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प्रकाश पर्व 2020: जातिवाद, रूढ़िवाद और अंधविश्वास के खिलाफ थे गुरु नानक देव जी

Mon, 30 Nov 2020 10:11 AM IST
Rajesh Verma राजेश वर्मा
Updated Mon, 30 Nov 2020 10:11 AM IST
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Guru Nanak Jayanti 2020 Guru Nanak Dev Ji was against casteism, orthodoxy and superstition
गुरु नानक देव ने समाज को मनुष्यता, प्रेम और करुणा की राह दिखाई। - फोटो : अमर उजाला

गुरु नानक देव जी जब मक्का जा रहे थे तो रास्ते में विश्राम करने के लिए एक मस्जिद में ठहरे, रात को लेटे हुए उनके पांंव मक्का की तरफ हो गए तभी वहां एक मौलवी आया और वह यह सब देखकर क्रोधित हुआ। मौलवी ने गुस्से से गुरु जी को लात मारते हुए कहा कि तुमने परमात्मा के घर की तरफ टांगे करके लेटने की हिम्मत कैसे की। गुरु जी ने उठते हुए विनम्रता से कहा कि "जिधर परमात्मा नहीं है उधर मेरे पांव कर दें" यह सुन कर मौलवी गुरु जी के पांंव में गिर गया।

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गुरु जी ने मलिक भागो की दावत को स्वीकार करने की बजाए गरीब लालोंं की कोदरे की रोटी खुशी-खुशी से खाई। उनका कहना है कि गरीबों को परेशान करके पैसा इकट्ठा करना गरीबों का खून चूसने के बराबर है। गुरु ने मलिक भागो की रोटी से हराम का खून और लालो की रोटी से हक हलाल का दूध निकाला।
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शायद कम लोग ही जानते हैं कि गुरु नानक देव जी के पूर्वज पंजाब के शासक रहे हैं। गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी को माता तृप्ता और पिता मेहता कालू (कल्याण चंद) के घर राए भोई की तलवंडी में हुआ जिसे आजकल ननकाना साहिब कहते हैं।
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कल्याण चंद जी के पिता राए भोई की तलवंडी के कारदार थे बाद में कल्याण चंद जी को यह पदवी मिली। जब गुरु नानक देव जी ने इस धरती पर जन्म लिया तो दुनिया में पाखंड, अंधविश्वास और कट्टरता का बोलबाला था। जाति प्रथा, वर्ण व्यवस्था व छुआछूत चरम पर था। शासक दमनकारी और अन्यायी थे। आम जनता उस समय पीड़ित थी, चारों तरफ अंधेरा व्याप्त था।

Guru Nanak Jayanti 2020 Guru Nanak Dev Ji was against casteism, orthodoxy and superstition
गुरु नानक देव जी प्रथम शख्सियत थे जिन्होंने इस भेदभाव के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। - फोटो : File Photo

गुरु नानक जी बचपन से ही विचारशील, तेज बुद्धि के मालिक और बड़े गंभीर स्वभाव की प्रवृत्ति के थे, जो कुछ भी बोलते सोच समझ कर बोलते थे और उनकी कही हर बात अटल सत्य की तरह होती थी। बचपन में एक बार जब नानक किसी पोथी को पढ़ रहे थे तो पिता ने पूछा की नानक क्या पढ़ रहे हो तो उन्होंने कहा पिता जी मैं 'सप्त सलोकी' गीता पढ़ रहा हूंं। उनकी ऐसी बातें सभी को अचरज में डाल देती थी।

बचपन में जब गुरु नानक जी को जनेऊ धारण करवाया जाने लगा तो उन्होंने भरी सभा में ऐसे जनेऊ की मांग की जो दया से भरपूर हो, सब्र, संयम का हो, जो न कभी टूट सके न जल सके, न कभी मैला हो सके। उनके कुल पुरोहित पंडित हरदयाल ने कहा कि यह जनेऊ धारण करना उच्च जाति की निशानी है और यह लोक प्रलोक में भी रक्षा करता है।

9 साल की छोटी सी आयु में जब गुरु नानक देव जी ने यह कहा की यदि इतने सारे गुण इसमें हैं तो इस जनेऊ को सबसे पहले मेरी बहन नानकी के गले में डाला जाए क्योंकि वह मेरे से पांंच वर्ष बड़े हैं यह सुनकर उस सभा में सन्नाटा छा गया हर कोई यह सुनकर हैरान था, तभी पीछे से आवाजें आई की नहीं-नहीं इसे केवल मर्द ही पहन सकते हैं औरतें नहीं, तो गुरु नानक जी ने सीधे कहा की जो कच्चा धागा औरत-पुरुष व जाति प्रथा में ऊंच-नींच का भेदभाव पैदा करता हो वह उसे कभी धारण नहीं करेंगे।

