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Investment-Savings: बच्चों में खर्च के साथ बचत की डालें आदत, छोटी गतिविधियों का रखें हिसाब-किताब

Narayan Krishnamurthy नारायण कृष्णमूर्ति
Updated Mon, 27 May 2024 05:46 AM IST
सार

Investment-Savings: बच्चों को पैसों के प्रति गलत धारणा से बचाने और उन्हें जागरूक बनाने की शुरुआत जल्द करनी चाहिए। इससे बच्चों को उस धारणा से बाहर आने में मदद मिलती है कि पैसे सीधे एटीएम से आता है।

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Inculcate the habit of saving along with expenditure in children, keep track of small activities
रुपया - फोटो : Istock

विस्तार

बच्चों को वित्तीय साक्षरता के कौशल से लैस करना उनके बेहतर भविष्य के लिए निवेश की तरह है। हर माता-पिता को यह करना चाहिए। बच्चों में पैसे खर्च करने के साथ बजट बनाने और बचत करने की समझ पैदा करनी चाहिए। इससे हम उन्हें भविष्य में वित्तीय रूप से मजबूत बना सकते हैं।

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बच्चों को पैसों के प्रति गलत धारणा से बचाने और उन्हें जागरूक बनाने की शुरुआत जल्द करनी चाहिए। इससे बच्चों को उस धारणा से बाहर आने में मदद मिलती है कि पैसे सीधे एटीएम से आता है। शिखा दिल खोलकर बात करने वाली बच्ची निकली और वह मुझसे यह समझना चाहती है कि पैसे को सही तरीके से कैसे खर्च किया जाए। उसने जब पैसे खर्च करने और सही तरीके से खर्च करने के अंतर का जिक्र किया तो मैं हैरान रह गया, क्योंकि बच्चे अक्सर खर्च करने से खुश होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, उन्हें पैसे बचाने या कमाने के बारे में बहुत कम समझ होती है। इसलिए, मैंने उससे पूछा कि सही तरीके से खर्च करने का क्या मतलब है। उसने बताया कि उसे अपने जन्मदिन पर दादा-दादी से पैसा मिला था, जो एक हफ्ते में खत्म हो गया। 350 रुपये के एक पेंसिल बॉक्स को छोड़कर उसके पास दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है कि उसने 1,000 रुपये का क्या किया।
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खर्च के हिसाब के लिए रखें नोटबुक
हमारी चर्चा इस बात से शुरू हुई कि एक नोटबुक रखना कितना जरूरी है, जिसमें बताया जाए कि आप कहां-कहां पैसे खर्च कर रहे हैं। शिखा ने नोटपैड पर इसे लिख लिया। मैंने पूछा कि क्या उसे पता है कि अभी उसने जो आइसक्रीम खाई थी, उसकी कीमत कितनी थी? उसने कहा, 20 रुपये। उसे स्कूल फीस, आर्ट क्लास फीस, घर पर नौकरानी और कार की सफाई करने वाले को दिए जाने वाले पैसे की भी जानकारी थी।
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छोटी गतिविधियों का रखें हिसाब-किताब
ये सभी छोटी-छोटी नियमित गतिविधियां हैं, जो किसी भी घर का हिस्सा होती हैं। बच्चों को इनके बारे में जानकारी देना अच्छा विचार है। 7-8 साल की उम्र से बच्चों पर भरोसा किया जा सकता है कि वे स्कूल कैंटीन या स्टेशनरी की दुकान पर चीजें खरीदने के लिए छोटी रकम खर्च करें। इस तरह, वे उन पर सौंपी गई जिम्मेदारी की सराहना करेंगे। उन्हें यह एहसास भी कराएं कि नुकसान का क्या मतलब है। बच्चे जब 13-14 साल के हो जाएं तो उन्हें अपना बजट खुद बनाने के लिए प्रोत्साहित करें। बैंक खाता खोलने और उन्हें इस्तेमाल करने के लिए कम सीमा वाले डेबिट कार्ड भी दें। इससे उन्हें कुछ वित्तीय स्वतंत्रता मिलेगी।

वित्तीय स्वतंत्रता में जिम्मेदारी भी करें शामिल
वित्तीय स्वतंत्रता में जिम्मेदारी शामिल होनी चाहिए। यानी बच्चों में खर्च करने के साथ पैसे बचाने की आदत डालें। उन्हें तोल-मोल करने में सक्षम बनाएं। याद रखें, अब तक वे केवल खर्च करने के लिए पैसे देख रहे थे। अब वे इसे अलग नजरिये से देखेंगे, जिसमें पैसे कमाना भी शामिल है। उन्हें अपनी हर इच्छा के लिए भुगतान करने के बजाय अपनी कमाई से अपनी कुछ जरूरतें पूरी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

एक सतत प्रक्रिया है वित्तीय साक्षरता
याद रखें कि वित्तीय साक्षरता सिखाना एक सतत प्रक्रिया है, जो बच्चों के बड़े होने और उनकी समझ के गहरा होने के साथ विकसित होती है। इन रणनीतियों को लागू करके, हम अपने बच्चों को वित्तीय रूप से सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के लिए एक ठोस आधार देने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, शुरुआत करें और उनके बड़े होने पर भी इसे जारी रखें।


निवेश के फैसलों में बच्चों को करें शामिल
बच्चे जब 16-17 साल के हो जाते हैं तो उन्हें निवेश पर परिवार के फैसलों में भी शामिल किया जा सकता है। इस बात पर भी चर्चा की जा सकती है कि आपकी कमाई कैसे होती है और आप इसका क्या करते हैं। उन्हें महत्वपूर्ण खर्चों पर पारिवारिक चर्चाओं का हिस्सा बनाएं। जैसे छुट्टियां बिताना, कार खरीदना आदि। यह बच्चों के शिक्षा के खर्चों के बारे में जानने का भी अच्छा समय है कि पैसे कमाने व जीवन जीने के लिए किसी पेशे या करियर के लिए शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है। इस चरण में आप उनकी ओर से तब निवेश शुरू कर सकते हैं, जब वे 18 वर्ष से कम उम्र के हों और कमाना शुरू करें। उन्हें खुद इसका प्रबंधन करने दें। वे जितनी जल्दी पैसों का प्रबंधन शुरू करेंगे, उनके वित्तीय रूप से सुरक्षित होने की संभावना उतनी ही बेहतर होगी।

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