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जीवन धारा: सुख और दुख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं... मुश्किलों से नहीं घबराने का सूत्र अपनाएं

Thu, 30 Oct 2025 02:51 PM IST
ज्योति भास्कर स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 30 Oct 2025 02:51 PM IST
सार

सुख की इच्छा रखने वालों को दुख भी सहना होगा। बगैर दुख के सुख हासिल करने का विचार मूर्खतापूर्ण है। खुशी किसी स्वर्ग में नहीं, बल्कि हमारी आत्मा में ही निहित है।

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Happiness and sorrow are two sides of the same coin adopt formula of not being afraid of difficulties
मानव जीवन में सुख और दुख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

भारत में बैलों का इस्तेमाल अक्सर तिलहन पीसने के लिए किया जाता है। बैल की गर्दन पर एक जुआ होता है। उस जुए से लकड़ी का एक टुकड़ा बाहर की ओर निकाला जाता है, जिस पर पुआल का गट्ठर बंधा होता है। बैल की आंखों पर इस तरह से पट्टी बांधी जाती है कि वह इधर-उधर देखने के बजाय केवल आगे की ओर देख सके। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि वह पुआल तक पहुंचने के लिए अपनी गर्दन आगे बढ़ा सके।

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पुआल को खाने की कोशिश में वह लकड़ी के टुकड़े को थोड़ा-थोड़ा करके आगे की ओर धकेलता है। ऐसा प्रयास वह बार-बार करता है। हालांकि, वह पुआल को तो नहीं पकड़ पाता, लेकिन उसे पाने की उम्मीद में गोल-गोल घूमता रहता है, और ऐसा करते हुए तिलहन की पिसाई हो जाती है। इसी तरह आप, मैं और हर वह इन्सान, जो प्रकृति, धन-दौलत, पत्नी-बच्चों का गुलाम है, हमेशा महज एक तिनके के पीछे भागते रहते हैं। हम जीवन के अनगिनत चक्रों से गुजरते हैं, बिना वह हासिल किए, जो पाना चाहते हैं। संसार में महान स्वप्न प्रेम है, हम सब यदि प्यार करेंगे, तो प्यार अवश्य पाएंगे।
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ऐसा करते हुए हम सब खुश रहेंगे और शायद ही हमें दुखों का सामना करना पड़े। लेकिन यह बात भी सच है कि जितना ज्यादा हम खुशी की ओर बढ़ते हैं, उतना ही वह हमसे दूर होती जाती है। इसी तरह दुनिया चल रही है, समाज चल रहा है, और हम अंधे गुलाम, अनजाने में ही इसकी कीमत चुका रहे हैं। यदि मैं दुखी हूं, तो यह मेरी अपनी गलती है और यही बात दर्शाती है कि यदि मैं चाहूं, तो खुश रह सकता हूं। अपने जीवन का अध्ययन करें और देखें कि उसमें कितनी कम खुशी है और दुनिया की इस अंधी दौड़ में आप कितना कम हासिल कर पाए हैं। 
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संसार में सुख के पीछे छाया के रूप में दुख जरूर रहता है। यहां कोई भी इन्सान वास्तव में कभी खुश नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अमीर है और उसके पास खाने के लिए सब कुछ है, तो उसका पाचन तंत्र खराब है, तथा वह मनचाही चीज खा नहीं सकता। यदि किसी व्यक्ति का पाचन तंत्र बढ़िया है, और उसकी पाचन शक्ति मजबूत है, तो उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है। यदि कोई बहुत पैसे वाला है, तो हो सकता है कि उसके पास बच्चे न हों। यदि वह भूखा और गरीब है, तो उसके पास बच्चों की एक पूरी फौज हो सकती है तथा वह नहीं जानता कि उनके पालन-पोषण के लिए क्या करे? 

ऐसा क्यों है? क्योंकि सुख और दुख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सुख की इच्छा रखने वालों को जीवन में दुख भी सहना होगा। बगैर दुख के सुख हासिल करने का विचार मूर्खतापूर्ण है। लेकिन यह सोच हमारे भीतर घर कर गई है कि हम बगैर दुख उठाए भी सुख हासिल कर सकते हैं। वास्तव में ऐसा होता नहीं है। खुशी किसी स्वर्ग में नहीं, बल्कि हमारी आत्मा में ही निहित है, स्थानों का कोई महत्व नहीं है। 


सूत्र: मुश्किलों से घबराएं नहीं
इस संसार में सुख के पीछे दुख छाया के रूप में रहता ही है। हमें जीवन में सुख-दुख, दोनों का सामना करना ही है, भले ही हम कुछ भी कर लें। इसी से जीवन सुंदर और एक नया रूप लेता है। जीवन की इस प्रक्रिया से हरेक इन्सान को गुजरना ही पड़ता है, इसलिए हमेशा हर स्थिति के लिए तैयार रहें। मुश्किलों का सामना करना सीखें, उनसे घबराएं नहीं।

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