विश्व साहित्य का आकाश: रेड सोर्घम- चीन की अनोखी गाथा
हॉवर्ड गोल्डब्लाट द्वारा इंग्लिश में अनुवादित ‘रेड सोर्घम’ एक पोते (अदृश्य कथावाचक) द्वारा अपनी दादी की कहानी कही गई है। दादी जिसकी बहुत कम उम्र में एक वृद्ध कोढ़ी से शादी करवा दी गई थी। दादी का पिता बहुत लालची था। गाओमी शहर के उत्तरपूर्व के सबसे धनी आदमी के बेटे शान से उसकी शादी तय कर दी।
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2012 के नोबेल पुरस्कृत चीनी लेखक ग्वान-मोये लिखने हेतु मो यान (‘मत बोलो’) नाम का प्रयोग करते हैं। उनका जन्म चीन के सैंडोग नामक स्थान में 17 फरवरी 1955 को हुआ। मो यान ने ‘रेड सोर्घम’, ‘द गार्लिक बालाड्स’, ‘एक्सप्लोशन एंड अदर स्टोरीज’, ‘द रिपब्लिक ऑफ वाइन’, ‘फ्रॉग’, ‘मीटिंग द मास्टर्स’, ‘व्हाइट डॉग एंड द स्विंग’, ‘जॉय’, ‘द वूमन विथ फ्लावर्स’, ‘शीफू: यू विल डू एनीथिंग फॉर ए लाफ’, ‘लाइफ एंड डेथ आर वेयरिंग मी आउट’, ‘बिग ब्रेस्ट एंड वाइड हिप्स’, ‘सैंडलवुड डेथ’, ‘पॉ!’, ‘मैन एंड बीस्ट’, ‘आयरन चाइल्ड’, ‘द क्योर’, ‘शेन गार्डन’, ‘लव स्टोरी’ के अलावा खूब लेख लिखे हैं, साक्षात्कार दिए हैं।
इनकी विश्व-ख्याति 1986 में आए उपन्यास ‘रेड सोर्घम’ से प्रारंभ हुई। एक साक्षात्कार में फ्रीमैन से बात करते हुए वे कहते हैं, ‘जब मैंने ‘रेड सोर्घम’ लिखा, मैं तीस साल से कम उम्र का था, अत: काफी युवा था। उस समय अपने पूर्वजों के विषय में जिंदगी काफी रोमांटिक तत्वों से भरी हुई थी।
मैं उनकी जिंदगी के बारे में लिख रहा था, पर उनके विषय में अधिक नहीं जानता था अत: उन चरित्रों में खूब कल्पना भरी।’ कहते हैं, ‘उस समय स्त्रियां, मेरे उपन्यास ‘रेड सोर्घम’ परिवार की नायिका डाई फैंग्लियान अपने ढ़ंग से विद्रोह कर रही थीं। उन्होंने फ्युडल सिस्टम के खिलाफ फिजिकली विद्रोह किया। शरीर मात्र ही उनकी शक्ति था, अत: मैं सोचता हूं, हम इसमें पढ़ सकते हैं। यह विचारों को उकसाने वाला है।’
‘रेड सोर्घम’ नॉवेल की कहानी
किताब के बारे में प्रारंभ में लिखा है, ‘चीन में यह किंवदंती है, इसे प्रमुख साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त हुए। और इससे प्रेरित फिल्म (निर्देशक झांग यीमोउ) ऑस्कर के लिए नामित हुई। पांच अध्यायों में विभक्त ‘रेड सोर्घम’ में काल्पनिक कहानी और इतिहास फिक्शन निर्मित करने हेतु टकराते हैं, यह बिल्कुल नया और अविस्मरणीय है।’
हॉवर्ड गोल्डब्लाट द्वारा इंग्लिश में अनुवादित ‘रेड सोर्घम’ एक पोते (अदृश्य कथावाचक) द्वारा अपनी दादी की कहानी कही गई है। दादी जिसकी बहुत कम उम्र में एक वृद्ध कोढ़ी से शादी करवा दी गई थी। दादी का पिता बहुत लालची था। गाओमी शहर के उत्तरपूर्व के सबसे धनी आदमी के बेटे शान से उसकी शादी तय कर दी।
पहले डाई फैंग्लियान को विश्वास नहीं था कि उसके माता-पिता ऐसा कर सकते हैं। मां ने भी झूठ बोला था, लड़के को सुंदर एवं पढ़ा-लिखा बताया था। सोलह साल की डाई सुखद वैवाहिक जीवन के ख्वाब देख रही थी, एक अच्छे पति और कोमल व्यवहार की कामना कर रही थी। जब सच्चाई पता चलती है वह माता-पिता से संबंध तोड़ लेत है, लेकिन मां के मरने पर उसका संस्कार करने जाती है।
लिटिल नाइन नाम से परिवार में पुकारी जाने वाली दादी मां समाज व्यवस्था के अनुसार चीन की पितृसत्ता अनुकूलन केलिए लड़कियों की भांति कठोर जीवन जीती है। समाज में पुरुषों द्वारा छोटे पैरों को पसंद किए जाने के कारण उनका महत्व था अत: छ: साल की उम्र से बच्ची के पांव बांधे जाने लगे थे जिन्हें हर दिन और कसा जाता था।
पैर छोटे रखने का उपाय कैसे होता था देखिए, ‘एक गज लम्बा कपड़ा अंगूठे के अलावा सब अंगुलियों को नीचे मोड़ते हुए हड्डियों के चटकने तक कसा जाता। यंत्रणा असह्य थी।’ कथावाचक ने अपनी मां के छोटे पैरों को देखा था, बंधे पैरों से वह उदास होता और चिल्लाना चाहता था: ‘सामंतवाद का नाश हो! स्वतंत्र पैर जिन्दाबाद!’
गर्मी में भी सिर से पांव तक कई परतों में ढकी डाई पालकी में पति के घर जाती हुई अशुभ विलाप सुनती है। उसने कैंची छिपा रखी है, शायद पति शान पर प्रयोग के लिए, शायद खुद पर प्रयोग हेतु। यह नाजुक-सुंदर स्त्री विद्रोह करना जानती है। पसीने से लतपथ ताजा हवा पाने केलिए वह पालकी का परदा हटा देती है। यहीं से उसका जीवन एक भिन्न मोड़ ले लेता है। कितने पूर्वाग्रहों के बीच उसका लालन-पालन हुआ है, जैसे यदि दुल्हन किसी भी कारण से उल्टी कार दे तो यह आने वाले दुर्भाग्य का सूचक है।
डाकू से कहारों का सामना होता है, एक कहार डाकू का सामना करता है और आगे चल कर वह कोढ़ी और उसके पिता को मारता है, डाई का प्रेमी-पति, उसके बच्चे का पिता बनता है। लेकिन वह भी बाद में दो और स्त्रियों से संपर्क करता है।
स्त्रियों का आदर करने वाले मो यान की रची डाई एक बहादुर स्त्री है, पुरुषों की भांति सोर्घम शराब का व्यापार सफलतापूर्वक करती है, अपने कामगरों को बराबरी का दर्जा देती है। पति की बेवफाई का बदला लेती है। जापानियों से लड़ने की जुगत बताती है। द्वितीय दादी मां यानि अपनी सौत से लड़ती-झगड़ती है मगर जब जापानी उसका सामूहिक बलात्कार करते हैं, तब डाई ही उसकी देखभाल कर उसे स्वस्थ करती है। यह बहादुर-बुद्धिमान स्त्री जापानियों का शिकार होती है। उपन्यास उसकी मय्यत को मिट्टी दिए जाने का विस्तार से चित्रण करता है।
सोर्घम के सौंदर्य का वर्णन
बीसवीं सदी के दूसरे दशक से सत्तर के दशक तक फैले, करीब पौने चार सौ पन्नों का उपन्यास ‘रेड सोर्घम’ पूरे समय सोर्घम के सौंदर्य से भरा हुआ है, उसका लाल रंग समृद्धि, अनुराग, लड़ाई, हत्या, मौत विभिन्न बातों का प्रतीक है। उपन्यास की भाषा (इंग्लिश में भी) खूब चित्रात्मक है। यह गाथा एक ओर जहां एक परिवार का इतिहास है, वहीं चीन का इतिहास भी है।
इस उपन्यास में कुत्तों का विशिष्ठ स्थान है। कुत्ते आदमी के वफादार साथी, उनका भोजन, उनके दुश्मन, उनके कपड़े हैं। अतियथार्थवादी शैली में प्रेम-द्वैष, चीन-जापान युद्ध, समुदायों की आपसी लड़ाई, जुगुप्सा, ईर्ष्या, विद्रोह, लोककथाओं का संगुफन है।
तीन पीढ़ियों की कहानी समेटता, इतना मोटा उपन्यास पढ़ने में अगर दिक्कत हो तो 1988 की फिल्म देख लें। इस अनोखी कहानी केलिए आप डेढ़ घंटे का समय तो अपने व्यस्त कार्यक्रम में निकाल ही सकते हैं।
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