प्रकृति का सुंदर वैभव और दर्शन का स्पर्श: योगेंद्र सेठी के चित्रों का कला संसार और प्रदर्शनी
चित्रकार योगेंद्र सेठी के चित्रों की प्रदर्शनी हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर कलाओं के घर भारत भवन में हो चुकी है। इस प्रदर्शनी में योगेंद्र सेठी के ऑन द स्पॉट बनाए गए चित्र शामिल हैं। ये चित्र-कृतियां जलरंगों में बनाई गई हैं।
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अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनूठे चित्रकार योगेंद्र सेठी के चित्रों की प्रदर्शनी हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर कलाओं के घर भारत भवन में हो चुकी है। अब उनकी प्रदर्शनी इंदौर की प्रतिष्ठित देवलालीकर कला वीथिका में आयोजित की गई है। यह प्रदर्शनी 21 सितंबर तक जारी रहेगी। इस प्रदर्शनी में योगेंद्र सेठी के ऑन द स्पॉट बनाए गए चित्र शामिल हैं। ये चित्र-कृतियां जलरंगों में बनाई गई हैं। इसके अलावा एक्रिलिक रंगों में बनाई गई चित्र-कृतियां भी शामिल हैं जिसमें आध्यात्मिकता और दर्शन का स्पर्श है। एक्रिलिक रंगों की चित्र-कृतियां कला की दुनिया में एक अनोखा स्थान रखती हैं। ये रंग, जो 20वीं सदी में उभरे, अपनी चटकता, बहुमुखी प्रतिभा और तेजी से सूखने की खासियत के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह कैनवास पर जीवंत परिदृश्य हों, अमूर्त भावनाएं हों, या परंपरागत भारतीय चित्रकला, एक्रिलिक रंग हर शैली को एक नया आयाम देते हैं।
कलात्मक धैर्य और रचनात्मक संयम के चित्र
योगेंद्र सेठी की चित्रों की खूबी यह है कि उनके चित्रों में प्रकृति की विविध छटाएं निखर कर सामने आती हैं। वे प्रकृति के किसी दृश्य को अपनी कलात्मक दृष्टि से इस तरह रूपांतरित करते हैं कि ये कृतियां नया आस्वाद देती हैं। इसमें स्थानीय जगहों से लेकर मनाली और कश्मीर के साथ ही बर्कले यूनिवर्सिटी का कैम्पस, कैलिफोर्निया के समुद्री तट और न्यूयॉर्क की मैनहट्टन की गगनचुंबी इमारतें रूपायित हैं। और योगेंद्र सेठी इसे कलात्मक धैर्य और रचनात्मक संयम के साथ चित्रित करते हैं। इसमें उनकी रंगों की मितव्ययिता भी दिखाई देती है और अधिकतम प्रभाव भी दृष्टिगोचर होता है। इन्हें देखना प्रकृति को अपने पास संपादित होते देखना है।
आध्यात्मिकता से प्रकाशमान की कृतियां
योगेंद्र सेठी लंबे समय से अपने चित्रों में आध्यात्मिकता और दर्शन को भी अभिव्यक्त करते रहे हैं। उनके एक्रिलिक और ऑइल में बनाए चित्रों में उनकी यह आध्यात्मिकता आंतरिक प्रकाश से आलोकित हैं। इसमें मनुष्य के उच्चतम भावों का प्रकटीकरण है और इसके लिए वे उपयुक्त चटख और खिलते रंगों का उपयोग करते हैं। रंगों के उनके बर्ताव में उनके तूलिकाघात ध्यानाकर्षी हैं।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।