Exit Poll 2021: क्या बंगाल में फेल हो गई बीजेपी?
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क्या सबसे हाई प्रोफाइल विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने सत्ता के दावेदार के तौर पर उभरी भाजपा के धार्मिक ध्रुवीकरण और जातिगत पहचान की राजनीति को नकार दिया है। एग्जिट पोल के नतीजे तो कम से कम इसी बात का इशारा करते हैं। अब तक जिन तीन ऐसे सर्वेक्षणों के नतीजे आए हैं, उनमें से दो के मुताबिक राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार ही सत्ता में लौटती नजर आ रही है।
हालांकि एग्जिट पोल के नतीजों को अंतिम नहीं माना जाता है और इसमें गलतियों की गुंजाइश से इंकार नहीं किया जा सकता। बीते साल बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भी एग्जिट पोल के नतीजे हकीकत से कोसों दूर रहे थे।
लेकिन अगर इन एक्जिट पोल के नतीजों के हकीकत के करीब मानें तो दो सौ सीटें जीत कर सत्ता हासिल करने का सपना बीजेपी और खासकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों से निकलता लग रहा है। हालांकि पार्टी के प्रदेश नेता इन नतीजों को खास तवज्जो देने को तैयार नहीं हैं।
उनका दावा है कि दो मई को जब नतीजे सामने आएंगे तो पार्टी को 185 से दो सौ के बीच सीटें मिलेंगी। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिला प्रमुख अणुब्रत मंडल ने दावा किया कि इस बार उनकी पार्टी 220 से 230 सीटें जीतेगी।
अब एग्जिट पोल के नतीजों की बात। एबीपी-सी वोटर सर्वेक्षण में तृणमूल को 152 से 164, भाजपा को 109 से 121 और संयुक्त मोर्चा को 14 से 25 सीटें मिलने की बात कही गई है। इसके मुताबिक तृणमूल को 42.01 फीसदी, भाजपा को 39 फीसदी और संयुक्त मोर्चा को 15.4 फीसदी वोट मिलेंगे।
इसी तरह टाइम्स-नाऊ और सी-वोटर के सर्वेक्षण में तृणमूल को 158, भाजपा को 115 और संयुक्त मोर्चा को 19 सीटें दी गई हैं। इन दोनों सर्वेक्षणों के नतीजों से साफ है कि बंगाल की सत्ता का सपना भाजपा के हाथों से फिसल रहा है।
रिपब्लिक बांग्ला और सीएनएक्स का एक्जिट पोल ही ऐसा है, जिसमें भाजपा को सत्ता के करीब पहुंचने का दावा किया गया है। इसमें तृणमूल कांग्रेस को 128 से 138 और भाजपा को 138 से 148 सीटें दी गई हैं। इसके मुताबिक संयुक्त मोर्चा को 11 से 19 सीटें तक मिल सकती हैं. हालांकि इसमें बी भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने का दावा नहीं किया गया है।
इन नतीजों से साफ है कि दो सौ से ज्यादा सीटें जीतने का भाजपा का दावा हकीकत से दूर नजर आ रहा है। साथ ही यह भी साफ हो गया है कि धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण और जातिगत कार्ड खेलने की उसकी रणनीति कामयाब नहीं रही है। इसके अलावा ममता बनर्जी और उनके भतीजे के खिलाफ बड़े पैमाने पर लगे आरोपों का भी वोटरों पर खास असर नहीं पड़ा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह नतीजे अंतिम भले नहीं हों, लेकिन उसका संकेत तो देते ही हैं। राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, 'एग्जिट पोल अंतिम सत्य नहीं होता, लेकिन कई बार इससे भावी नतीजों के संकेत मिल जाते हैं।
भले यह आंकड़े सटीक नहीं साबित हों, यह बात तो तय है कि दो सौ के पार जाने का भाजपा का सपना धुंधलाता नजर आ रहा है।' उनका कहना है कि भाजपा ने बंगाल की सत्ता पर कब्जा करने के लिए जो रणनीति तैयार की थी, वह कामयाब नहीं हो सकी है।
बंगाल में चुनाव पर कभी जाति और धर्म की राजनीति हावी नहीं रही है। इस बार भी वोटरों ने इन मुद्दों को नकार दिया है। इनके अलावा आखिरी दो-तीन चरणों में ममता बनर्जी ने जिस तरह प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की रैलियों से कोरोना संक्रमण बढ़ने का मुद्दा उठाया था, उसका भी वोटरों पर असर नजर आ रहा है।
एक अन्य विश्लेषक पार्थ प्रतिम विश्वास कहते हैं, 'बंगाल की सत्ता किसको मिलेगी, यह तो दो मई को ही पता चलेगा। लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों ने राज्य की राजनीति की भावी तस्वीर काफी हद तक साफ तो कर ही दी है।'
दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा, दोनों एग्जिट पोल के नतीजों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका दावा है कि वे दो सौ से ज्यादा सीटें जीत कर सरकार बनाएंगे। इनमें से किसका दावा खरा साबित होता है, इसके लिए दो मई तक का इंतजार करना होगा।
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