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वायु प्रदूषण के कारण हांफती दिल्ली

Devendra Sutharदेवेंद्र सुथार Updated Mon, 04 Nov 2019 08:39 AM IST
देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी है।
देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी है। - फोटो : PTI
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देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी है। हालात इतने विकट हो गए हैं कि सरकार ने सभी स्कूलों को 5 नवंबर तक बंद रखने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही प्रदूषण की वजह से पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण ने दिल्ली एनसीआर में हेल्थ इमरजेंसी घोषित की है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बच्चों की सेहत के बारे में सोचने और पराली जलाने से रोकने के लिए कदम उठाने की अपील भी की। वहीं दिल्ली सरकार ने निजी और सरकारी स्कूलों के बच्चों को बांटने के लिए 50 लाख 'एन95' मास्क खरीदे हैं।
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ईपीसीए के मुताबिक, दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण सीवियर प्लस कटेगरी व एक्यूआई 500 से 700 के बीच पहुंच गया है। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण ने यहां के लोगों की उम्र 10 साल कम कर दी है। पूरे उत्तर भारत में उम्र औसतन 7 साल कम हुई है। यह दावा शिकागो यूनिवर्सिटी की शोध संस्था एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट एट द यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो (ईपीआईसी) ने अपने विश्लेषण के जरिए किया है। विश्लेषण के मुताबिक, साल 1998 से 2016 के बीच गंगा के मैदानी इलाके (उत्तर भारत) में वायु प्रदूषण (हवा में पर्टीकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 और 10) 72 प्रतिशत बढ़ गया। इस पूरे इलाके में भारत की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है। प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा बढ़ने की वजह से उत्तर भारत के लोगों की औसत उम्र 7 साल कम हो गई। दरअसल 1998 मे दिल्ली में पर्टीकुलेट मैटर का प्रदूषण 70 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो कि 2016 में 113 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (61 फीसदी ज्यादा) हो गया।

संस्था ने यह विश्लेषण सेटेलाइट डाटा के आधार पर किया है। विश्लेषण में 2016 के बाद के डाटा को शामिल नहीं किया गया है। ईपीआईसी ने विश्लेषण जारी करने के दौरान बताया कि बढ़ते प्रदूषण में हर कोई स्मोकर बन रहा है। नवजात शिशु भी जब पहली सांस लेता है तो उसके अंदर प्रदूषण चला जाता है। प्रदूषण इतना ज्यादा बढ़ रहा है कि यह 24 घंटे में 20-25 सिगरेट के बराबर है। पीएम 2.5 के स्तर को 22 से भाग देने पर उतनी सिगरेट का धुआं लोग अपने अंदर ले रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने से लोग बहुत ज्यादा स्तर तक बीमार हो रहे हैं। इससे उनकी उम्र कम हो रही है। ईपीआईसी की फाइंडिंग के बारे में कहा कि हर कोई अपने हिसाब से रिसर्च करता है। मगर एक बात सही है कि इससे लोगों की उम्र कम तो हो रही है।

 
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