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गंगा दशहरा और मरती हुई गंगा, किस नैतिक अधिकार से तुम्हें नमन और बाबा भगीरथ को श्रद्धांजलि कहें?

Wed, 12 Jun 2019 01:00 PM IST
Dhruva Gupt ध्रुव गुप्त
Updated Wed, 12 Jun 2019 01:00 PM IST
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ganga dussehra 2019 ganga river pollution reason and solutions
आखिर कब दूर होगा गंगा का प्रदूषण? कब बदलेगी पर्यावरण को लेकर समाज की सोच? - फोटो : Rohit Jha

आज गंगा दशहरा है। हमारे पूर्वज राजा भगीरथ की वर्षों की तपस्या के बाद गंगा के स्वर्ग यानी हिमालय से पृथ्वी पर अवतरण का दिन। राजा भगीरथ एक लोक कल्याणकारी शासक थे। उन्होंने संभवतः सूखे और पानी की कमी से मरती अपनी प्रजा के कल्याण के लिए हिमालय से गंगा के समतल भूमि पर आने का मार्ग खोला और प्रशस्त किया होगा। इस विराट कार्य में कितना जनबल, अभियांत्रिक कौशल और कितना समय लगा होगा, इसकी कल्पना भी हैरान करती है। गंगा तब से वर्तमान उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार और बंगाल की जीवनरेखा बनी हुई है।

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इसे आदर देने लिए उसे देवी, मां दर्ज़ा दिया गया और उसके पानी को अमृत कहा गया। उत्तर भारत के सभी बड़े तीर्थ गंगा-तट पर बनाए गए। दुर्भाग्य यह कि अपने पूर्वजों की यह देन हम संभाल कर नहीं रख पाए। गंगा पर बने दर्ज़नों डैम और बांधों, दृष्टिहीन औद्योगीकरण,शहरी सभ्यता की अंधी दौड़ ने आज हमारी पवित्र गंगा को दुनिया की सबसे प्रदूषित नदियों में एक बना दिया है। गंगा में हर रोज हजारों हजारों टन पूजन सामग्री, कारखानों का जहरीला कचरा, सैकड़ों नगरों का मल-मूत्र और हजारों अधजली लाशें प्रवाहित होती हैं।
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गंगा का पानी अब न पीने के लायक है, न नहाने के लायक - फोटो : अमर उजाला

गंगा का पानी अब न पीने के लायक है, न नहाने के लायक और न खेतों की सिंचाई के उपयुक्त ! बहुत कम लोगों को पता है कि मोक्ष की कामना लिए प्रयागराज या बनारस की जिस गंगा में हर साल करोड़ों लोग स्नान करते हैं, वह वस्तुतः गंगा है ही नहीं। गंगोत्री से नरोरा के बीच बने दर्ज़नों डैम, बांधों और नहरों में बंद और विभाजित गंगा बुलंदशहर तक आते-आते दम तोड़ देती है।

बुलंदशहर के बाद आप जिसे गंगा कहते हैं, उसमें गंगोत्री से आनेवाली पवित्र धारा का पानी नाम मात्र का भी शायद नहीं है। उसमें बरसाती और सहायक नदियों का जल, शहरों के हजारों नालों से गिरने वाला गंदा पानी, मल-मूत्र और रासायनिक कचरा भर है। गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने के बावज़ूद देश की कांग्रेस या भाजपा सरकार ने गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए कभी कुछ नहीं किया और तो और गंगा के प्रति अपनी तमाम आस्था के बावजूद हमने भी तो उसे गंदा ही किया है।

हम लज्जित हैं मां गंगे।आज गंगा दशहरा पर किस नैतिक अधिकार से तुम्हे नमन और बाबा भगीरथ को श्रद्धांजलि कहें?
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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