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दूसरा पहलू: पुराने कैमरों में सुकून ढूंढता जेन जी, डिजिटल दौर में एनालॉग की वापसी
Thu, 09 Jul 2026 07:28 AM IST
Devesh Tripathi
रोटेम रोजेंटाल
रोटेम रोजेंटाल
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 09 Jul 2026 07:28 AM IST
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विस्तार
कुछ समय पहले तक माना जाता था कि एनालॉग फोटोग्राफी (जिसमें फोटोग्राफिक फिल्म और केमिकल प्रोसेसिंग का इस्तेमाल होता है) का दौर अब समाप्त हो चुका है। डिजिटल कैमरों और स्मार्टफोन ने लगभग पूरी दुनिया पर कब्जा कर लिया था। कभी इस क्षेत्र की पहचान रही कोडक व पोलरॉइड जैसी कंपनियां सिमट चुकी थीं, विश्वविद्यालयों के डार्करूम बंद हो रहे थे और उनकी जगह डिजिटल प्रयोगशालाएं ले रही थीं। लोगों के लिए एनालॉग फोटोग्राफी केवल सोशल मीडिया तक सीमित रह गई थी। पर, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।दिलचस्प बात यह है कि जेनरेशन जेड उसी दुनिया की ओर लौट रही है, जिसे पिछली पीढ़ी पुरानी मानकर छोड़ चुकी थी। 2025 में दुनियाभर के सक्रिय फिल्म कैमरा उपयोगकर्ताओं में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी 18 से 30 वर्ष के युवाओं की रही। डिस्पोजेबल कैमरों की बिक्री भी लगातार बढ़ रही है। यह सिर्फ एक फैशन ट्रेंड नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की प्रतिक्रिया है, जिसका बचपन मोबाइल स्क्रीन, ऑनलाइन क्लास, जूम मीटिंग और टिकटॉक जैसी डिजिटल दुनिया के बीच बीता। अब छात्र डिजिटल दुनिया से आगे बढ़कर वास्तविक अनुभवों की तलाश कर रहे हैं।
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हमेशा खुद को लोगों को जोड़ने वाला माध्यम बताते रहे हैं, पर उनका वास्तविक आधार एक ऐसा बिजनेस मॉडल है, जो लोगों का अधिक से अधिक समय स्क्रीन पर बनाए रखने पर टिका है। कई शोधों में ज्यादातर किशोरों ने भी स्वीकार किया कि वे प्रतिदिन कम से कम चार घंटे सोशल मीडिया पर बिताते ही हैं। इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देता है। यहीं से फिल्म फोटोग्राफी का आकर्षण शुरू होता है। कैमरे में सावधानी से फिल्म की रील डालना, सीमित फ्रेम होने के कारण हर तस्वीर सोच-समझकर लेना और फिर कई दिनों बाद बनकर आईं तस्वीरों को पहली बार हाथ में पकड़ना-यह पूरी प्रक्रिया धैर्य, उत्सुकता और वास्तविक आनंद से भरी होती है। यही कारण है कि फिल्म फोटोग्राफी आज फिर एक जीवंत समुदाय के रूप में उभर रही है।
फिल्म की रीलों से लैस जेनरेशन जेड के अधिक से अधिक युवा एल्गोरिदम द्वारा नियंत्रित डिजिटल फीड से दूरी बनाकर ऐसे जीवन की ओर बढ़ रहे हैं, जो अधिक सोच-समझकर जिया गया, अधिक व्यक्तिगत, अधिक वास्तविक व अधिक स्पर्शनीय महसूस होता है। -द कन्वर्सेशन