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Goa Election 2022: गोवा की नवगठित रिवोल्यूशनरी गोअंस और चुनावी हवा

Fri, 24 Dec 2021 05:47 PM IST
Umesh Chaturvedi उमेश चतुर्वेदी
Updated Fri, 24 Dec 2021 05:47 PM IST
सार

ढाई साल पहले स्थानीय मुद्दों को लेकर गठित रिवोल्यूशनरी गोअंस की आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण रहने जा रही है। याद करने की बात है कि जिस तरह दिल्ली में आम आदमी पार्टी का आधार भ्रष्टाचार विरोधी जनआंदोलन रहा, इसी तरह रिवोल्यूशनरी गोअंस के गठन का भी आधार भी गोवा के ही स्थानीय मुद्दे रहे हैं।

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Goa election 2022 Newly formed Goans Revolutionary party can change the dynamics of upcoming election of goa
गोवा में सबसे महत्वपूर्ण उपस्थिति इस बार ममता बनर्जी की होने जा रही है। - फोटो : ANI

विस्तार

पुर्तगाली शासन से मुक्ति के बाद लंबे अरसे तक केंद्रीय शासन के अधीन रहे गोवा में जिस तरह के हालात हैं, उससे लग रहा है कि यहां अगला विधानसभा चुनाव कुछ अलग होने जा रहा है। इस उम्मीद का आधार है इस समुद्र तटीय राज्य में दो ऐसी पार्टियों की सक्रियता, जिनका यहां पहले वजूद नहीं रहा है।

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वैसे तो आम आदमी पार्टी ने अपने गठन के बाद से ही इस राज्य को अपनी सक्रियता आधार बनाए रखा है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण उपस्थिति इस बार ममता बनर्जी की होने जा रही है। चूंकि राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान मौजूदा नैरेटिव को मुफीद लगने वाली ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की पार्टियों की ही ओर है। इस पूरी कवायद के बीच राष्ट्रीय मीडिया यहां की एक छोटी पार्टी रिवोल्यूशनरी गोवन्स की ओर ध्यान नहीं जा रहा है। 
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दरअसल, यहां ध्यान देने की बात है कि आम आदमी पार्टी हो या तृणमूल कांग्रेस के गठन का आधार भ्रष्टाचार के खात्मे के साथ ही स्थानीय मुद्दों को तरजीह देना रहा है। चाहे तृणमूल कांग्रेस हो या फिर आम आदमी पार्टी, दोनों ने जिन स्थानीय मुद्दों को तरजीह देने की बात की थी, वे मुद्दे या तो बंगाल के थे या फिर दिल्ली के।
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इन अर्थों में देखें तो ढाई साल पहले स्थानीय मुद्दों को लेकर गठित रिवोल्यूशनरी गोअंस की आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण रहने जा रही है। याद करने की बात है कि जिस तरह दिल्ली में आम आदमी पार्टी का आधार भ्रष्टाचार विरोधी जनआंदोलन रहा, इसी तरह रिवोल्यूशनरी गोअंस के गठन का भी आधार भी गोवा के ही स्थानीय मुद्दे रहे हैं।

Goa election 2022 Newly formed Goans Revolutionary party can change the dynamics of upcoming election of goa
आप की ही तर्ज पर ढाई साल पहले रिवोल्यूशनरी गोअंस नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन हुआ। - फोटो : ani

गोवा की स्थिति और राजनीति  

गोवा की आर्थिक बुनियाद पर्यटन है। चूंकि कोरोना काल में लगातार बंदी रही, इसकी वजह से पर्यटन और उस पर आधारित तमाम उद्योग बहुत प्रभावित हुए। जाहिर है कि इसमें बेरोजगारी आनी ही थी। इसके अलावा यहां खनन में होने वाले भ्रष्टाचार के भी मुद्दे उठते रहे हैं।

इन्हीं मुद्दों को लेकर गोवा की सिविल सोसायटी ने आम आदमी पार्टी की सिविल सोसायटी से अलहदा अपनी आवाज बुलंद की और ढाई साल पहले रिवोल्यूशनरी गोअंस नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन किया। चूंकि यह पार्टी जन आंदोलन से निकली है तो इसलिए इसे भी उम्मीद है कि दिल्ली में जिस तरह आम आदमी पार्टी को सफलता मिली, उसी तरह वह भी यहां सफलता हासिल कर सकती है। रिवोल्यूशनरी गोअंस के उदय के बाद आम आदमी पार्टी की संभावनाएं कमजोर हुई हैं, क्योंकि आदमी पार्टी और रिवोल्यूशनरी गोअंस-दोनों का बुनियादी सैद्धांतिक आधार एक ही है। ऐसे में सवाल यह है कि एक ही मुद्दे पर गठित दो पार्टियों के बीच चयन का सवाल आएगा तो गोवा के लोग बाहरी को क्यों चुनना पसंद करेंगे?

यही वह सवाल है, जिससे लगता है कि भाजपा विरोधी वोटों का बड़ा हिस्सा रिवोल्यूशनरी गोअंस के हाथ लग सकता है। रिवोल्यूशनरी गोअंस ने राजनीतिक दल के तौर पर पंजीकरण के लिए फरवरी 2021 में आवेदन दिया था, लेकिन अभी पंजीकरण नहीं हो पाया है। इसलिए रिवोल्यूशनरी गोअंस के संस्थापक और प्रमुख मनोज परब का कहना है कि वे गोवा सुराज पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे। पार्टी राज्य की सभी चालीस सीटों पर लड़ने की तैयारी में है। 

Goa election 2022 Newly formed Goans Revolutionary party can change the dynamics of upcoming election of goa
भाजपा का साथ देने वाली गोवा सु-राज पार्टी भी उसे आंखें दिखाने लगी हैं। दिलचस्प यह है कि इसी गोवा सु-राज पार्टी के बैनर तले रिवोल्यूशनरी गोअंस चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। - फोटो : amar ujala

पिछला चुनावी हिसाब-किताब 

पिछले यानी 2017 के विधानसभा चुनाव में राज्य की चालीस में से 17 सीटों पर जीत दर्ज करने और सबसे बड़ी पार्टी के बनने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई थी। माना गया कि कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी जीते हुए विधायकों को समझाने में सफल रही कि उनके और उनकी विधानसभा सीटों के हितों की रक्षा उनकी ही शर्तों पर वह करेगी। नतीजा महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी के तीन विधायकों के समर्थन से बीजेपी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रही।  लेकिन जैसे ही चुनाव नजदीक आया, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी यानी एमजीपी ने भाजपा सरकार से रिश्ता तोड़ लिया और तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है।

इसी तरह भाजपा का साथ देने वाली गोवा सु-राज पार्टी भी उसे आंखें दिखाने लगी हैं। दिलचस्प यह है कि इसी गोवा सु-राज पार्टी के बैनर तले रिवोल्यूशनरी गोअंस चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस भाजपा विरोधी कांग्रेसी और राष्ट्रवादी कांग्रेसी मतदाता आधार को हड़पने की कोशिश में प्राणपण से जुटी हुई है।

पार्टी अपने रणनीतिकार प्रशांत किशोर की अगुआई में आक्रामक रणनीति के तहत यहां के एक मात्र एनसीपी विधायक के साथ ही कांग्रेस के दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फलेरियो को शामिल कर लिया है। इस पूरी लड़ाई में एक तथ्य स्पष्ट है कि सत्ताधारी भाजपा विरोधी वोट बंटे हुए नजर आ रहे हैं। अब तक के हालात के मुताबिक अपने विरोधी वोटरों के विभाजन के चलते भाजपा फायदे में रह सकती है। लेकिन अगर स्थानीयतावाद की बयार को तवज्जो मिली तो रिवोल्यूशनरी गोअंस के पक्ष में चमत्कारिक नतीजे आ सकते हैं...


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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