फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   history of world cinema Gillian Armstrong Australian film director

विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग- ऑस्ट्रेलिया की रचनात्मकता

Sun, 23 Mar 2025 05:44 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sun, 23 Mar 2025 05:44 PM IST
सार

‘माई ब्रिलियंट कैरियर’ (1979) ने गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर भी जम कर सफलता मिली। वे चालीस साल में ऑस्ट्रेलिया की पहली महिला फिल्म निर्देशक हैं, जिसने फीचर फिल्म बनाई। 
 

विज्ञापन
history of world cinema Gillian Armstrong Australian film director
सिनेमा का इतिहास - फोटो : Freepik

विस्तार

बीसवीं सदी के साठ और सत्तर के दशक में ऑस्ट्रेलिया में रचनात्मकता का एक विस्फोट हुआ था, जब ऑस्ट्रेलियन फिल्म कमीशन की स्थापना हुई और ऑस्ट्रेलियन फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल खुला। फिल्म बनाने के लिए सरकारी रियायतें घोषित हुई।

विज्ञापन


गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग इसी समय की उपज हैं, आगे चल कर वे ‘द पियानो’ जैसी बेहतरीन फिल्म की निर्देशक न्यूजीलैंड की निवासी जेन कैम्पिअन की प्रेरणा और रोल मॉडल बनीं। जेन कैपिअन ने भी ऑस्ट्रेलियन फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल में प्रशिक्षण पाया था। सिने-निर्देशक एवं प्रड्युसर गिलियन आर्मस्ट्रॉंग का जन्म 18 दिसम्बर 1950 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हुआ था। जॉन प्लेफर से उनकी शादी हुई, उनके दो बच्चे हैं।
विज्ञापन


उनकी फिल्म ‘माई ब्रिलियंट कैरियर’ (1979) ने गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर भी जम कर सफलता मिली। वे चालीस साल में ऑस्ट्रेलिया की पहली महिला फिल्म निर्देशक हैं, जिसने फीचर फिल्म बनाई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


‘माई ब्रिलियंट कैरियर’ फिल्म एक मजबूत इरादों वाली महत्वाकांक्षी स्त्री की कहानी है, जिसे सुंदर न होने के कारण काफी कुछ झेलना पड़ता है, मगर जो संघर्ष करती है और अंतत: एक लेखिका बन कर उभरती है। मजे की बात यह है कि परिवार जिसे बदसूरत समझता है, उसे उस इलाके का सबसे खूबसूरत युवक पसंद करता है।
 

‘माई ब्रिलियंट कैरियर’ (1979)

एक घंटा चालीस मिनट की यह फिल्म माइल्स फ्रैंकलिन के इसी नाम के उपन्यास (1901) पर आधारित है, जिसका लेखन एलिनोर विटचोम्ब ने लेखक के साथ मिल कर किया है। फिल्म बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध के ऑस्ट्रेलिया के समाज को दिखाती है। माइल्स फ्रैंकलिन ने खुद विवाह के मार्ग से नहीं बल्कि अपना भविष्य लेखक के रूप में सुरक्षित किया। माइल्स फ्रैंकलिन नारीवाद, ऑस्ट्रेलिया के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए जानी जाती हैं।

इस फिल्म में ऐसा नहीं है कि परिवार नायिका की सहायता नहीं करना चाहता है वे सब उसकी सहायता करना चाहते हैं मगर उनका मानना है कि शादी ही लड़की के भविष्य को सुरक्षित करने का एकमात्र उपाय है और इसकी वे भरपूर कोशिश करते हैं। लेकिन वह ऐसा नहीं मानती है उसके अनुभव भी उसे यही सिखाते हैं। 

सिविला मैल्विन (जूडी डेविस) जानती है कि उसका छोटा कस्बा कभी उसके लिए लेखक, संगीतज्ञ या कलाकार का अवसर नहीं जुटा सकता है, वहा तो बस मां के द्वारा तय नौकरानी ही बना जा सकता है। जब वह ये प्रस्ताव नकार देती है तो उसे ऑन्ट हेलेन (वेन्डी हग्स) तथा अंकल जुलिअस (पीटर विटफोर्ड) के साथ उसकी उच्च समाज की रहवासी ग्रैंडमदर(एलीन ब्रिटन) के पास रहने केलिए भेज दिया जाता है। वहां भी उसे शादी केलिए कहा जाता है मगर वह कुछ और सोच रही थी। संयोग से बहुत कुछ अनेपेक्षित होता है और वह अपने मिशन में सफल रहती है।

