हनुमान जयंती शोभायात्रा और हिंसा: आखिर क्यों हो रहे हैं हमले? क्यों टूट रहा है सामाजिक ताना-बाना?
रामनवमी की शोभा यात्रा पर इतने अलग-अलग हमले आखिर क्यों? मुस्लिम एरिया जैसे शब्द अनायास ही ट्विटर पर ट्रेंड नहीं कर रहा, इसके पीछे एक सुनियोजित षड्यंत्र है। मद्रास हाईकोर्ट में बीते दिनों एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें याची का आवेदन था कि मुस्लिम एरिया में हिंदुओं के जुलूस को प्रतिबंधित किया जाए और वहां मुसलमानों की भावनाओं को आहत होने से बचाने के लिए हिंदू मंदिरों पर रोक लगाई जाए।
रामनवमी की शोभा यात्रा पर इतने अलग-अलग हमले आखिर क्यों? मुस्लिम एरिया जैसे शब्द अनायास ही ट्विटर पर ट्रेंड नहीं कर रहा, इसके पीछे एक सुनियोजित षड्यंत्र है। मद्रास हाईकोर्ट में बीते दिनों एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें याची का आवेदन था कि मुस्लिम एरिया में हिंदुओं के जुलूस को प्रतिबंधित किया जाए और वहां मुसलमानों की भावनाओं को आहत होने से बचाने के लिए हिंदू मंदिरों पर रोक लगाई जाए।
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टीवी और अखबारों में भले ही इन दिनों हिंदू शोभायात्राओं पर हमले की खबरें पहले की तरह सांप्रदायिक झगड़ों के रूप में दिख रही हों किंतु देशभर की घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो स्पष्ट दिखाई देता है कि बड़े सुनियोजित तरीके से वैश्विक स्तर पर भारत को बदनाम करने की ठोस कोशिशें शुरू हो चुकी हैं।
दरअसल, पूरे देश में एक साथ एक ही जैसी घटनाओं का घटना, सोशल मीडिया पर सुनियोजित एजेंडा ट्रेंड करना और 'सेकुलर रुदालियों' की चुप्पी किसी 'बड़ी' तैयारी की ओर इशारा करती है।
कुछ दिन पहले अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद इलहान ओमर ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से आग्रह किया कि भारत में मुसलमानों के साथ जिस तरह का भेदभाव पूर्ण बर्ताव चल रहा है उस पर अमेरिका द्वारा भारत को चेताया जाना आवश्यक है। अमेरिका में सक्रिय तमाम मानवाधिकार वादी संगठन भारत के विरुद्ध ऐसे मुद्दों पर जहर उगलते रहते हैं।
चुप्पियों के बीच सियासत
भारत के तथाकथित मानवतावादी और नव उदारवादी संगठन भी पश्चिम में भारत को बदनाम करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। क्या सचमुच भारत में मुसलमान असुरक्षित है? सिर्फ बीते कुछ दिनों के घटनाक्रम पर भी नजर घुमा ली जाए तो साफ हो जाता है कि इस पृथ्वी पर भारत अकेला देश है जहां अल्पसंख्यक समुदाय का लाभ लेने वाला मुस्लिम समुदाय प्रताड़ित होने के नाम पर बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को प्रताड़ित करता है।
बीते 10 अप्रैल को रामनवमी का पर्व था इस अवसर पर राम भक्त शोभा यात्राओं का आयोजन करते हैं और हिन्दू समाज का यह बड़ी आस्था और श्रद्धा का पर्व है। पूरे देश में 10 अलग अलग स्थानों पर राम भक्तों की शोभायात्राएं गुजरीं तो शोभा यात्रा पर पथराव, तलवारबाजी और बमबाजी की घटनाएं हुईं।
राजस्थान में तो नव संवत्सर की शोभायात्रा पर ही सुनियोजित ढंग से भीषण हमला हुआ। हमले की योजना पूर्व नियोजित थी। पहले से ताक में बैठे इन दंगाइयों ने धारदार हथियारों से शोभायात्रा में शामिल भक्तों पर वार किए। दुकानों और मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया। जांच में पाया गया कि बड़े पैमाने पर ट्रकों पत्थर नव संवत्सर के जुलूस के पहले ही छतों पर जमा किए गए थे।
पेट्रोल बम से भी हमले किए गए। इस हमले का नेतृत्व मतलूब अहमद नामक कांग्रेसी पार्षद कर रहा था। अब तक मतलूब अहमद की गिरफ्तारी भी नहीं हुई है। उल्टे 13 अप्रैल को जब राजस्थान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या पीड़ितों से मिलने जा रहे थे तो राजस्थान की पुलिस ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर उन्हें करौली जाने से रोक दिया।
न्याय मिलना तो दूर तुष्टीकरण के चक्कर में पीड़ितों के दर्द पर मरहम लगाने से भी रोकने का कुकृत्य कांग्रेसी सरकार करती है। रामनवमी के दिन तो हिंसक भीड़ ने देशभर में 10 स्थानों पर राम भक्तों पर हमले किए।
गुजरात के हिम्मतनगर और खंभात में दंगाइयों ने रामनवमी के जुलूस पर पथराव किया। इसमें तमाम लोग घायल हुए दुकानों को क्षतिग्रस्त किया गया और वाहनों में आग लगा दी गई। मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में पथराव, आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुईं। खरगोन में जब रामनवमी के जुलूस पर हमला हुआ तो कांग्रेस समेत तमाम सेकुलर सन्नाटा साध गए, किंतु जब शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने दंगाइयों के अवैध निर्माणों को धराशाई किया तो सारे सेकुलर एक स्वर में स्यापा करने लगे।
