फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   go niazi go back in pakistan pm imran khan politics and history

आखिर क्यों भारत ने इमरान खान को उनके ‘नियाजी’ कबीले की याद दिलाई

Tue, 01 Oct 2019 07:34 PM IST
Sanjiv Pandey संजीव पांडेय
Updated Tue, 01 Oct 2019 07:34 PM IST
विज्ञापन
go niazi go back in pakistan pm imran khan politics and history
भारत ने इमरान खान को नियाजी संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान को 1971 नहीं भूलना चाहिए - फोटो : Facebook

संयुक्त राष्ट्र महासभा में इमरान खान के उग्र भाषण का जवाब देते हुए भारत ने एक बार इमरान खान के नाम के साथ उनका गोत्र को भी लगा दिया। भारत की प्रथम विदेश सचिव विदिशा मैत्रा जब इमरान खान के आरोपों का जवाब दे रही थे उन्होंने एक बार इमरान खान नियाजी कह इमरान खान लिया साथ ही बांग्लादेश की स्वंतत्रता के युद के समय के खलनायक पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी का जिक्र किया।

विज्ञापन


भारत ने इमरान खान को नियाजी संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान को 1971 नहीं भूलना चाहिए जब बांग्लादेश युद्ध में जनरल नियाजी ने पने ही नागरिकों पर जुल्म किया था। सवाल यही है कि आखिर क्यों भारत ने 1971 युद के बहाने संयुक्त राष्ट्र में इमरान खान के कबीले की चर्चा की अप्रत्यक्ष रूप से बताया कि इमरान खान उसी नियाजी कबीले से संबंधित है जिस कबीले के अब्दुल्ला खान नियाजी ने बंगाली मुसलमानों पर जुल्म किया था।  

विज्ञापन

go niazi go back in pakistan pm imran khan politics and history
सूर’ और ‘लोदी’ दोनों कबीले पश्तूनों के उसी संघ से संबंधित है जिसमें इमरान खान का ‘नियाजी’ कबीला संबंधित है। - फोटो : ट्विटर

क्या है इमरान खान का कबीलाई अभिमान
पिछले कुछ समय से इमरान खान लगातार कश्मीर के मुद्दे को अंतराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहे हैं। कश्मीर के मुद्दों को वे अंतराष्ट्रीय मंचों पर भी इस्लाम से जोड़ते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में भी वे कश्मीर को लेकर आक्रमक रहे। युद्ध की धमकी दे डाली। क्या इस युद्ध की धमकी के पीछे उनका कबिलाई अभियान काम कर रहा है?  क्या इमरान खान को यह घमंड है कि वे भी उसी पश्तून जनजाति से संबंधित है जिसके दो वंशों ने भारत पर राज किया? 

दरअसल, इमरान खान की मानसिकता भी पाकिस्तान में पूर्व में शासन करने वाले शासकवर्ग की मानसिकता से मेल खाती है। पाकिस्तानी शासक वर्ग के दिमाग लंबे समय से यही बैठा है कि भारत पर लंबे समय तक इस्लामिक वंशों का शासन रहा। इमरान खान के दिमाग में भी यह है कि पश्तूनों के दो प्रमुख कबीले ‘सूर’ और ‘लोदी’ ने भारत पर शासन किया।

‘सूर’ और ‘लोदी’ दोनों कबीले पश्तूनों के उसी संघ से संबंधित है जिसमें इमरान खान का ‘नियाजी’ कबीला संबंधित है। भारत में दो पश्तून वंशों ने शासन किया। इसमें लोदी और सूर वंश शामिल है। इब्राहिम लोदी और शेरशाह सूरी पश्तूनों के ‘बिट्टानी संघ’ के ‘लोदी’ औऱ ‘सूर’ कबीले से संबंधित थे। इमरान खान का ‘नियाजी’ क्लैन भी ‘बिट्टानी जनजातीय संघ’ का हिस्सा है।

गौरतलब कि पश्तून जनजाति के चार प्रमुख संघ है जिसके अंदर लगभग 300 कबीले हैं। इन्हीं चार संघों में बिट्टानी जनजातीय संघ भी शामिल है। एक और अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली पश्तूनों के सरबानी जनजातीय संघ के दुर्रानी कबीले से संबंधित थे जिसने भारत पर हमला किया था।

go niazi go back in pakistan pm imran khan politics and history
इमरान खान का पूरा नाम इमरान खान नियाजी है। इमरान खान नियाजी लंबे समय से अपने नाम के पीछे नियाजी नहीं लगाते हैं। - फोटो : File

संयुक्त राष्ट्र में इमरान खान के कबीले की याद क्यों दिलायी भारत ने
इमरान खान का पूरा नाम इमरान खान नियाजी है। इमरान खान नियाजी लंबे समय से अपने नाम के पीछे नियाजी नहीं लगाते हैं। उसका कारण पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी है।

लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी बांग्लादेश युद्ध के खलनायक थे। नियाजी के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना भारत से पूर्वी पाकिस्तान के फ्रंट पर हारी थी। भारतीय सेना के सामने नियाजी ने हजारों पाकिस्तानी सैनिकों के सरेंडर किया था। भारत में वे युद्ध बंदी के तौर पर रहे। नियाजी को भारत ने अप्रैल 1975 में रिहा किया।  पाकिस्तान में नियाजी जस्टिस हमुदूर रहमान युद्ध जांच आयोग के सामने पेश हुए। उन्होंने आयोग के सामने स्वीकार किया कि पूर्वी पाकिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन पाकिस्तानी सेना ने किया था।

गौरतलब है कि  पाकिस्तानी सेना मे पंजाबियों के 60 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद टॉप पदों पर कई पश्तून पहुंचे हैं। इस कारण लगातार इमरान खान के अंदर पश्तून प्राइड रहा है, लेकिन ये पश्तून प्राइड ही इमरान खान को परेशान इसलिए करता है कि भारत के हाथों पाकिस्तानी पश्तून लीडरशीप की ही हार हुई।

पाकिस्तान के कमांडर इन चीफ और राष्ट्रपति अयूब खान पश्तून थे। उनक समय में भारत ने 1965 का युद्ध जीता। 1971 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति याहिया खान पश्तून थे। पूर्वी सीमा पर भारतीय सेना से लड़ाई लड़ रहे पाकिस्तानी सेना की कमांड भी पश्तून लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी कर रहे थे।

बार-बार इस्लाम को कश्मीर से क्यों जोड़ रहे है इमरान खान
इमरान खान लगातार कश्मीर की चर्चा करते हुए दुनिया भर के मुसलमानों को इसके साथ जोड़ते हैं। और इस्लामिक मुल्कों से लगातार समर्थन की अपील कर रहे हैं। हालांकि इमरान खान को अभी तक अंतराष्ट्रीय स्तर पर इसमें खास सफलता नहीं मिली है।

दरअसल, इमरान की विफलता के कई कारण है। हालांकि मलेशिया और तुर्की जैसे देश कश्मीर मसले पर इमरान खान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। लेकिन इमरान खान को दुख इस बात का है कि इस्लामिक कारणों के लिए दुनिया भर में काम करने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी चुप बैठे हैं।

ईऱान से भी इस मसले पर अभी तक कुछ हासिल पाकिस्तान नहीं कर पाया है। खुलकर कश्मीर मुद्दे पर चीन जरूर पाकिस्तान के साथ है जिसके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारी आर्थिक हित है।

एक तरह से देखा जाए तो कई कारणों से पाकिस्तान को अंतराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर को लेकर समर्थन नहीं मिला है। दुनिया के दो बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भारत के तेल बाजार को खोना नहीं चाहते हैं। उनके आर्थिक हित भारत के साथ हैं। वहीं सऊदी अरब की तेल कंपनी ने मुकेश अंबानी की रिलांयस इंडस्ट्री में निवेश का फैसला लिया है।

जामनगर रिफाइनरी में अरमाको अपनी हिस्सेदारी डाल रहा है। वहीं सऊदी अरब पाकिस्तान से इस बात से भी नाराज है कि यमन में हाउथी विद्रोहियों पर हो रही सैन्य कार्रवाई में जब सऊदी अरब ने पाकिस्तान सेना से सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई में शामिल होने के लिए कहा तो पाकिस्तान पीछे हट गया। हालांकि सऊदी अऱब समय-समय पर पाकिस्तान को आर्थिक संकटों से निकालता रहा है।

विज्ञापन

go niazi go back in pakistan pm imran khan politics and history
शाहिद आफरीदी-इमरान खान - फोटो : social Media

कश्मीर के मुसलमानों की चिंता, उइगुरों पर होने वाले जुल्म पर चुप्पी
पाकिस्तानी शासक वर्ग का पीक एंड चूज की पॉलिटिक्स को लेकर तमाम सवाल भी उठ रहे हैं। सवाल यह है कि अगर कश्मीर में मुसलमानों से जुल्म हो रहा है, तो पश्चिम चीन के उइगुर क्या है?  क्या उइगुर मुस्लिम नहीं है? उनके साथ हो रहे जुल्म पर पाकिस्तान क्यों चुप है? 

पाकिस्तान ने चीन के खिलाफ एक भी बयान आज तक क्यों नहीं जारी किया? यमन मे हाउथी विद्रोहियों पर लगातार सऊदी अरब हमला कर रहा है। यमन के युद्ध में अबतक एक लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। मरने वाले सारे मुसलमान हैं। फिर भी पाकिस्तान क्यों चुप हैं? 

अब बात बांग्लादेश की। पाकिस्तान आजाद हुआ तो बंगाल का मुस्लिम बहुल हिस्सा पाकिस्तान के पास गया। इसे पूर्वी पाकिस्तान कहा गया। लेकिन आजादी के बाद ही बंगालियों पर जुल्म शुरू हो गया। उनकी भाषा को गाली दी गई। उन्हें गंदे नस्ल का कहा गया।

आजादी के बाद पाकिस्तानी सेना में सिर्फ 800 बंगाली थे। उन्हें सेना में भरती करने के वक्त जलील किया जाता था। पाकिस्तानी सेना के बडे़ अधिकारी बंगालियों को सेना में भरती नहीं किए जाने का मुख्य कारण उन्हें कमजोर शरीर और छोटे कद का होना बताते थे।

बांग्लादेश में जो जुल्म पाकिस्तानी सेना ने किया उसे सारी दुनिया ने देखा। जुल्म के शिकार ज्यादातर बंगाली मुसलमान हुए। वैसे में जब अब पाकिस्तान कश्मीर को इस्लाम से जोड़कर बात कर रहा तो बांग्लादेश का भी समर्थन पाकिस्तान के बजाए भारत के साथ है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed