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भारत-पश्चिम एशिया-यूरोपीय आर्थिक गलियारा: गतिशक्ति का अंतर्राष्ट्रीयकरण

Wed, 20 Sep 2023 04:21 PM IST
Sachin Chaturvedi सचिन चतुर्वेदी
Updated Wed, 20 Sep 2023 04:21 PM IST
सार

आईएमईसी का उद्देश्य रेलवे ट्रैक और शिपिंग मार्गों के नेटवर्क के माध्यम से भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को सुगम बनाना है। एक ढंग से देखा जाए तो यह गतिशक्ति का अतंराष्ट्रीयकरण है।

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IMEC India Middle East Europe Economic Corridor countries internationalization benefits in hindi
भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) एक महत्वपूर्ण पहल है। - फोटो : PTI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की सह-अध्यक्षता में नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित एक विषि कार्यक्रम में घोषित किया गया। भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) एक महत्वपूर्ण पहल है, जो जी-7 द्वारा प्रतिक्षादित वैश्विक अधौंसंरचना और निवेश के लिए साझेदारी (पीजीआईआई) को आगे बढ़ाने का काम करेगा।

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प्रस्तावित गलियारे के विकास के लिए अमेरिका, भारत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ ने एकजुट होकर काम करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। महत्वाकांक्षी पीजीआईआई पहल जर्मनी में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान निम्न और मध्यम आय वाले देशों के साथ अवसंरचना संबंधी साझेदारी के लिए की गई थी।

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गलियारे का उद्देश्य और व्यापार 

दरअसल, इस गलियारे का उद्देश्य रेलवे ट्रैक और शिपिंग मार्गों के नेटवर्क के माध्यम से भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को सुगम बनाना है। एक ढंग से देखा जाए तो यह गतिशक्ति का अतंराष्ट्रीयकरण है। इस युगांतकारी गलियारे से दो महाद्वीपों के बीच बेहतर संयोजन और आर्थिक एकीकरण के जरिए आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलने, और इस तरह सतत् और समावेशी आर्थिक विकास के द्वार खुलने की संभावना बढ़ी है। इसका उद्देश्य रेलवे, बंदरगाहों और भूतल परिवहन का लाभ उठाते हुए मल्टीमॉडल संयोजन के एक नए युग का सूत्रपात करना है।

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आईएमईसी में दो पृथक गलियारे, भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ने वाला पूर्वी गलियारा और अरब की खाड़ी को यूरोप से जोड़ने वाला उत्तरी गलियारा, शामिल होंगे। पूर्वी गलियारे में मुंद्रा बंदरगाह से संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह तक और फिर रेलमार्ग के माध्यम से जॉर्डन तक और जॉर्डन से एक समर्पित फ्रेट गलियारे के माध्यम से इज़राइल में हाइफा बंदरगाह तक पहुँच बढ़ेगी। 

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जी 20 देशों के प्रतिनिधि पटना आएंगे। - फोटो : सोशल मीडिया

हाइफा इज़राइल की भूमध्यसागरीय तटरेखा पर स्थित एक प्रमुख बंदरगाह है। उत्तरी गलियारा हाइफा को फ्रांस, इटली और ग्रीस से जोड़ेगा। इसका लाभ मितव्ययिताओं की प्रकृति, सहभागिता के आयाम और अगले कुछ वर्षों में बनने वाले नए संस्थागत तंत्रों के रूप में देखा जा सकता है।

इस संदर्भ में 'विकास स्तंभ' की भी यहां चर्चा करना भी उपयुक्त होगा। वास्तव में अतंराष्ट्रीय अर्थशास्त्र में लगातार भौगोलिक प्रतीकों को विकास से जोड़ कर देखा गया है। यह स्तंभ" वो हैं जो अपने समीप विकास के नए प्रतिमान बनाते हैं। उसी तरह मलेरिया और इंडोनेगिया ने विकास के त्रिकोण का विचार रखा, जहां तीन नगरों का आपसे में जोड़ कर देखा गया।
 

इसका उद्देश्य यह रहा है कि कैसे हम निर्यात की लागत और प्रतिस्पर्धा का लाभ और संयुक्त बाजार के निर्माण की और जा सकते हैं। इसी तरह "आर्थिक गलियारे" का सोच भी सामने रखा गया है। ये अवधारणाएं क्षेत्रीय और बहुपक्षीय स्तरों पर निरंतर विकसित हो रहे आर्थिक परिदृश्य के अन्तर्गत विस्तार और एकीकरण की संभावनाएं प्रस्तुत करती हैं।


गलियारे से बदल जाएगा भविष्य 

यह भी विचारनीय है कि स्थानिक परिप्रेक्ष्यों का उपयोग करने वाला आर्थिक गलियारा, विकास गलियारे की उत्तरोत्तर प्रगति के मार्ग की परिकल्पना करता है, जो परिवहन गलियारे से शुरू होकर संभार-तंत्र (लॉजिस्टिक्स) गलियारे तक, वहां से आर्थिक गलियारे और फिर विकास गलियारे तक जाता है।

आईएमईसी अपने द्वारा जोड़े जा रहे क्षेत्र के समावेशी और सतत विकास के एजेंडे के प्रभावी कार्यान्वयन की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने में मदद कर सकता है।

भारत-पश्चिम एशिया आर्थिक गलियारे का पुनर्निर्माण करने में सदस्य देश अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिसे प्राचीन काल में लाल सागर मार्ग कहा जाता था। यह मार्ग रोमन और मिस्र साम्राज्यों को पश्चिमी तट पर भारतीय राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र तथा केरल से जोड़ता था।

लाल सागर प्राचीन इतिहास में वर्णित विशाल जल स्रोतों में से एक है। यह मिस्र के प्रारंभिक समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण हुआ करता था और इसका उपयोग भारत जाने के जल मार्ग के रूप में किया जाता था।

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IMEC - फोटो : Facebook

कई राष्ट्रों के लिए फायदेमंद 

यह नई पहल चार देशों, भारत, इज़राइल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा जुलाई 2022 में आरंभ की गई एक अन्य पहल, आई2यू 2 को भी आगे बढ़ाती है। इस पहल ने व्यापार और मूल्य श्रृंखला संपर्कों को मजबूती प्रदान करने का प्रयास किया है, इसी क्रम में हरियाणा के गुरुग्राम में आई 2यू2 नवाचार (इनोवेशन) केन्द्र की शुरुआत की गई है।

यह जलवायु के लिए कृषि नवाचार मिशन की भी परिकल्पना करता है। आईएमईसी पहल में इटली के शामिल हो जाने से उसके आई2यू2 से भी जुड़ने (इसे आई3यू2 बनाते हुए) की भी संभावना व्यक्त की जा रही है।
 

भारत ने उन देशों के साथ भी संयोजन स्थापित करने का प्रयास किया है जहां उसके व्यापारिक हित बढ़ रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार की अपार संभावनाओं को जन्म दिया है और व्यापारिक सहयोग को मजबूती प्रदान की है।


इस समय, यूएई के साथ सालाना 85 बिलियन डॉलर का व्यापार और 15 बिलियन डॉलर निवेश होता है। सऊदी अरब के साथ भारत का आयात 42 बिलियन डॉलर और निर्यात 11 बिलियन डॉलर है; जॉर्डन के साथ भारत का 3 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है।

प्रस्तावित गलियारे का शुभारंभ नए मार्गों और संयोजन के उपायों की पहचान करने की अनेक क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को भी दर्शाता है, ताकि व्यापारिक अवरोधों और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं को अन्य आपात स्थितियों से बचाने जैसी चुनौतियों से निपटा जा सके। भारत-म्यांमार थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग (आईएमटी राजमार्ग) लाओस और कंबोडिया तक बढ़ाया जा रहा है। राजमार्ग के साथ संयोजन में बहुलता की अपार संभावनाओं को देखते हुए भारतीय उत्पादन क्षेत्र के लाभ और निर्यात को व्यापक बनाने के लिए एशिया-अफ्रीका विकास गलियारा और


दक्षिण पूर्व एशिया-भारत-दक्षिण पश्चिम एशिया-यूरोप गलियारा जैसी अन्य प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाने पर अधिक जोर दिया जा सकता है। पश्चिम एशिया में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इज़राइल, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के बीच अब्राहम समझौते जैसे अन्य कदम भी नई गतिशीलता का संकेत हैं क्योंकि पीजीआईआई इन समानांतर प्रयासों को आपस में जोड़ने का प्रयास कर रहा है।


आईएमईसी वित्त, पारिस्थितिकी और सबसे बढ़कर विचारधारा के संदर्भ में स्थायी समाधान की संभावनाएं व्यक्त करता है, ऐसे में भारत मूल्य-आधारित आर्थिक ढांचे के उद्देश्य की पूर्ति की आशा कर सकता है। इस पर जबरन सामरिक चिन्तन की आवश्यकता नहीं बताई जानी चाहिए।

इस बात का भी उल्लेख करना यह उचित होगा कि 'मेक इन इंडिया' और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं की सफलता महत्वपूर्ण रूप से सागर माला और भारतमाला पहल के केंद्रित विस्तार पर निर्भर करेगी, जो देशों और महाद्वीपों के बीच बंदरगाहों और अंतर्देशीय जलमार्गों को जोड़ने का काम करेगी। कम कार्बन उत्सर्जन के साथ 'मेक इन इंडिया' पर जोर देते हुए आईएमईसी भारतीय विनिर्माण क्षेत्र और निर्यात को बढ़ावा दे सकता है

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अनेक समीक्षाओं में आईएमईसी को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के लिए विश्वसनीय चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। - फोटो : Facebook

रोजगार की दिशा में एक बड़ी पहल 

नया गलियारा आईएमईसी डिजिटल संयोजन को प्रोत्साहन देने के साथ समुदायों को परस्पर जोड़ने के लिए केबल बिछाने में भी सहायता करेगा। लोगों के आपसी संपर्क और समुदायों की भागीदारी में वृद्धि के साथ हम अंततः स्थायी आर्थिक विकास की आकांक्षा कर सकते हैं और इन के माध्यम से समावेशी परिणाम सुनिश्चित कर सकते हैं।
 

अनेक समीक्षाओं में आईएमईसी को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के लिए विश्वसनीय चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। यहां इस बात को इंगित करना उचित होगा कि संयोजन के लिए आईएमईसी जैसे कदमों को विकास गलियारा कहा जाना चाहिए, जो कि विभिन्न क्षेत्रों में असमान औद्योगिकीकरण और विकास के अंतर को मिटाने के लिए विकास यंत्र के रूप में कार्य कर सकते हैं।


इनसे रोजगार के अधिक अवसरों का सृजन करने, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने और आय संबंधी असमानताओं को कम करने में मदद मिल सकती है। इस प्रकार, विभिन्न कदमों के लिए पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है, जिन पर अभी मनन किया जा रहा है और भविष्य में उन पर चर्चा हो सकती हैं। लेकिन इस पर जबरन सामूहिक चिन्तन की आव" यकता नहीं बतायी जानी चाहिये।

यह विषय सदैव मान्य रहेगा कि राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांत को कतई नजरअंदाज या उससे कभी समझौता नहीं किया जा सकता। एक-दूसरे संवेदनशीलता का सम्मान करने वाले देश अंततः साझेदारी कायम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

विश्व केवल मानवता के लाभ और कल्याण के लिए ही नहीं, अपितु बड़े पैमाने पर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में अग्रसर है, तो ऐसे में यह नाजुक संतुलन सुनिश्चित करने की आव" यकता होगी।

लेखक विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस), नई दिल्ली के महानिदेशक हैं. 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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