2 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। गणेश जी के आगमन की तैयारियां जोरो-शोरों पर है। पिछले कई वर्षो से इको फ्रेंडली गणपति काफी चर्चाओं में है। हर कोई अपने घर-मंदिर में इको फ्रेंडली गणपति जी की ही स्थापना कर रहा है। आज हम आपको बताएंगे मध्यप्रदेश के महेश्वर में नर्मदा तट पर विराज रहे इको फ्रेंडली गणपति जी के बारे में। यह गणपति इसलि भी खास हैं क्योंकि ये गोबर के बने हैं और इन्हें गोबर गणेश कहा जाता है।
भारत ही नहीं दुनिया में प्रसिद्ध है गोबर गणेश का ये मंदिर, जिसने किए दर्शन हो गया मालमाल
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मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में नर्मदा नदी के किनारे महेश्वर एक जगह है। महेश्वर नगर के महावीर मार्ग पर एक अति प्राचीन मंदिर है, जिसका नाम है गोबर गणेश।
गोबर गणेश नाम कही न कही अपनी और आकर्षित करता है, इसलिए यह नाम इस कस्बे में आने वालों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। वहां के स्थानीय लोगों के अनुसार इस मन्दिर का प्रताप सबसे बढ़कर है। गोबर गणेश मन्दिर से कोई खाली हाथ नहीं जाता। यहां आने वालो की झोलियां पल में गणपति महाराज भर देते हैं।
गोबर गणेश मंदिर में गणेश की जो प्रतिमा है, वह पूर्ण रूप से इको फ्रेंडली है। शुद्ध रूप से गोबर की बनी हुई है। इस मूर्ति में 70 से 75 फीसदी हिस्सा गोबर है और इसका 20 से 25 फीसदी हिस्सा मिट्टी और दूसरी सामग्री है। मुख्य रूप से गोबर से मूर्ति निर्माण की वजह से ही इस मंदिर का नाम गोबर गणेश पड़ा।
‘श्री गोबर गणेश मंदिर जिर्णोद्धार समिति’ इस मंदिर का देखभाल कर रही है। विद्वानों के अनुसार मिट्टी और गोबर की मूर्ति की पूजा पंचभूतात्मक होती है और गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है इसलिए जो भी इस मंदिर मैं आता है उसे ‘लक्ष्मी तथा ऐश्वर्य’ की प्राप्ति होती है।
भाद्रपक्ष शुक्ल चतुर्थी के दिन इस मंदिर में पूजा अर्चना का विधान है। पूजन के लिए गोबर या मिट्टी से ही गणपति का बिम्ब बनाकर पूजा की जाती है। आज भी यह प्रथा प्रचलित है। शोणभद्र शीला या अन्य सोने चांदी बने बिम्ब को पूजा में नहीं रखते क्योंकि ऐसा माना जाता है की गोबर में लक्ष्मी का वास होता है।
इसी प्रकार गोबर एवं मिट्टी से बनी गणेशप्रतिमाओं को पूजा में ग्रहण करते हैं।
महेश्वर का गोबर गणेश मंदिर पहली नजर में देशभर में स्थित अपनी ही तरह के हजारों गणेश मंदिरों की ही तरह है, लेकिन इस मंदिर में गोबर से निर्मित गणेश और इस मंदिर का गुंबद जो आम हिन्दू मंदिरों की तरह नहीं है, अपनी तरफ आकर्षित जरूर करता है।
एक खास बात और, स्थानीय लोगों की इस मंदिर में आस्था किसी का भी ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर सकती है, इसलिए नर्मदा के किनारे निमाड़ क्षेत्र में कभी जाएं तो महेश्वर का गोबर गणेश मंदिर देखना ना भूलें