आज हमारे समाज में धर्म कर्म के मामले में महिलाओं से भेदभाव किया जाता है, गुरु नानक देव जी प्रथम शख्सियत थे जिन्होंने इस भेदभाव के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। औरत-पुरुष के बीच में भेदभाव को मिटाने के लिए गुरु जी ने बताया की जिस भगवान् ने औरत को बनाने में उंच-नींच का भेदभाव नहीं समझा फिर पुरुष को किसने हक दिया ऐसा भेदभाव करने का। स्त्री के स्वाभिमान को जगाने के लिए उन्होंने अपनी वाणी में कहा है

"सो क्यो मंदा आखिए? जितुः जंमहि राजान।।
जिस जातपात से आज भी हमारा समाज जूझ रहा है उसी जातपात व ऊंच-नीच के बंधनों को तोड़ने के लिए गुरु नानक देव जी ने उस समय नीच जाति कही जानी वाली मरासी जाति से संबंधित भाई मरदाने को अपना साथी व भाई माना। गुरु ग्रंथ साहिब में भी समानता की इस वाणी का जिक्र मिलता है

"अविल अल्लाह नूर उपाए, कुदरत दे सब बंदे।।
एक नूर ते सब जग ऊपजया कौन भले कौन मंदे"।।

वे जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने के समर्थक थे। उन्होंने कहा कि जन्म से किसी की जाति ऊंंची या नीची नहीं होती। ऊंच-नीच तो अच्छे और बुरे कर्म के माध्यम से तय होती है। मानव के रूप में सामाजिक समरसता के सबसे बड़े गुरु थे नानक जी।

Guru Nanak Jayanti 2020 Guru Nanak Dev Ji was against casteism, orthodoxy and superstition
गुरु नानक जी ने भ्रम, आडंबर, अंधविश्वासों का भी भरपूर खंडन किया है। - फोटो : अमर उजाला


गुरु नानक देव जी ने लंगर प्रथा शुरू की जहांं गरीब- राजा, ऊंच-नीच सभी लंगर खाते थे। गुरु जी ने गृहस्थ जीवन को सर्वोच्च बताया है। उन्होंने मनुष्य को कमल की तरह कीचड़ से निरलेप रह कर माया का मोह त्याग कर प्रभु भक्ति करने पर जोर दिया।

17 वर्ष की आयु में नानक जी के पिता ने व्यापार करने के लिए 20 रुपये दिए। नानक अपने पड़ोसी मित्र बाला के साथ व्यापार के लिए निकल गए। रास्ते में एक स्थान पर उन्हें भूखे साधु महात्मा मिले नानक ने पिता जी के द्वारा दिए 20 रुपये से राशन खरीद कर उन साधुओं को भिजवा दिया और खुद खाली हाथ घर लौट आए। घर वापसी पर पिता जी से डांट भी खाई लेकिन उन्होंने कहा कि पिता जी आपने ही कहा था की सच्चा सौदा करना है और इससे सच्चा व खरा सौदा और क्या हो सकता है?

गुरु नानक देव जी ने पुजारीवाद व ब्राह्मणवाद का भय लोगों में से दूर किया। इन्होंने मौलवियों, जोगियों, पीरों, काजि़यों, अंहकारी राजाओं और पाखंडियों को मुंह पर खरी खोटी सुनाकर आम लोगों के दिलों दिमाग में से इनका भय दूर किया।

गुरु नानक देव जी की और भी बहुत शिक्षाएं व उपदेश हैं जिन्होंने पूरी मानव जाति की भलाई के लिए कार्य किया। उस समय सभी के लिए गुरु नानक देव जी एक ब्रह्म ज्ञानी, एक महान विचारक व एक रहस्यवादी बन चुके थे।

उन्होंने गृहस्थी जीवन में मेहनत करके खाने पर जोर दिया। गुरु जी ने सेवा के महत्व को बताया, झाडू लगाना, बर्तन धोना, जूतों की सफाई करना, लंगर का प्रबंध करना आदि सेवा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सच्ची सेवा से मन हमेशा घमंड से दूर रहता है। सच्चे मन से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव हो पाती है। इनकी शिक्षाओं ने मनुष्य में स्वाभिमान पैदा किया और बताया की गुलामी की जिंदगी से कभी शांति नहीं मिलती।

गुलाम व्यक्ति तो पिंजरे में कैद एक पक्षी की तरह होता है। गुरु नानक जी ने भ्रम, आडंबर, अंधविश्वासों का भी भरपूर खंडन किया है। मानवता के लिए गुरु नानक ने काम, क्रोध, लोभ मोह, अहम, आदि अवगुणों को त्याग कर सच, संतोष, दया, धर्म व धीरज आदि सदगुणों को अपनाने का संदेश दिया क्योंकि इससे ही इंसान, इंसान के नजदीक आता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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