झारखंड में लोहरदगा में रामनवमी के जुलूस पर सिरोही गांव के पास दंगाइयों ने हमला बोल दिया जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 12 लोग जख्मी हो गए। पश्चिम बंगाल के बांकुरा में भी इसी तरह जब रामनवमी का जुलूस पहुंचा तो दंगाइयों ने उसे निशाना बनाया।
मचान ताला के पास जब जुलूस मस्जिद के सामने से गुजरा तो दंगाइयों ने राम भक्तों पर पथराव शुरू कर दिया। गोवा के वास्को शहर में भी इसी तरह रामनवमी के जुलूस पर मुस्लिम दंगाइयों द्वारा सुनियोजित हमला किया गया। रात 8:30 बजे जब रामनवमी की शोभायात्रा पर पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने शोभा यात्रा को अपना निशाना बनाया।
बिहार के मुजफ्फरपुर में भी रामनवमी की शोभायात्रा में घुसकर दंगाइयों ने हुड़दंग मचाया, प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ राम भक्तों ने वहां की मस्जिद पर भगवा झंडा लहरा दिया। शोभा यात्रा पर किए गए हमले की किसी ने निंदा नहीं की, परंतु मस्जिद पर भगवा लहराने पर राष्ट्रीय स्तर पर हंगामा खड़ा किया गया और पाकिस्तान प्रायोजित सोशल मीडिया के तमाम हैंडल से इस पर दुष्प्रचार फैलाया गया। मुंबई में मानखुर्द के शिवाजी नगर इलाके में भी रामनवमी के जुलूस पर हमला हुआ।
ट्विटर पर #Muslimarea ट्रेंड कर रहा है, जो इलाके मुस्लिम बहुल हैं वहां से हिंदुओं के जुलूस निकलने पर हमले का क्या संकेत है? क्या हिंदुस्तान में मुस्लिम एरिया जैसा कोई क्षेत्र होना चाहिए? क्या भारत में अल्पसंख्यक कहलाकर तमाम सुविधाएं झपटने वाले मुसलमानों को अतिवाद पर आमादा होना चाहिए?
रामनवमी की शोभा यात्रा पर इतने अलग-अलग हमले आखिर क्यों? मुस्लिम एरिया जैसे शब्द अनायास ही ट्विटर पर ट्रेंड नहीं कर रहा, इसके पीछे एक सुनियोजित षड्यंत्र है। मद्रास हाईकोर्ट में बीते दिनों एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें याची का आवेदन था कि मुस्लिम एरिया में हिंदुओं के जुलूस को प्रतिबंधित किया जाए और वहां मुसलमानों की भावनाओं को आहत होने से बचाने के लिए हिंदू मंदिरों पर रोक लगाई जाए।
तमिलनाडु के पेरंबलूर जिले में कलाथूर मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां का मुस्लिम समुदाय 2012 से ही हिंदू मंदिरों और शोभायात्रा को प्रतिबंधित करने की मांग करता रहा है। इसी मांग को लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदू त्योहारों को 'पाप' करार देते हुए मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इस मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एन किरूबाकरण और जस्टिस वेलमुरूगन की दो सदस्यीय पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए इसे मुस्लिम समुदाय की असहिष्णुता करार दिया। असहिष्णुता को देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए खतरनाक करार दिया।
मद्रास हाईकोर्ट ने टिप्पणी की-
"केवल इसलिए एक धार्मिक समूह विशेष इलाके में हावी है इसलिए दूसरे समुदाय को त्योहारों को मनाने या उस एरिया की सड़कों पर जुलूस निकालने से नहीं रोका जा सकता। अगर धार्मिक असहिष्णुता की अनुमति दी जाती है तो एक धर्मनिरपेक्ष देश के लिए अच्छा नहीं है।
किसी भी धार्मिक समूह द्वारा किसी भी तरह की असहिष्णुता पर रोक लगाई जानी चाहिए। जिन इलाकों में दशकों से संप्रदाय विशेष के उत्सव हो रहे हैं ,उन्हें धार्मिक भावना भड़कने के नाम पर रोका नहीं जा सकता।
गलियों और सड़कों से निकलने वाले जुलूस को सिर्फ इसलिए प्रतिबंधित करने की मांग को नहीं स्वीकारा जा सकता क्योंकि अमुक इलाका मुस्लिम बहुल है और वहां से हिंदू त्यौहार और शोभायात्रा नहीं निकल सकती।"
न्यायालय ने तर्क दिया कि-
यदि आज मुसलमानों की इस याचिका को स्वीकार लिया गया तो आने वाले दिनों में क्या हिंदू बहुल देश में मुसलमान अपने उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से मना पाएंगे? इस तरह के विरोध से धार्मिक लड़ाई झगड़े बढ़ेंगे, दंगे भड़केंगे। निर्दोषों की जान जाएगी और देश का नुकसान होगा।
जो भावना तमिलनाडु के मुस्लिम बहुल मोहल्ले की है वही भावना उन 10 मुहल्लों की भी है जहां पर रामनवमी के जुलूस पर हमले किए गए। किसी मुस्लिम बहुल देश में कोई अन्य समुदाय इस तरह की शर्तें रख सकता है क्या?
किसी ईसाई देश में कोई अन्य संप्रदाय ईसाइयों के पर्वों को रोकने की मांग कर सकता है क्या? क्या यह हिंदुओं के सहिष्णुता की पराकाष्ठा नहीं है! फिर भी अमेरिकी सांसद इलहान ओमर को लगता है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है।
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