विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: अनुराधा पटेल-अभिनय सक्षम अभिनेत्री
49 फिल्मों में काम कर चुकी अनुराधा का जन्म 14 मार्च 1965 को बंबई में हुआ था। अनुराधा को अभिनय विरासत में मिला है। बहुत कम लोग जानते हैं, अनुराधा फिल्मी हस्तियों के परिवार से आती हैं। वे प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार, किशोर कुमार से संबंधित हैं। अशोक कुमार उनके नाना थे।
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विस्तार
अनुराधा पटेल को सबसे पहले ‘उत्सव फिल्म में देखा था। 1984 की करीब ढाई घंटे की यह फिल्म वास्तव में एक उत्सव थी। गिरीश कर्नाड द्वारा निर्देशित, शशि कपूर द्वारा प्रोड्यूस यह फिल्म संस्कृत के प्राचीन नाटककार शूद्रक के नाटक ‘मृच्छकटिकं’ (माटी की गाड़ी) पर आधारित है, शूद्रक ने भास के अपूर्ण नाटक ‘दरिद्र चारुदत’ को अपने एक नए नाटक में रच दिया है। ‘उत्सव’ फिल्म की कहानी अन्य लोगों के साथ मिलकर शरद जोशी ने लिखी है।
इस फिल्म में अदिति (अनुराधा पटेल) को परदे पर बहुत कम समय मिला है, मगर उसी कम समय में वह अविस्मरणीय अभिनय करती है। सुंदरी नगरवधु वसंतसेना (प्रसिद्ध अभिनेत्री रेखा) फिल्म की नायिका है। उसी के साथ अनुराधा पटेल का दृश्य है। आसान नहीं है, प्रसिद्ध अभिनेत्री के साथ अभिनय करना और दर्शकों के दिल में सदा केलिए पैठ जाना।
कला का उत्सव मनाती फिल्म ‘उत्सव’ में अनुराधा पटेल ने अदिति अर्थात चारुदत्त (शेखर सुमन, जिनकी यह पहली फिल्म थी) की पत्नी की भूमिका की है, जिसका एक बच्चा भी है। मां बनने के बावजूद उसके चेहरे पर कमनीयता बरकरार है। वसंतसेना और अदिति को एक फ्रेम में रख कर, एक बहुत खूबसूरत गाना फिल्माया गया है, जिसके बोला और दृश्यांकन केलिए यह फिल्म देखना सार्थक है।
गाने के बोल हैं, ‘मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को...’ अदिति वसंतसेना का शृंगार कर रही है। थोड़ी देर बाद वसंतसेना अपने आभूषण अदिति को पहना रही है।
दर्शक यहां स्त्रियों के बहनापे को देखता है, वे अपने सुख-दु:ख साझा कर रही हैं। निर्देशक यहां समलैंगिकता की झलक देता है। इस दृश्य में मांसलता है, मगर अश्लीलता का नामोनिशान नहीं है। लेस्बियन संबम्ध को दिखाता यह फिल्मी दृश्य विरल है। सुंदर, कोमल और दर्शक को भावुक करने वाला।
अभिनय विरासत में मिला
अनुराधा पटेल की यह दूसरी फिल्म है। वे बहुत वेध्य (vulnerable) दिखती हैं। अधिकांश फिल्मों में वे ऐसे ही आघात के लिए उपलब्ध नजर आती हैं। उनकी पहली फिल्म थी ‘लव इन गोआ’( 1983)। 49 फिल्मों में काम कर चुकी अनुराधा का जन्म 14 मार्च 1965 को बंबई में हुआ था।
अनुराधा को अभिनय विरासत में मिला है। बहुत कम लोग जानते हैं, अनुराधा फिल्मी हस्तियों के परिवार से आती हैं। वे प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार, किशोर कुमार से संबंधित हैं। अशोक कुमार उनके नाना थे। उनकी मां का नाम भारती जैफरी है और पिता डॉक्टर वीरेंद्र पटेल हैं। हालांकि अनुराधा के जन्म के तत्काल बाद उनके माता-पिता का विच्छेद हो गया था।
अनुराधा पटेल ने गुलजार की फिल्म ‘इजाजत’ में विद्रोहिणी, गैरपरम्परागत लड़की माया की भूमिका की है। माया वसंती हवा की तरह है, कब आएगी, कब जाएगी बताना मुश्किल है। यहां भी चुनौती है। सुधा (रेखा) तो है ही लेकिन जिस महेंद्र के साथ इस फिल्म में उनको सबसे अधिक परदे पर रहने का अवसर मिला है, वह फिल्मों के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह हैं।
अनुराधा सहजता से भूमिका निभा ले जाती हैं। एक बार फिर उन पर फिल्माया गाना, ‘मेरा कुछ सामान...लौटा दो’ अविस्मरणीय बन पड़ा है। गीत गुलजार का लिखा है, संगीत आर डी का है। गाया इसे आशा भोसले ने है। गीत की भावनाओं को अनुराधा ने साकार किया है।
अनुराधा पटेल ने ‘ऑल राउंडर’, ‘जान की बाजी’, सदा सुहागन’, ‘रुखसत’, ‘तोहफा मोहब्बत का’, ‘दयावान’ आदि तमाम फिल्में कीं। इसके बाद नब्बे के दशक में उन्होंने फिल्मों से अस्थायी रुखसती की लेकिन अपना मॉडलिंग का काम जारी रखा। परिवार की देखभाल के साथ अन्य कई तरह के कार्य करती रहीं। वर्तमान में अभिनेता कंवलजीत सिंह उनके पति हैं, उनके दो बच्चे भी हैं।
फिल्म ‘इना मीना डिका’ (1989)
अनुराधा पटेल ड्रीम गर्ल हैं, यही भूमिका उन्होंने फिल्म, ‘इना मीना डिका’ (1989) में की है। वे वासु इनामदार की स्वप्न सुंदरी बनी हैं। ‘रुखसत’, ‘अंतरयात्रा’ उनकी कुछ अन्य फिल्मों के नाम हैं। अनुराधा पटेल ने न केवल अभिनय किया, वरन उन्होंने फिल्म प्रड्यूस भी की हैं। 2008 की ‘जाने तू...या जाने ना’ ऐसी ही फिल्म है जिसे अनुराधा ने प्रड्यूस किया है और उन्होंने इस फिल्म में अभिनय भी किया है। करीब ढ़ाई घंटे से ऊपर की इस फिल्म को अब्बास टायरवाला ने निर्देशित किया।
अब्बास की निर्देशित यह पहली फिल्म है। और इस कॉमेडी, रोमांस-ड्रामा फिल्म में अदिति (अनुराधा पटेल) के साथ जय (इमरान खान), जेनेलिया डिसूजा हैं ही लेकिन कुछ समय केलिए रत्ना पाठक, नसीरुद्दीन शाह, अरबाज खान, सोहैल खान, अरशद वारसी, परेश रावल जैसे अभिनेता की नजर आते हैं।
इसके आलावा अनुराध पटेल ने ‘दस कहानियां’, ‘रेडी’, ‘सत्यप्रेम की कथा’, ‘राधे श्याम’ आदि फिल्में भी प्रड्यूस की हैं। विज्ञापन फिल्मों में उनका काम जारी है। आप उन्हें सैमसंग, आशीर्वाद आटा, मिल्टन, पीसी चंद्रा ज्वेलर्स आदि के विज्ञापन में देख सकते हैं।
अनुराधा पटेल ने साहित्य अकादमी पुरस्कृत गुजराती उपन्यासकार पन्नालाल पटेल ‘मानवीनी भवाई’ पर बनी 3 घंटे की फिल्म में काम किया है। 1993 की इस फिल्म में अकाल के दौरान किसानों की स्थिति दिखाई गई है। फिल्म में अनुराधा के साथ उपेंद्र त्रिवेदी हैं।
समय के साथ और उम्र की मांग के अनुसार अनुराधा ने खुद को एडजस्ट किया है। 2003 में वे मां के किरदार में नजर आती है। उन्होंने इस ढ़ाई घंटे की फिल्म में अंजु (जेनेलिया डिसुजा देशमुख) की मां मिसेज खन्ना का रोल निभाया है। फिल्म का नाम है, ‘तुझे मेरी कसम।
समय के साथ चल रही इस अभिनेत्री अनुराधा पटेल से दर्शकों की उम्मीदें अभी बाकी हैं।
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