शादी और जीवन: कामकाजी लड़कियों के लिए आसान नहीं जीवन
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भारत में पिछले कुछ सालों में कामकाजी महिलाओं की संख्या बहुत बढ़ी है, हालांकि महिलाओं की कुल आबादी को देखते हुए यह संख्या बहुत कम है। महिलाओं की एक बड़ी आबादी आज भी आत्मनिर्भर नहीं है और कुछ हैं भी तो उनकी कमाई इतनी नहीं कि वो अपना और बच्चों का खर्च अकेले दम पर चला सके। ये कड़वी सच्चाई बहुत सी महिलाओं को नाकाम शादी निभाने के लिए मजबूर कर देती है। 35 साल की मीनल की शादी को नौ साल हो चुके हैं। मीनल वर्किंग थी, लेकिन एक साल पहले ही उसने नौकरी छोड़ दी क्योंकि बेटी को देखने वाला कोई नहीं था।
बहुत कुछ कहती है मीनल की कहानी
मीडिल क्लास फैमिली की मीनल के पति की सैलरी भी ठीक-ठाक थी। ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि मीनल के नौकरी छोड़ने से घर में आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न होती, लेकिन बावजूद इसके मीनल का पति आए दिन उसे ताने कसने लगा। कभी दोस्त की बीवी का उदाहरण देता को कभी किसी और का। मीनल वर्क फ्रॉम होम कर रही थी, मगर उसमें कमाई ज़्यादा नहीं थी फिर भी वो अपना खर्च निकाल लेती थी, मगर उसके पति को यह रास नहीं आ रहा था, क्योंकि उसे घर में बैठी बीवी बोझ लगती थी।
घर के किसी काम में मीनल की मदद नहीं करता था, बस ताने मारना उसका सबसे बड़ा काम था। कई बार तो छोटे-मोटे झगड़ों के बाद पति ने उससे साफ कह दिया कि ‘मुझे तलाक क्यों नहीं दे देती तुम.’पहले नौकरी छोड़ने और फिर पति की ऐसी बातों से मीनल की तनाव दिन ब दिन बढ़ता जा रहा था, लेकिन पति ने एक बार भी उससे प्यार से बात करने, उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं की। उसने तो मीनल से शादी ही इसलिए की थी क्योंकि वह वर्किग थी।
कई बार गुस्से में मीनल ने भी कहा कि वो तलाक दे देगी, लेकिन जब गुस्सा शांत होता तो ठंडे दिमाग से सोचने पर निष्कर्ष ये निकलता कि तलाक देने के बाद कहां रहेगी, कैसे पालेगी अपनी बेटी? बस ये सोच ही उसे डरा देती। मेट्रो सिटी में मकान का किराया ही इतना ज़्यादा होता है कि मीडिल क्लास वालों के लिए अफोर्ड करना मुश्किल है। वैसे भी मीनल के पास न तो अच्छी नौकरी है और न ही बड़ा बैंक बैलेंस, इसलिए हर रोज़ पति के ताने और अपने आंसुओं को पीकर भी वो इस रिश्ते को निभा रही है।
तलाक लेना चाहती हैं लेकिन
दरअसल, हमारे देश में बहुत सी महिलाएं हैं जो तलाक लेना तो चाहती हैं, मगर उनके हालात ऐसा नहीं है कि वो अकेले अपने और अपने बच्चों की परवरिश कर पाएं। हमारे समाज में आज भी अकेली, तलाकशुदा औरतों को इज्ज़त की निगाह से नहीं देखा जाता। चंद महिलाएं ज़रूर हिम्मत दिखाते हुए घुटनभरे रिश्ते से आज़ादी पा लेती हैं, मगर उनके लिए भी यह सब आसान नहीं होता। तलाक के बाद आसपड़ोस के लोगों की चुभती निगाहें और हजारों सवालों का जवाब देना पड़ता है।
कुल मिलाकर बच्चों की परवरिश, समाज का डर, आत्मनिर्भर न होना, अकेले जिंदगी बिताने का आत्मविश्वास न होना ही महिलाओं को ऐसी शादी निभाने के लिए मजबूर करता है जिसमें प्यार और सम्मान जैसी कोई चीज़ नहीं बची होती। वे घुट- घुटकर जीने को मजबूर होती हैं। भारत में ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में महिलाएं ऐसी ही परिस्थितियों में जीने को मजबूर हैं।
मीनल को यदि एक प्रतीक के तौर पर भी देखा जाए तो भारत में विवाहित स्त्रियों की सामाजिक स्थिति अच्छी नहीं है। अच्छी भी है तो सम्मानजक नहीं है। उनके पास घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच वो स्वतंत्रता नहीं है जो एक मनुष्य के रूप में उन्हें मिलना चाहिए। बाहर आने-जाने की इजाजत, इच्छा से पहनने और ओढ़ने की आजादी, शिक्षा का अभाव और भावनात्मक रूप से उपेक्षा की वजह से भी शादी के बाद ससुराल और पति से परेशान महिलाएं तलाक नहीं ले पातीं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.