विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: ऑरलैंडो ब्लूम जन्मदिन विशेष और उनका भारत से रिश्ता
एक मजेदार बात बताऊं ऑरलैंडो ब्लूम के बारे में, जिससे आपको इस अभिनेता से थोड़ा और लगाव हो जाएगा। इसकी मां सोनिया कोन्सटैंस जोसेफिन ब्लूम हमारे देश भारत के कलकत्ता (आज के कोलकता) में पैदा हुई थी। ऑरलैंडो की कई फिल्में भारत में काफी पसंद की जाती रही हैं।
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विस्तार
13 जनवरी 1977 को जन्मे ऑरलैंडो ब्लूम को आपने ‘द लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स: द फैलोशिप ऑफ द रिंग’ (2001), ‘द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द टू टॉवर्स’ (2002) तथा ‘द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द रिटर्न ऑफ द किंग’ (2003) में अवश्य देखा और सराहा होगा। ऐसा इसलिए कह रही हूं क्योंकि एक समय इन फिल्मों ने भारत में भी धूम मचा दी थी।
वैसे आप ‘पाइरेट्स ऑफ द कैरिबियन: द कर्स ऑफ द ब्लैक पर्ल’, ‘पाइरेट्स ऑफ द कैरिबियन: डेड मैन’स चेस्ट’ (2006) एवं ‘पाइरेट्स ऑफ द कैरिबियन: एट वर्ल्ड’स एंड’ (2007) के विल टर्नर को भी नहीं भुला पाएंगे क्योंकि यह फ़िल्म भी भारत में खूब देखी गई। इसने 2017 में बनी ‘पाइरेट्स ऑफ़ द कैरिबियन: डेड मेन टेल नो टेल्स’ में भी काम किया है। इस ब्रिटिश अभिनेता ने ‘द थ्री मस्केटीअर्स’, ‘रोमियो एंड जूलिएट’, ‘द होबिट: द बैटल ऑफ़ द फ़ाइव आर्मीज’ आदि तमाम फिल्मों में काम किया है।
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ऑरलैंडो का भारत से रिश्ता
जिंदगी मानवता के लिए है, ऐसा मानने वाले, 29 पुरस्कार पाए, ओर्ली के नाम से जाने जाते इस अभिनेता ने टीवी में भी काम किया है और इसकी कई फिल्में प्रदर्शित होने के लिए तैयार हैं। एक मजेदार बात बताऊं ऑरलैंडो ब्लूम के बारे में, जिससे आपको इस अभिनेता से थोड़ा और लगाव हो जाएगा। इसकी मां सोनिया कोन्सटैंस जोसेफिन ब्लूम हमारे देश भारत के कलकत्ता (आज के कोलकता) में पैदा हुई थी।
ऑरलैंडो के पिता हैरी ब्लूम प्रसिद्ध राजनैतिक कार्यकर्ता थे, जिसने दक्षिण अफ़्रीका में गृहयुद्ध के लिए युद्ध भी किया था। मगर दु:ख की बात है कि जब ऑरलैंडो ब्लूम मात्र चार साल का बच्चा था, तब हैरी ब्लूम हृदयाघात से चल बसा। पिता की मौत के बाद ऑरलैंडो ब्लूम तथा उसकी बड़ी बहन सामान्ता ब्लूम अपनी मां और पारिवारिक मित्र कोलिन स्टोन की देखरेख में बड़े हुए।
अगर मां न बताती तो ऑरलैंडो और उसकी बहन को कभी पता न चलता कि हैरी ब्लूम नहीं बल्कि कोलिन स्टोन उनका असली पिता है। उस समय ऑरलैंडो किशोरावस्था में प्रवेश कर रहा था। 13 वर्ष के किशोर को उसकी मां ने बताया कि यह छिपा कर नहीं किया गया बल्कि उसके पिता की रजामंदी से हुआ। हैरी को 1975 में भी हृदयाघात हुआ था और उसके बाद उसके बच्चे पैदा करने की क्षमता समाप्त हो गई थी।
ऑरलैंडो ब्लूम डिस्लैक्सिया का शिकार था अत: कैंटबरी के सेंट एडमंड स्कूल में पढ़ते हुए उसे काफी परेशानी हुई। मगर उसे कुम्हारगिरी, फोटोग्राफी और मूर्तिकला पसंद थी। वह स्कूल तथा स्थानीय नाटकों में भी सक्रीय था। वह प्रशिक्षण हेतु म्यूजिक तथा ड्रामा स्कूल भी गया। मां ने भाई-बहन को साहित्य पढ़ने केलिए प्रेरित किया और भाई-बहन ने कविता तथा बाइबिल प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार जीते।
कम उम्र से ही अभिनय का शौकीन
16 साल की उम्र में ऑरलैंडो ने लंदन के ‘नेशनल यूथ थियेटर’ में काम किया और दो साल में स्कॉलरशिप जीत कर प्रशिक्षण के लिए ‘ब्रिटिश अमेरिकन ड्रामा अकादमी’ पहुंच गया। उसने ‘कौजुआल्टी’, ‘मिडसमर मर्डर्स’, ‘स्मैक द पोनी’ जैसे ब्रिटिश टीवी शो में भी काम किया। 1997 में उसे प्रसिद्ध फ़िल्म ‘वाइल्ड’ में अभिनय का अवसर प्राप्त हुआ।
जिंदगी अजीब खेल दिखाती है। 1998 में ऑरलैंडो तीसरी मंजिल की छत से गिर गया और उसकी पीठ की हड्डियां टूट गई। लगा वह जीवन भर के लिए अपाहिज हो जाएगा मगर उसकी जिजीविषा मजबूत थी जल्द ही वह ठीक हो कर फिर से मंच पर था।
सच में जीवन के खेल निराले होते हैं। 1999 में एक रात ऑरलैंडो दर्शकों में बैठा हुआ था कि निर्देशक पीटर जैक्सन की निगाह उस पर पड़ी। शो के बाद निर्देशक ने उसे अपनी आने वाली फिल्मों, जी हां, फ़िल्मों केलिए ऑडीशन देने को कहा। फिर वही हुआ जिसे इंग्लिश में कहते हैं, ‘रेस्ट इज हिस्ट्री’। ऑरलैंडो पीटर जैक्सन को एक जीनियस मानता है और इसमें कोई शक नहीं कि यह निर्देशक एक प्रतिभाशाली व्यक्ति है।
न्यूजीलैंड का यह निर्देशक, स्क्रीनप्लेराइटर और प्रड्यूसर फ़िल्मों की श्रृंखला बनाने जा रहा था। उसी ने प्रसिद्ध उपन्यासकार जे.आर.आर. टोल्किन के उपन्यासों ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ तथा ‘होबिट’ पर इन्हीं नामों से दो सिने-त्रयी बनाई। इन फ़िल्मों के लिए ऑरलैंडो करीब 18 महीने न्यूजीलैंड में रहा। इस एक व्यस्ततम अभिनेता ने अक्सर ऐतिहासिक, काल्पनिक तथा ‘कॉस्टूम गाथाओं’ में अभिनय किया है और आज सिने-उद्योग में इसकी खूब मांग है।
एक्शन सीन में महारत
2002 में सिगरेट छोड़ कर नाखून चबाने वाला, शाकाहार-मांसाहार में आवाजाही करता, ऑरलैंडो फ़िल्मों में हथियारों के विशेषज्ञ के रूप में तथा धनुष चलाने, तलवारबाजी के लिए जाना जाता है। इसने फिल्मों के लिए तीरंदाजी, सर्फ़िंग, घुड़सवारी, चाकूबाजी आदि का प्रशिक्षण लिया। फ़िल्मों में इसके तीर-कमान का कमाल देख कर यूनाइटेड किंगडम में युवाओं के बीच यह खेल लोकप्रिय हो गया।
इस अभिनेता के साथ कई दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। 2001 में शूटिंग के दौरान घोड़े से गिर कर इसकी एक पसली टूट गई। खुद अभिनेता का कहना है कि उसके साथ दुर्घटना की संभावना सदा बनी रहती है। वह स्वीकार करता है कि उसकी कमर, पसलियां, नाक, पैर, हाथ, कलाई, हाथ-पैर की अंगुलियां तो टूटी ही हैं, उसकी खोपड़ी भी तीन बार फट चुकी है।
2004 में एम्पायर पत्रिका ने उसे देह सौष्ठव के मामले में श्रेष्ठ स्थान दिया। स्त्री-पुरुष को मिला कर देखें तो इस पत्रिका के अनुसार उस साल ऑरलैंडो को तीसरा स्थान प्राप्त था। कैरा नाइटली तथा एन्जलीना जोली उससे आगे थीं। धड़ल्ले से फ़्रेंच बोलने वाले ऑरलैंडो के पास ‘रॉयल शेक्सपीयर कंपनी’ का आमंत्रण सुरक्षित है, फ़ुरसत मिलते ही उसे वहां जाना है। उसकी हार्दिक इच्छा है कि वह इस मंच पर ‘हेमलेट’ के कठिन किरदार को सार्थक करे।
स्वयं को सदैव समुद्री दस्यु अनुभव करने वाला यह अभिनेता गरिमा के साथ वृद्ध होना चाहता है, दर्द-मुक्त बुढ़ापा जीना चाहता है। ऑरलैंडो अभिनेता इअन मैकेलन को ब्रिटेन का सबसे बड़ा थियेटर अभिनेता मानता है, उसी की तरह काम करना चाहता है।
मैं प्यार के साथ प्यार में हूं, कहने वाला, अपने सह-अभिनेताओं का आदर करने वाला ऑरलैंडो सह-कलाकार जॉनी डेप की विनम्रता और गरिमा का बहुत सम्मान करता है। अपने रोल मॉडल जॉनी डेप की कही बात को सदैव याद रखता है। जॉनी ने उससे सदा कहा है,
‘पैसे के पीछे मत भागो। ऑरलैंडो! अपने दिल की सुनो।’
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।