Glenn Maxwell 201*: दर्द से कराहते-लड़खड़ाते मैक्सवेल का कारनामा सभी के लिए मिसाल, हीरो ऐसे ही तो बनते हैं..
बीते दिन जिस-जिस ने ऑस्ट्रेलिया-अफगानिस्तान का मैच देखा वह आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में जरूर बताएगा। इस मैच की कहानी और मैक्सवेल के जज्बे के जरिए उन्हें प्रेरित करने की कोशिश करेगा। जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए मैक्सवेल जैसे हीरो की कहानी की ही तो जरूरत होती है।
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भारत में हो रहे एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप में ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने मंगलवार को अफगानिस्तान के खिलाफ जो पारी खेली, वह अनोखी थी। उस नाबाद 201 के रन की पारी को वर्षों तक याद रखा जाएगा। 292 रन का पीछा करते हुए 100 रन पर सात विकेट गंवा चुकी ऑस्ट्रेलियाई टीम को जीत दिलाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह कर के दिखाया है ग्लेन मैक्सवेल ने। चोटिल होने के बावजूद अफगानिस्तान के गेदबाजों के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे। दर्द से कराहते रहे। लड़खड़ाते रहे। जरूरत पड़ी तो धीरे-धीरे मानों रेंगते हुए रन भी दौड़ते रहे, लेकिन हार नहीं मानी और नतीजा हम सभी के सामने है। आज हर किसी के जुबान पर मैक्सवेल का नाम है। हीरो ऐसे ही तो बनते हैं।
बीते दिन जिस-जिस ने ऑस्ट्रेलिया-अफगानिस्तान का मैच देखा वह आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में जरूर बताएगा। इस मैच की कहानी और मैक्सवेल के जज्बे के जरिए उन्हें प्रेरित करने की कोशिश करेगा। जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए मैक्सवेल जैसे हीरो की कहानी की ही तो जरूरत होती है। यह कुछ वैसा ही था, जैसा कपिल देव ने 1983 के विश्व कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ किया था। उस वक्त 17 रन पर पांच विकेट गंवा चुकी टीम इंडिया के लिए कपिल देव संकटमोचक बने थे। उनकी 175 नाबाद पारी ने हार की कगार पर खड़ी टीम को विश्व चैंपियन बनने का भरोसा दिलाया था। हमारे परिजन जो उस वक्त शायद हमारी उम्र के या हमसे छोटे रहे होंगे, हमें उनकी कहानियां सुनाकर ही तो प्रेरित करते हैं। हम आने वाली पीढ़ी को जो किस्से सुनाएंगे, उसमें मैक्सवेल की यह पारी भी होगी।
सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, आम आदमी भी इससे बहुत कुछ सीख सकता है। हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में कई अड़चनें आती हैं। कई हम आसानी से स्वीकार कर लेते हैं और कई बार उसका डटकर सामना करते हैं। ऐसे में जो लोग हार मानने को मजबूर हो जाते हैं, उनके लिए मैक्सवेल का करनामा बूस्टर जैसा हो सकता है। बस जरूरत है तो उसे आत्मसात करने की।
मैक्सवेल की नाबाद 201 रन की पारी ने उनकी छवि ही बदल कर रख दिया है। अब तक कहा जाता था कि मैक्सवेल जिस मैच में चलते हैं, उसे जिताकर ही दम लेते हैं, लेकिन अब जब तक मैक्सवेल क्रीज पर रहेंगे, उनके देश और उनके फैंस की जीत की उम्मीद बरकरार रहेगी। हमारी भारतीय टीम में पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ियों ने भी तो कुछ ऐसा ही किया था। अभी विराट कोहली भी तो यही कर रहे हैं। मैक्सवेल अब तक ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करने वाले विध्वंसक बल्लेबाज के तौर पर जाने जाते थे, पर अब उनके नाम के साथ करिश्माई बल्लेबाज का तमगा भी जुड़ जाएगा। सचिन, धोनी और कोहली जैसे खिलाड़ियों की फेहरिश्त में उनका नाम भी लिया जाएगा।
मैक्सवेल की पारी ने कई पुराने ऐसे किस्सों को ताजा कर दिया है, जिसे आज भी याद किया जाता है। मेरे अब तक के जीवनकाल में कुछ ही ऐसी पारियां हैं, जिनकी यादें आज भी जहन में हैं। यहां हम 2011 के धोनी के उस विश्व विजयी छक्के की बात नहीं करेंगे, जिसने पूरे भारत को जश्न मनाने पर मजबूर कर दिया था। हम याद करेंगे दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज ग्रेम स्मिथ की उस पारी को, जहां उन्होंने टूटे हुए हाथ के साथ ऑस्टेलियाई गेंदबाजों की आग उगलती गेंदों का सामना किया था। वाकया है 2009 का, जब अफ्रीकी टीम ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रही थी। सिडनी में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच अफ्रीका हार की कगार पर थी। उनके कप्तान के बाएं हाथ में फ्रैक्चर था, वे रिटायर्ड हर्ट होकर वापस पवेलियन जा चुके थे, लेकिन जब टीम को उनके देश को उनकी जरूरत पड़ी तो वह मैदान में उतरे। चोट के बावजूद मिचेल जॉनसन और पीटर सिडल का सामना किया। स्मिथ अपनी टीम को जीत तो नहीं दिला सके, लेकिन उनका दृढ़ संकल्प उनका देश के प्रति समर्पण का जज्बा आज भी जेहन में है।
कुछ ऐसा ही जज्बा और समर्पण कल मैक्सवेल ने दिखाया। उन्होंने अपनी ताकत पर भरोसा रखा। ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से ही तो उनकी पहचान बनी थी। उन्होंने इस पर भरोसा रखा और अफगानी गेंदबाजों की जमकर क्लास ली। उन्होंने पैट कमिंस के साथ 202 रन की पार्टनरशिप की। मैक्सवेल के करिश्मे का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस 202 रन की साझेदारी में 179 रन मैक्सवेल के थे। मैक्सवेल 21 चौके और 10 छक्के जड़े। इसके मुकाबले अफगानिस्तान की पूरी टीम ने 16 चौके और नौ छक्के लगाए। ऐसे ही मैक्सवेल ने लगभग हार चुकी बाजी को जीत में बदला और अपनी टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया।