फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   dr harivansh rai bachchan birthday father of amitabh bachchan biography

जन्मदिन विशेष डॉ. हरिवंशराय बच्चनः प्रेम और मस्ती के कवि

Wed, 27 Nov 2019 02:16 PM IST
Devendra Suthar देवेंद्र सुथार
Updated Wed, 27 Nov 2019 02:16 PM IST
विज्ञापन
dr harivansh rai bachchan birthday father of amitabh bachchan biography
हरिवंश राय बच्चन ने बच्चन ने सीधी, सरल भाषा मे साहित्यिक रचना की। - फोटो : अमर उजाला

हिंदी साहित्य में हालावाद के प्रवर्तक एवं मूर्धन्य कवि हरिवंशराय बच्चन उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। हाला, प्याला और मधुशाला के प्रतीकों से जो बात इन्होंने कही है, वह हिंदी की सबसे अधिक लोकप्रिय कविताएं स्थापित हुईं। दरअसल, उनका वास्तविक नाम हरिवंश श्रीवास्तव था।

विज्ञापन


हरिवंश जी को बाल्यकाल में बच्चन कहा जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ बच्चा या संतान होता है। बाद में वे इसी नाम से मशहूर हुए। बच्चन ने सीधी, सरल भाषा मे साहित्यिक रचना की। 'आत्म परिचय' व 'दिन जल्दी जल्दी ढलता है' इनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं। 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' में उन्होंने मानव जीवन की नश्वरता को स्पष्ट करते हुए दर्शन तत्व को उद्घाटित करने का सार्थक प्रयास किया है।
विज्ञापन


बच्चन मुख्यतः मानव भावना, अनुभूति, प्राणों की ज्वाला तथा जीवन संघर्ष के आत्मनिष्ट कवि हैं। उनकी कविताओं में भावुकता के साथ ही रस और आनंद भी दिखाई देता है। उनके गीतों में बौद्धिक संवेदन के साथ ही गहन अनुभूति भी है। साहित्य शिल्पी बच्चन की कविता सुनकर श्रोता झूमने लगते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


वे कहा करते थे सच्चा पाठक वही है जो सहृदय हो। विषय और शैली की दृष्टि से स्वाभाविकता बच्चन की कविताओं की विशेषता है। उनकी कविताओं में रूमानियत और कसक है। वहीं गेयता, सरलता, सरसता के कारण इनके काव्य संग्रहों को काफी पसंद किया गया। बच्चन ने सन 1935 से 1940 के बीच व्यापक निराशा के दौर में मध्यम वर्ग के विक्षुब्ध और वेदनाग्रस्त मन को वाणी दी।
 

dr harivansh rai bachchan birthday father of amitabh bachchan biography
हरिवंश राय बच्चन आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से भी संबद्ध रहे। - फोटो : फाइल फोटो

हरिवंश राय बच्चन का जीवन सफर 
बच्चन का जन्म 27 नवंबर, 1907 में इलाहाबाद से सटे प्रतापगढ़ जिले में एक छोटे से गांव बाबूपट्टी में कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रतापनारायण श्रीवास्तव तथा माता का नाम सरस्वती देवी था। उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एमए किया और पीएचडी की उपाधि कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से प्राप्त की तथा प्रयाग विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया।

कुछ समय तक वे आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से भी संबद्ध रहे। उनका विवाह 19 वर्ष की अवस्था में ही श्यामा के साथ हो गया था। सन् 1936 में श्यामा की क्षय रोग से अकाल मृत्यु हो गई थी। इसके पांच वर्ष पश्चात 1941 में बच्चन ने तेजी सूरी के साथ प्रेम विवाह किया। तेजी संगीत और रंगमंच से जुड़ी हुई थी। तेजी बच्चन से उन्हें दो पुत्र हुए। अमिताभ एवं अजिताभ।

अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा के एक ख्यातनाम अभिनेता हैं। बच्चन ने आत्मपरकता, निराशा, वेदना जैसे विषयों पर आधारित कविताएं लिखीं। मात्र 13 वर्ष की छोटी सी उम्र से बच्चन ने लिखना प्रारंभ किया था। एक अध्यापक, कवि, लेखक बच्चन ने अपनी कविता, कहानी, बाल साहित्य, आत्मकथा, रचनावली से बहुत लोकप्रियता हासिल की।

'तेरा हार' बच्चन का प्रथम काव्य-संग्रह है पर 1935 में प्रकाशित 'मधुशाला' से बच्चन का नाम एक गगनभेदी रॉकेट की तरह साहित्य जगत पर छा गया। इसी कृति से हिंदी साहित्य में 'हालावाद' का उन्मेष हुआ।

यद्यपि हालावाद की उत्पत्ति, विकास और समाप्ति की कहानी बच्चन की तीन पुस्तकों मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश में ही सीमित होकर रह गई। इनका प्रकाशन एक-एक वर्ष के अंतराल से हुआ। इनमें बच्चन ने यौवन, सौन्दर्य, और मस्ती के मादक गीत गाए थे। उस समय नवयुवकों में ये अत्यंत लोकप्रिय हुई थी, किंतु हालावाद एक झौंके की तरह आया और लुप्त हो गया। कारण हालावाद का कवि जगत और समाज से तटस्थ था, उसे विश्व से कोई मतलब न था।

dr harivansh rai bachchan birthday father of amitabh bachchan biography
पिता हरिवंश राय बच्चन के साथ अमिताभ - फोटो : सोशल मीडिया

इस तरह की अनुभूतियों का सामाजिक सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं था। इसके बाद निशा-निमंत्रण, एकांत-संगीत, सतरंगिनी, मिलन-यामिनी आदि अनेक काव्य प्रकाशित और लोकप्रिय हुए। आकुल अंतर, हलाहल, प्रणय पत्रिका, बुद्ध और नाचघर उनके अन्य काव्य-संग्रह हैं।

इसके अतिरिक्त इन्होंने तीन खण्डों में अपनी आत्मकथा 'क्या भूलूं क्या याद करूं' लिखी। साथ ही उन्होंने अनेक समीक्षात्मक निबंध लिखें और शेक्सपियर के कई नाटकों का अनुवाद भी किया। 

नि:संदेह हिंदी में कवि सम्मेलन परंपरा को सुदृढ़, गरिमापूर्ण, जनप्रिय तथा प्रेरक बनाने में बच्चन का असाधारण योगदान रहा है। उनकी कृति 'दो चट्टानें' को 1968 में हिंदी कविता का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान हुआ।

इसी वर्ष उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार तथा एफ्रो एशियाई सम्मेलन के कमल पुरस्कार से भी नवाजा गया। आत्मकथा 'क्या भूलूं क्या याद करूं' के लिए उन्हें बिड़ला फाउंडेशन ने सरस्वती सम्मान प्रदान किया।

सन् 1976 में उन्हें भारत सरकार द्वारा साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में 'पद्मभूषण' से नवाजा गया। बच्चन की कविता के साहित्यिक महत्व के बारे में अनेक मत हो सकते हैं और हैं, किंतु उनके काव्य की विलक्षण लोकप्रियता को सभी स्वीकारते हैं। वे हिन्दी के लोकप्रिय कवि रहे हैं और उनकी कृति 'मधुशाला' ने लोकप्रियता के सभी रिकॉर्ड तोड़े हैं।

इसका कारण है कि बच्चन ने अपनी कविता के लिए तब जमीन तलाश की, जब पाठक छायावाद की अतीन्द्रिय और अतिवैयक्तिक सूक्ष्मता से उकता रहे थे। उन्होंने सर्वग्राह्य, गेय शैली में संवेदनसिक्त अभिधा के माध्यम से अपनी बात कही तो हिंदी का काव्य रसिक सहसा चौंक पड़ा। उन्होंने सयत्न ऐसा किया हो, ऐसा नहीं है, वे अनायास ही इस राह पर निकल पड़े।

उन्होंने काव्य सृजन के लिए अनुभूति से प्रेरणा प्राप्त की तथा अनुभूति को ही काव्यात्मक अभिव्यक्ति देना अपना ध्येय बनाया। उनकी प्रसिद्ध रचना अग्निपथ में वह लिखते हैं - वृक्ष हो भले खड़े, हो घने हो बड़े, एक पत्र छांह भी, मांग मत, मांग मत, मांग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। छायावाद के कवि डॉ. बच्चन के व्यक्तित्व व कृतित्व को साधारण लेखक लेखनी में नहीं बांध सकता। कवि ने जीवन के उल्लास में मृत्यु के पार की कल्पना करते हुए भी खूब लिखा - इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा !
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed