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‘कोरोना अंतराल’ के बाद फाल्गुन की पूर्व संध्या पर रंगों की बहार

Mon, 22 Mar 2021 09:24 AM IST
Riyaz Khan रियाज खान
Updated Mon, 22 Mar 2021 09:24 AM IST
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holi festival 2021 tridhara natya mahotsav in nczcc falgun
त्रिधारा महोत्सव में कला प्रेमियों की अच्छी संख्या उपस्थित रही। - फोटो : रियाज खान

बार्सिलोना में पिछले वर्ष जून में तीन महीने के लॉकडाउन के बाद पहली बार प्रसिद्ध ओपेरा हाउस ‘लिसु’ को एक कॉन्सर्ट के लिए खोलकर उसकी दो हज़ार से भी अधिक सीटों पर लोगों की जगह ऑडियंस के रूप में एक-एक पौधा रख कर परफॉर्म किया गया। कुछ समय पूर्व ऑडियंस से भरे जिस हाल में कला प्रेमियों ने साथ बैठ कर कई शो देखे हों, उसमें समाचार पत्र के माध्यम से इस प्रकार के अनोखे शो के बारे में पढ़कर उनका भावुक होना स्वाभाविक था।

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निश्चय ही कोरोना ने हर क्षेत्र के लोगों और उनके अपने काम को अंजाम देने के नियमित तरीकों को चुनौती दी है। इसके चलते ‘वर्क फ्रॉम होम’ का रिवाज तेज़ी से फैला। परन्तु इस बीच सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े शोबे जैसे फिल्म, टीवी कार्यक्रमों का प्रोडक्शन या फिर रंगमंच नाट्य प्रस्तुति आदि से सम्बंधित वर्ग अपनी कला को दर्शकों तक पहुँचाने के लिए सबसे अधिक प्रभावित और संघर्षरत नज़र आया। क्रमबद्ध अनलॉक तथा वैक्सीन की आमद से हालात अब धीरे-धीरे बेहतर हो रहे हैं।

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प्रवीण शेखर के रंग-कर्म का सरोकार वर्तमान यथार्थ से रहा है। - फोटो : रियाज खान

इसी क्रम में फाल्गुन मास की पूर्व संध्या पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीज़ेडसीसी) के प्रेक्षागृह में तीन दिवसीय ‘ त्रिधारा नाट्य महोत्सव ’ का आयोजन सभी कला प्रेमियों के लिए ख़ुशख़बरी का बाइस बना।

इस त्रिधारा से शराबोर होने एक दिन हम भी मित्रों के साथ वहां पंहुचे। लगभग पूरे एक वर्ष के अंतराल के बाद एनसीज़ेडसीसी की दर्शक दीर्घा में बैठ कर हिंदी रंगमच-निर्देशक प्रवीण शेखर के निर्देशन में नन्द किशोर आचार्य द्वारा लिखित ' किसी और का सपना ’  जैसे स्तरीय नाटक की अनुभूति का सुयोग प्राप्त हुआ।

वह लोग जो रंगमंच में रुचि रखते हैं, उनके लिए इस नाटक के मूल संयोजक प्रवीण शेखर का नाम बहुत ही मुस्तनद है। रतन थियम, रूद्र प्रसाद सेनगुप्ता, भानु भारती, बाबा कारंथ, बादल सरकार, तपस सेन, बी. एम. शाह जैसी रंगमंच की हस्तियों के सम्पर्क और सोहबत में रहकर उन्होंने नाट्य अनुभव अर्जित किया है।

रंगमंच के सामर्थ्य और सीमाओं से वह बखूबी वाकिफ हैं। इसमें कोई शक नहीं कि अपने नाटकों में विचारों की गहराई तथा अपरिमित तजुर्बों अथवा नए प्रयोगों के माध्यम से थिएटर की दुनिया में उन्होंने अपनी एक खास जगह बनाई है। इसलिए उनके द्वारा निर्देशित नाटकों को देखना बहुत ही पुरलुत्फ़ और विचारोत्तेजक होता है।

नाटक आरंभ होने से पूर्व, प्रेक्षागृह में बगल की सीट पर बैठे मशहूर उर्दू कहानीकार असरार गांधी ने भी मुझसे कहा, “अलग तरह के काम के माहिर प्रवीण शेखर को मैं लगभग पिछले चालीस वर्षों से जानता हूं। अपने रंगकर्म के माध्यम से सामूहिक रचनात्मकता के हामिल हैं। हमेशा उनके रंग-कर्म का सरोकार वर्तमान यथार्थ से रहा है और अक्सर समकालीन परिस्थितियों को ही वह अपने नाटक के रंगमंचीय आलेख का केंद्र बनाते हैं। ड्रामे से इतर, वह एक बहुत ही संवेदनशील लेखक और कला विशेषज्ञ भी हैं।“

प्रवीण शेखर ने अपनी सृजनशीलता से इस नाटक में वर्तमान वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य के तेज़ी से बदलते स्वरुप, देश के भीतर चल रहे सामाजिक-राजनीतिक संवाद, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं इत्यादि के साथ-साथ लोकप्रिय स्थानों तथा रोज़मर्रा के बरजस्ता इस्तेमाल से जो स्थानीयता और हास्य का तड़का लगाया , वह काबिले तारीफ है। संभवतः इस कारण भी नाटक देखने आये लोग स्वयं को रंगमंच से बेहतर ‘कनेक्ट’ कर पाए।

अपने निर्देशकीय दायित्वों का बख़ूबी निर्वहन करते हुए प्रवीण शेखर ने इस सांकेतिक नाटक के मंचन द्वारा दर्शकों के मनोरंजन के साथ-साथ, उन्हें कुरेदते हुए सोचने पर भी आमादा किया। किसी भी सफल रंगमंच निर्देशक की यही विशिष्टता भी होती है - वह रंगमच पर बिखरे रंग, कलाकार, संवाद, प्रकाश योजना, ध्वनि प्रभाव आदि सभी के बीच संतुलन बनाए रखते हुए उपस्थित दर्शकों को आस-पास हो रही असामान्य घटनाओं की ओर उनका ध्यानाकर्षण कराते हुए सामाजिक चेतना को सम्बोधित कर सकारात्मक चर्चा का सूत्रपात बनता है।

निर्देशक के साथ-साथ नाटक के सभी बेमिसाल अभिनेताओं का सह्रदय परिश्रम और उत्क्रष्टता भी मंच पर नज़र आयी । इस नाट्य प्रस्तुति की सफलता प्रेक्षागृह में बैठे दर्शकों की मन्चन के दरमियान उनकी तल्लीनता से आंकी जा सकती थी। हाई-स्पीड इंटरनेट के इस युग में भी कलाप्रेमी दर्शकों के बीच समाज परिवर्तक युवा वर्ग की अपेक्षा से अधिक प्रतिभागिता शुभ -सूचक रही।


(लेखक हैदराबाद स्थित एक आई.टी. व इंजीनियरिंग सर्विसेज कम्पनी में निदेशक व स्तम्भकार हैं ) 

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