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दिल्ली में कोरोना के बीच वायु प्रदूषण बढ़ा रहा चिंता

Sun, 15 Nov 2020 10:04 AM IST
Devendra Suthar देवेंद्र सुथार
Updated Sun, 15 Nov 2020 10:04 AM IST
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effects of air pollution in delhi
देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी है। - फोटो : PTI

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर वायु प्रदूषण की दस्तक है। बीते साल प्रदूषण की भयावह स्थिति के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। हालात इतने विकट हो गए  कि सरकार ने सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही प्रदूषण की वजह से पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण ने दिल्ली एनसीआर में हेल्थ इमरजेंसी घोषित की। 

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बहरहाल, इस साल कोरोना संकट के बीच प्रदूषण फिर खतरे की घंटी बजा रहा है। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण ने यहां के लोगों की उम्र 10 साल कम कर दी है। पूरे उत्तर भारत में उम्र औसतन 7 साल कम हुई है। यह दावा शिकागो यूनिवर्सिटी की शोध संस्था एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट एट द यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो (ईपीआईसी) ने अपने विश्लेषण के जरिए किया है।
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विश्लेषण के मुताबिक, साल 1998 से 2016 के बीच गंगा के मैदानी इलाके (उत्तर भारत) में वायु प्रदूषण (हवा में पर्टीकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 और 10) 72 प्रतिशत बढ़ गया। इस पूरे इलाके में भारत की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है। प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा बढ़ने की वजह से उत्तर भारत के लोगों की औसत उम्र 7 साल कम हो गई। दरअसल 1998 मे दिल्ली में पर्टीकुलेट मैटर का प्रदूषण 70 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो कि 2016 में 113 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (61 फीसदी ज्यादा) हो गया।
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संस्था ने यह विश्लेषण सेटेलाइट डाटा के आधार पर किया है। विश्लेषण में 2016 के बाद के डाटा को शामिल नहीं किया गया है। ईपीआईसी ने विश्लेषण जारी करने के दौरान बताया कि बढ़ते प्रदूषण में हर कोई स्मोकर बन रहा है। नवजात शिशु भी जब पहली सांस लेता है तो उसके अंदर प्रदूषण चला जाता है। प्रदूषण इतना ज्यादा बढ़ रहा है कि यह 24 घंटे में 20-25 सिगरेट के बराबर है। पीएम 2.5 के स्तर को 22 से भाग देने पर उतनी सिगरेट का धुआं लोग अपने अंदर ले रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने से लोग बहुत ज्यादा स्तर तक बीमार हो रहे हैं। इससे उनकी उम्र कम हो रही है। ईपीआईसी की फाइंडिंग के बारे में कहा कि हर कोई अपने हिसाब से रिसर्च करता है। मगर एक बात सही है कि इससे लोगों की उम्र कम तो हो रही है।

effects of air pollution in delhi
हम वास्तव में नहीं चाहते हैं कि हमारे बच्चों या हमारे बुजुर्गों को प्रदूषण के कारण निरंतर बीमारियों के कारण न जूझना पड़े। - फोटो : PTI

एक तो कोरोना महामारी का संकट और ऊपर से प्रदूषण लोगों पर दुगुना कहर बरपाता नजर आ रहा है। अत: प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक स्वरूप में सोचना हर नागरिक का कर्तव्य है। वास्तव में हम नहीं चाहते कि हमारी भविष्य की पीढ़ियां दिल्ली में एक अस्वास्थ्य कर वातावरण में रहें। हम वास्तव में नहीं चाहते हैं कि हमारे बच्चों या हमारे बुजुर्गों को प्रदूषण के कारण निरंतर बीमारियों के कारण न जूझना पड़े। जाहिर है प्रदूषण की समस्या से कोरोना के कारण लगे लॉक डाउन में राहत मिली थी लेकिन इस समस्या से निपटना इतना आसान नहीं है। जनसहयोग और सरकार, दोनों को इस समस्या को लेकर गंभीर होना होगा। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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