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साधारण में ही छिपी हैं असाधारण घटनाएं: जीवन का चमत्कार हमारे आसपास ही है

Mon, 08 Jun 2026 07:41 AM IST
नितिन गौतम पाब्लो नेरुदा, अमर उजाला
पाब्लो नेरुदा, अमर उजाला Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 08 Jun 2026 07:41 AM IST
सार

हम असाधारण बनने की इतनी तीव्र इच्छा रखते हैं कि साधारण होने की सुंदरता को खो देते हैं। हम दूर के सितारों को निहारते हैं और अपने हाथों में रखे दीपक को भूल जाते हैं।

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Extraordinary things hide in ordinary things philosophy
ब्लॉग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैंने अपने जीवन में समुद्र को देखा है, पहाड़ों को देखा है, युद्धों की आग देखी है, प्रेम की ऊंचाइयां और विरह की गहराइयां भी देखी हैं। मैंने राजधानियों की भव्य इमारतों में वक्त गुजारा है और गांवों की उन धूल भरी गलियों में भी चला हूं, जहां लोगों के पास कुछ भी नहीं था। इन सब अनुभवों के बाद यदि मुझसे पूछा जाए कि जीवन का सबसे बड़ा रहस्य कहां छिपा है, तो मैं किसी महल, सिंहासन, किसी युद्ध-विजय या किसी महान पुस्तक की ओर संकेत नहीं करूंगा। तब मेरा इशारा शायद एक रोटी, एक प्याज, किसी बूढ़े मछुआरे के जाल, या उस स्त्री की ओर होगा, जो हर सुबह अपने घर के सामने झाड़ू लगाती है।
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मैंने पाया है कि जीवन की बड़ी सच्चाइयां अक्सर उन्हीं चीजों में छिपी होती हैं, जिन्हें हम इतना साधारण मान लेते हैं कि उनकी तरफ देखना ही बंद कर देते हैं। हम आकाश में असाधारण घटनाओं की तलाश करते हैं, जबकि हर सुबह उगता हुआ सूरज एक ऐसा चमत्कार है, जो अरबों वर्षों से बिना कुछ कहे हमारे सामने आ रहा है। एक बार मैंने टमाटर पर कविता लिखी थी। कुछ लोगों ने पूछा कि इतनी साधारण वस्तु पर कविता क्यों लिखी आपने? मैं मुस्कुराया। मुझे लगा, वे टमाटर को केवल एक सब्जी समझते हैं। मैं टमाटर में धरती का लाल हृदय देखता था। मैं उसमें सूर्य का रंग, वर्षा का स्पर्श, किसान के श्रम व प्रकृति की उदारता को देखता था।
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एक साधारण टमाटर मेरे लिए पूरी पृथ्वी की कहानी था। यही बात जीवन के साथ है। एक मां जब अपने बच्चे के माथे पर हाथ फेरती है, तो वह केवल स्पर्श नहीं होता। उसमें हजारों वर्षों की मानव करुणा का इतिहास छिपा होता है। एक बूढ़ा व्यक्ति जब बरामदे में बैठ कर चुपचाप आकाश को देखता है, तो उसकी चुप्पी में अक्सर उन शब्दों से अधिक अर्थ होते हैं, जिन्हें पूरी दुनिया मिलकर भी नहीं कह सकती। लेकिन हम जल्दी में हैं। हम असाधारण बनने की इतनी तीव्र इच्छा रखते हैं कि साधारण होने की सुंदरता को खो देते हैं। हम दूर के सितारों को निहारते हैं और अपने हाथों में रखे दीपक को भूल जाते हैं। हम भविष्य के सपनों में इतने डूब जाते हैं कि वर्तमान के चमत्कारों को पहचान नहीं पाते। मैं मानता हूं कि संसार की हर वस्तु अपने भीतर एक कविता छिपाए बैठी है। लेकिन हमारी आंखें उस कविता को पढ़ना भूल गई हैं।
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साधारण चीजों को नई नजर से देखना सीखो। जब तुम रोटी खाओ, तो केवल भोजन मत देखो, उसमें धरती, वर्षा, सूर्य और किसान की कड़ी मेहनत भी देखो। जब तुम किसी से प्रेम करो, तो केवल व्यक्ति को मत देखो, उस प्रेम में मानवता की पूरी विरासत को भी देखो। जब तुम एक दिन जियो, तो उसे कैलेंडर का एक पन्ना मत समझो, उसे ब्रह्मांड का दिया गया एक अनोखा उपहार समझो। तब तुम्हें धीरे-धीरे समझ आने लगेगा कि असाधारण कहीं दूर नहीं है। वह यहीं है- तुम्हारी सांसों में, स्मृतियों में, रसोई में रखी रोटी में। और उस जीवन में, जिसे तुम शायद अभी तक केवल साधारण समझते आए हो।


नए सिरे से देखें
जीवन का सबसे बड़ा रहस्य किसी असाधारण उपलब्धि में नहीं, बल्कि उन साधारण क्षणों में छिपा है, जिन्हें हम अनदेखा कर देते हैं। रोटी में धरती का श्रम, प्रेम में मानवता की विरासत, और हर नए दिन में ब्रह्मांड का उपहार समाया है। जब हम साधारण को नई दृष्टि से देखना सीखते हैं, तब समझ आता है कि चमत्कार कहीं दूर नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन में उपस्थित है।
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