जारी विवरण के अनुसार भारत में हर साल लगभग 3-4 मिलियन सर्पदंशों में से लगभग 50,000 मौतें होती हैं, जो वैश्विक स्तर पर होने वाली सभी सर्पदंश मौतों का आधा हिस्सा है।
इधर, विभिन्न देशों में सर्पदंश के शिकार लोगों का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही क्लीनिकों और अस्पतालों में रिपोर्ट करता है और सर्पदंश के वास्तविक बोझ की रिपोर्ट बहुत कम की जाती है।
केंद्रीय स्वास्थ्य जांच ब्यूरो की रिपोर्ट (2016-2020) के अनुसार, भारत में सर्पदंश के मामलों की औसत वार्षिक आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) लगभग 3 लाख है और लगभग 2000 मौतें सर्पदंश के कारण होती हैं। जबकि सच्चाई यह है कि भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों की वास्तविक संख्या किसी के पास नहीं है, क्योंकि ले घटनाएं अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों और वन बस्तियों में होती हैं और लोग सांप के काटने पर झाड़ फूंक और घरेलू इलाज पर समय बरबाद कर देते हैं। समय पर सही उपचार न मिलने पर सर्प दंशित व्यक्ति जान गंवा बैठता है। पुलिस और अस्पताल तक मामले न जाने के कारण उनकी रिपोर्टिंग नहीं हो पाती।
मॉनसून का सीजन सर्वाधिक जोखिमपूर्ण
भारत में मॉनसून का मौसम, जो आमतौर पर जून से सितंबर तक चलता है, सांप के काटने के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील अवधि होती है। मॉनसून में भारी बारिश होती हैैं। भारी बारिश से सांपों के आवास नष्ट होते हैं और उनके बिलों में पानी भरता है। इससे सांप भोजन और आश्रय की तलाश में मनुष्यों के रहने वाले क्षेत्रों में चले जाते हैं। मॉनसून का मौसम कृषि गतिविधियों के लिए भी सबसे अच्छा समय होता है। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर अनजाने में उन सांपों के संपर्क में आ सकते हैं जो ऊंची घास या मलबे के नीचे शरण लिए हुए होते हैं। माना जाता है कि मॉनसून के दौरान नमी का उच्च स्तर सांपों को अधिक सक्रिय बना सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्म, गीली परिस्थितियों में शिकार की उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे सांपों की अधिक गतिविधि हो जाती है।
मनुष्यों द्वारा सांपों के घरों पर अतिक्रमण
भारत की जनसख्या बढ़ते जाने के साथ ही अन्य मानव-जीव संघर्ष की तरह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए मानव-सांप संघर्ष भी बढ़ता जा रहा है। मानव निवास विस्तार प्राकृतिक आवासों पर अतिक्रमण करता है। लोगों और सांपों के बीच यह बढ़ा हुआ सम्पर्क विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, सांप के काटने की संभावना को बढ़ाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से भी सांपों के व्यवहार और वितरण को प्रभावित कर रहा है। उदाहरण के लिए, गर्म तापमान और बदले हुए वर्षा पैटर्न उन आवासों का विस्तार कर सकते हैं जहां सांप रहते हैं और उनकी गतिविधि बढ़ सकती है। वनों की कटाई और कृषि विस्तार के कारण वन क्षेत्रों का नुकसान सांपों को भोजन और आश्रय की तलाश में मानव बस्तियों में पलायन करने के लिए मजबूर कर रहा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर चिकित्सा सहायता और एंटीवेनम तक पहुंच सीमित होने के कारण उपचार में इस देरी से मृत्यु दर में वृद्धि होती है।
सर्पदंश रोकने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना
इस गंभीर समस्या को देखते हुए भारत सरकार ने सर्पदंश से होने वाली मौतों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की है जिसका विजन और मिशन सांप के काटने से होने वाली मौतों और विकलांगता के मामलों की संख्या को 2030 तक आधा करने के लिए इसे रोकना और नियंत्रित करना है। लेकिन इस जानलेवा समस्या का असली निदान सावधानी और प्रकृति के साथ जीने की कला सीखना ही है। यही नहीं हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि सांप मूलतः हमारा शत्रु नहीं है। वह बिना छेड़े हमला नहीं करता। कुछ मायनों में वह किसान का शत्रु नहीं मित्र ही है। अगर सांप न हो तो चूहे फसल बरबाद कर देंगे।
वाइल्ड लाइफ एसओएस के अनुसार भारत में भारत में सांपों की 11 परिवारों की लगभग 300 प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें जिनमें से 60 से अधिक विषैले, 40़ हल्के रूप से विषैले और लगभग 180 जहर रहित प्रजातियां हैं। इनमें कोबरा, रसैल और वापर जैसे प्रजातियां बेहद खतरनाक जहरधारी होती है। जबकि जहर रहित सेकड़ों प्रजाति के सांप अकारण ही मारे जाते हैं।
सावधानी ही है सबसे बड़ा बचाव
सांप अन्य खूंखार जीवों की तरह हमला नहीं करता है इसलिए सावधानी में ही बचने का सुरक्षित उपाय है। सांप आमतौर पर छिपे हुए होते हैं, इसलिए जहां भी आप जाते हैं, खासकर घास, झाड़ियों, और ढीली चट्टानों के आसपास वहां सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे क्षेत्रों में जाते समय लंबी पैंट और मजबूत जूते पहनने चाहिए इससे आपकी त्वचा को सांपों के काटने से बचाया जा सकता है।
सांप आमतौर पर रात में सक्रिय होते हैं। रात में बाहर निकलते समय विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि जब वे भारी घास या लकड़ी का सामान ढोकर ले जा रहे हों तो पहले यह सुनिश्चित करें कि वहां अंदर सांप तो नहीं है। लोगों को स्थानीय सांपों की प्रजातियों के बारे में जानना और उन्हें पहचानना चाहिए ताकि आप संकट की स्थिति में मेडिकल हेल्प के लिए जल्दी निर्णय ले सकें।
इसी तरह बिना वजह झाड़ियों या घास में नहीं घुसना चाहिए। यदि आप को सांप देखाई दे तो उसे उत्तेजित न करें और न ही उस पर हमला करें। सांप केवल आत्मरक्षा के लिए काटते हैं। यदि सांप ने काट लिया है, तो खुद से इलाज करने की कोशिश न करें, जैसे कि घाव को काटना या चूसना। यह स्थिति को और खराब कर सकता है। खास बात यह भी कि सांप के काटने के लिए कोई घरेलू उपाय या दवा का प्रयोग न करें। डॉक्टर की सलाह और एंटिवेनम (विषरोधी औषधि) का ही उपयोग करें और जितनी जल्दी हो सके त्वरित चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।
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