इस ड्रामा/रोमांस फिल्म में जूडी डेविस, सैम नेल (जिसने ‘द पियानों’ फिल्म में पति का अभिनय किया है) एवं वेन्डी हग्स ने बहुत अच्छा काम किया है, खासकर फिल्म में प्रवेश करने वाली नई जूडी का काम प्रत्येक फ्रेम में देखने योग्य है। उसका अभिनय दर्शक के संस्मरण का हिस्सा बनता है। आश्चर्य नहीं जूडी को बाफ्टा का सर्वोत्तम नायिका का पुरस्कार मिला और साथ ही मिला बाफ्टा का ही नई आई सर्वोच्च अभिनेत्री का अवार्ड।

इस फिल्म को ऑस्ट्रेलिया फिल्म इंस्ट्यूट के छ: पुरस्कार (सर्वोत्तम फिल्म, सर्वोत्तम निर्देशक, सर्वोतम स्क्रीनप्ले, सर्वोत्तम सिनेमैटोग्राफी, सर्वोत्तम प्रोडक्शन डिजाइन एवं मिशेल फैडोन प्राप्त हुए। डॉन मैकेल्पाइन की सिनेमैटोग्राफी इस फिल्म को खूबसूरती से परदे पर लाती है, इसके लिए उन्हें ऑस्ट्रेलियन सिनेमैटोग्राफर्स सोसायटी का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। फिल्म की कस्ट्यूम डिजाइन के लिए ऑस्कर नामांकन भी मिला।

history of world cinema Gillian Armstrong Australian film director
विश्व सिनेमा का इतिहास - फोटो : Adobe Stock

गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग के देश के अधिकांश पुरुष फिल्म निर्देशक अपना देश छोड़ कर हॉलीवुड का रुख कर लेते हैं, वहीं जम जाते हैं। लेकिन कई बार हॉलीवुड जा कर, वहां फिल्म बना कर गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग बार-बार अपने देश लौट आती रही हैं। इनकी अगली फिल्म ‘स्टारस्ट्रक’ 1982 में आई। फिर इन्होंने ऐतिहासिक ड्रामा ‘मिसेज सोफेल’ बनाई और 1987 में निर्देशित फिल्म ‘हाई टाइड’ पर इन्हें पुरस्कार प्राप्त हुआ।

अगली फिल्म ‘फायर्स विदइन’ बुरी तरह असफल रही, इतनी असफल की आर्मस्ट्रॉन्ग ने इससे अपना नाम ही हटा लिया। लेकिन 1992 में ‘द लास्ट डेज ऑफ चेज नौस’ से ये फिर फीनिक्स की भांति उठ खड़ी हुई। यह परिवार के बिखरने की गाथा है।

लुइसा मे एल्कोट की कहानी ‘लिटिल वीमेन’ पर कई बार फिल्म बन चुकी है। इसी कहानी पर गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग ने भी 1994 में इसी नाम से करीब दो घंटे की फिल्म निर्देशित की। इस फिल्म से इन्हें सम्मान के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी हुआ।

इस फिल्म को तीन (सर्वोत्तम अभिनेत्री, सर्वोत्तम कॉस्ट्यूम डिजाइन एवं सर्वोत्तम मौलिक संगीत) ऑस्कर नामांकन मिला। बुकर पुरस्कार प्राप्त पीटर कैरी के उपन्यास पर इन्होंने ‘ऑस्कर एंड लुसिंडा’ बनाई, 2001 में इनकी फिल्म ‘शार्लोट ग्रे’ आई जिसकी मिश्रित आलोचना हुई।

आजकल ये ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में रहती हैं। गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग उस आंदोलान का हिस्सा रही हैं जिसे प्रेस ने ‘ऑस्ट्रेलियन न्यू वेव’ का नाम दिया। उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की सर्विस हेतु 1984 में मेम्बर ऑफ दि ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया का सम्मान दिया गया है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed