जीवन धारा: तैरना सीखना है तो पैर जमीन से उठाना होगा; लक्ष्य ऊंचा रखने का सूत्र अपनाएं
लोग जीवन में सुख चाहते हैं, लेकिन अपने पुराने विचारों को बदले बिना, जो वर्षों से उनके दिमाग में जड़ें जमाए हुए हैं। यह ठीक वैसा ही है, जैसे कोई तैरना सीखना चाहे, पर एक पैर जमीन पर भी रखना चाहता हो।
विस्तार
यदि हमें पता चले कि अब कुछ ही दिनों में हम मरने वाले हैं, तो जीवन अचानक हमें अद्भुत लगने लगेगा। उस समय, हमारी जिंदगी की सारी परियोजनाएं, यात्राएं, प्रेम संबंध, पढ़ाई-लिखाई, जिन्हें हमने अपने आलस्य के कारण टाल दिया था, अचानक हमारी आंखों के सामने आ जाएंगी। इससे पहले, हम केवल सोच-विचार में अपना समय व्यर्थ गंवाते थे और भविष्य के प्रति निश्चिंत होकर इन चीजों को लगातार टालते जा रहे थे। ऐसे में, हमारे मन में बार-बार यही विचार कौंधेगा कि यदि यह मृत्यु टल जाए, तो जीवन कितना सुंदर हो सकता है! यदि हमें मृत्यु का भय न हो, तो शायद हम इन सबके बारे में सोचते ही नहीं, क्योंकि हम हमेशा की तरह स्वयं को सामान्य जीवन के केंद्र में पाते, जहां लापरवाही से भरी इच्छाएं हम पर हावी रहती हैं और हमें एक स्थान पर बांधे रखती हैं।
फिर भी, हमें जीवन से प्रेम करने के लिए मृत्यु के भय की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यह सोच लेना ही काफी है कि हम मनुष्य हैं, और किसी भी क्षण मृत्यु आ सकती है। हमें वर्तमान क्षण में जीने की कला सीखनी चाहिए। हमें अपने अहंकार और उन भावनाओं को त्यागना चाहिए, जो केवल नकल करके जीने में विश्वास रखती हैं और हमारी बुद्धि को नष्ट करती हैं। हमें उस दिशा में वापस लौटना चाहिए, जहां हम स्वयं को पहचान सकें। हमें सभी बाधाओं को तोड़ते हुए ज्ञान को स्वयं खोजना होगा। जिस तरह जंगल में यात्रा करने के लिए हमें स्वयं रास्ता तलाशना पड़ता है, उसी तरह हमारा ज्ञान ही वह दृष्टिकोण है, जिससे हम अंततः स्वयं को और दुनिया को देखते हैं। इस नए दृष्टिकोण से हम एक ऐसी दुनिया का निर्माण करते हैं, जिसमें हर पल जीवन का आनंद लेना संभव हो जाता है। लोग दावा करते हैं कि जब हम उस घर या बगीचे में प्रवेश करते हैं, जहां हम अपनी युवावस्था में रहे थे, तो एक पल के लिए हम उस आत्मा को पुनः प्राप्त कर लेते हैं, जो हम बहुत पहले थे। लेकिन ये सबसे खतरनाक तीर्थयात्राएं हैं, जो अक्सर सफलता के साथ-साथ निराशा में भी समाप्त होती हैं।
हमें अपने भीतर ही उन निश्चित स्थानों को खोजने की कोशिश करनी चाहिए, जो अलग-अलग वर्षों के साथ समकालिक हों। अधिकांश लोग जीवन में सुख चाहते हैं, वे जीना सीखना चाहते हैं, लेकिन अपने पुराने विचारों को बदले बिना, जो वर्षों से उनके दिमाग में जड़ें जमाए हुए हैं। यह ठीक वैसा ही है, जैसे कोई तैरना सीखना चाहता हो, लेकिन एक पैर जमीन पर भी रखना चाहता हो। जीवन में लक्ष्य रखें, लेकिन केवल जीवित रहने के लिए नहीं, बल्कि इसे समृद्ध बनाने के लिए। जीवन की सुंदरता को अपनाने के लिए हमें हर क्षण को एक अनमोल उपहार मानकर जीना होगा, जहां प्रेम, उत्साह और आत्म-जागरूकता हमें नई ऊंचाइयों तक ले जाए।
सूत्र-लक्ष्य ऊंचा रखें
हमेशा सपने देखें और जितना आप पा सकते हैं, उससे भी ऊंचा लक्ष्य रखें। अपने समकालीनों या पूर्ववर्तियों से बेहतर होने के बजाय खुद से बेहतर बनने की कोशिश करें। खुद को स्वीकार करें, खुद से प्यार करें और आगे बढ़ते रहें। अगर आप उड़ना चाहते हैं, तो आपको वह सब छोड़ना होगा, जो आपको नीचे खींचता है।