फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Earth Day 2022 Climate Change is a big challenge to the world

पृथ्वी दिवस पर विशेष: विश्व के सामने जलवायु परिवर्तन गंभीर चुनौती

Fri, 22 Apr 2022 02:16 PM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Fri, 22 Apr 2022 02:16 PM IST
सार

विश्व के समक्ष आज जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चुनौती है। मानव जनित क्रिया-कलाप जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारक हैं। मानव जनित कारणों ने दुनियां के योजनाकारों, सरकारों तथा राजनीतिज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है।

विज्ञापन
Earth Day 2022 Climate Change is a big challenge to the world
एक अध्ययन के अनुसार अमेरिका और चीन में वर्ष 2007 में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भारत की तुलना में चार गुणा ज्यादा रहा है। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

विश्व के समक्ष आज जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चुनौती है। मानव जनित क्रिया-कलाप जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारक हैं। मानव जनित कारणों ने दुनिया के योजनाकारों, सरकारों तथा राजनीतिज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। भारत के संदर्भ में तो जलवायु का महत्व आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ है। भारत की अर्थव्यवस्था पर जलवायु का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। भारत में, मौसम विज्ञान संबंधी रिकॉर्ड वर्षा की मात्रा में अधिक परिवर्तन न होते हुए भी वायु तापमान में वृद्धि की ओर संकेत करते हैं।

विज्ञापन


आमतौर पर किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाले मौसम को ही वहां की जलवायु कहा जाता है। जलवायु का सीधा अर्थ है कि क्षेत्र विशेष में तापमान, औसतन वर्षा तथा विभिन्न ऋतुओं में हवा के रुख से है। जलवायु मुख्य रूप से वहां की भौगोलिक संरचना से नियंत्रित होती है फिर भी उस पर मानवीय गतिविधियों का भी काफी प्रभाव पड़ता है। ये सब सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा से ही संचालित होते हैं।
विज्ञापन

 

एक अध्ययन के अनुसार अमेरिका और चीन में वर्ष 2007 में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भारत की तुलना में चार गुणा ज्यादा रहा है। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ और रूस के बाद भारत 5वें स्थान पर आता है।

विज्ञापन
विज्ञापन


यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य है कि भारत की नीतियों एवं तत्परता के परिणामस्वरूप वर्ष 1994 से 2007 की अवधि में उत्सर्जन की तीव्रता में 30 प्रतिशत की कमी आई है। भारत इस क्रम को जारी रखते हुए उत्सर्जन की तीव्रता में 20-25 प्रतिशत तक की कमी लाने के लिए प्रयत्नशील है।

 

Koo App

#WorldEarthDay के अवसर पर आइए, हम सब , पृथ्वी को एक स्वच्छ और हरे भरे ग्रह के रूप में विकसित करने का संकल्प लें। पर्यावरण संरक्षण हम सभी नागरिकों का पवित्र कर्तव्य है। हमें प्रकृति के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खुद को इसके लिए सजग प्रहरी बनना होगा।

View attached media content

- Arjun Ram Meghwal (@ArjunRamMeghwal) 22 Apr 2022

Earth Day 2022 Climate Change is a big challenge to the world
हमारा वायुमण्डल कई प्रकार की गैसों का मिश्रण है। जलवायु पर वायुमण्डल और जलमण्डल का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। - फोटो : Istock

हमारी पृथ्वी की स्थिति 

विश्व स्तरीय मानदण्डों के अनुसार पृथ्वी पर ऑक्सीजन-कार्बन-डाइऑक्साइड के संतुलन को बनाये रखने के लिए एक तिहाई (1/3 ) भूमि पर जंगल होने चाहिए। लेकिन आजकल घने जंगल दुनिया में 20-21 प्रतिशत और भारत में केवल 12-13 प्रतिशत भूमि पर ही रह गए हैं।

यद्यपि भारत का वनावरण 21.71 प्रतिशत तक है, लेकिन इसमें खुले वन अधिक हैं।  राजस्थान में तो वनों की हालत और भी दयनीय है। वहां 8-9 प्रतिशत भूमि पर ही वन बचे हैं। जब वृक्ष नहीं, वन नहीं तो वन्यजीव भी नहीं बचेंगे।
 

Koo App

The flourishing flora and fauna of India are examples of the country’s diverse biodiversity. This #EarthDay, let’s promise to save our forests, species, and the amazing livelihood it sustains.

View attached media content

- MyGovIndia (@mygovindia) 22 Apr 2022



वनों के घटने से अब पक्षी बहुत कम दिखने में आते हैं और रंग-बिरंगी तितलियां तक दुर्लभ होती जा रही हैं। ईंधन के लिए, फर्नीचर के लिए, भारत और कुछ अन्य देशों में शवदाह के जिए बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष पर्यावरण की जितनी हानि हो रही है, उसका पूरा अनुमान लगाना तो कठिन है, किन्तु यह स्पष्ट है कि उससे ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि हो रही है, भू-जल का संरक्षण नहीं हो पा रहा है, मिट्टी का अपरदन तथा जैव विविधता का विनाश तेजी से हो रहा है

विदित ही है कि हमारा वायुमण्डल कई प्रकार की गैसों का मिश्रण है। जलवायु पर वायुमण्डल और जलमण्डल का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। वायुमण्डल के इन घटकों में नाइट्रोजनए आॅक्सीजन एवं कार्बनडाई ऑक्साइड का सभी जीवधारियों (वनस्पति-वर्ग एवं प्राणी-वर्ग) के जीवन चक्र से सीधा संबंध है।


यद्यपि कार्बन-डाई-ऑक्साइड की वायुमंडल में बहुत कम मात्रा पाई जाती है, किन्तु पृथ्वी पर जीवन क्रम को संचालित करने, वायुमण्डल की संरचना (बनावट) और उसके घटकों के बीच मात्रात्मक संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से उसकी  अहम भूमिका है क्योंकि प्राणियों के लिए हानिकारक समझी जाने वाली कार्बनडाई ऑक्साइड हरे पेड़-पौधों के लिए बहुत ही आवश्यक है।
 

Koo App

माता भूमि: पुत्रोहं पृथिव्या: विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आइये आज इस शुभ अवसर पर हम सभी पृथ्वी की गुणवत्ता एवं उर्वरकता बनाएं रखने की दिशा में काम करने का संकल्प करें। #EarthDay2022

View attached media content

- Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) 22 Apr 2022



कार्बन-डाई-ऑक्साइड, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड, सल्फर-डाई- ऑक्साइड एवं नाइट्रस ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें उत्सर्जित हो रही हैं। वे पर्यावरण को प्रदूषित कर रही हैं, वनस्पतियों का विनाश कर रही हैं तथा प्राणिजगत के लिए घातक सिद्ध हो रही हैं। मनुष्य में कैंसर, श्वसन संबंधी अनेक रोग, नेत्र रोग, मोतियाबिन्द जैसी बीमारियां उत्पन्न कर रही हैं।

इन सब गतिविधियों का अन्ततोगत्वा जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। विनाश को टालने के लिए तत्काल आवश्यकता है कार्बन-डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन की मात्रा में बड़ी कमी लाई जाए तथा सीएफसीज के वैकल्पिक यौगिक काम में लिए जाए।



 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed