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आंध्र प्रदेश की तरह देशभर में दिशा बिल लाने के लिए गैंगरेप की और कितनी घटनाओं का इंतजार?

Fri, 03 Jan 2020 12:47 AM IST
Aarti kumari आरती कुमारी
Updated Fri, 03 Jan 2020 12:47 AM IST
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Disha bill in andhra pradesh but its need to be implement in all over india NCRB crime against women
क्यों देश में इतना असुरक्षित माहौल गया है कि हर लड़की अपने आपको कहीं सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती है?

पिछले महीने तेलंगाना के हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद आरोपियों का पुलिस द्वारा इनकाउंटर करने की घटना पर देशभर में लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली। इस बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी ही गैंगरेप और हत्या की कई घटनाएं हुईं। कुछ दिन तक चर्चा होती रही और फिर हमेशा की तरह हम अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो गए।

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दरअसल, हम इतने भुलक्कड़ हो चुके हैं कि हमारी स्मृति में बड़ी से बड़ी और महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण घटनाएं ज्यादा दिन तक नहीं ठहरती। याद हमें तब आती है, जब ऐसी ही कोई अन्य घटना न हो जाए और उसकी खबर हम तक न पहुंच जाए।
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खैर, साल 2019 बीत गया, 2020 का आगमन हुआ। 31 दिसंबर की रात से एक जनवरी तक हम जश्न मनाते रहे। इस दौरान एक लड़की होने के नाते मन से यही दुआ करती रही कि अगले दिन के अखबार में रेप/गैंगरेप जैसी घटनाओं की कोई खबर न दिखे। न जाने क्यों मन में ये सवाल घर कर चुका है, क्यों देश में इतना असुरक्षित माहौल गया है कि हर लड़की अपने आपको कहीं सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती है और क्यों अधिकतर लड़कियों के दिमाग में रेप, गैंगरेप जैसे भयंकर शब्द बार-बार आते रहते हैं?
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दरअसल, लड़कियां जब अपने परिवार के बीच होती हैं, तो पुरुष के रूप में वह अपने पिता को, अपने भाइयों को देखकर बड़ी होती हैं। फिर उनके जीवन में रिश्तेदारों और दोस्तों के रूप में पुरुष आते हैं। जब वह घर से बाहर निकलती हैं तो समाज में मौजूद पुरुषों को भी उसी नजर से देखती हैं और उनमें भी भाई, दोस्त, पिता, चाचा को तलाशती हैं। क्या हैदराबाद की महिला डॉक्टर का ऐसा मानना उसका कसूर था?

क्यों समाज उसे वह नहीं दे पाता, जिसकी वह अपेक्षा करती हैं? आप भी सोचिए न! पुरुषों के लिए भी घर में महिलाएं मां, बहन, पत्नी, बेटी की भूमिका में होती हैं, लेकिन वही पुरुष जब घर परिवार से बाहर होता है तो अन्य घरों की मां, बहन और बेटियां उनके लिए उपभोग की वस्तु होती है। उनकी यौन इच्छा की पूर्ति करने वाली एक प्रॉडक्ट। जिसका जिम्मेदार अक्सर बाजार/बाजारवाद को बताया जाता है, लेकिन हम अपने अंदर झांक कर देखना मुनासिब नहीं समझते।

जैसे-जैसे हमारा समाज अधिक शिक्षित और प्रगतिशील होता जा रहा है, हमारे समाज में महिलाओं के यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म की घटनाएं कम होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं। एक तो वैसे ही भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति ऐसी रही है कि बचपन से ही उन्हें अपने घर में ही दबकर रहने की आदत डाल दी जाती है। उनकी यही मजबूरी समाज की नजर में उसे अबला बना देती है। कई मामलों में तो वह अपने प्रति हो रहे अपराध की शिकायत करने में भी झिझक महसूस करती है।

Disha bill in andhra pradesh but its need to be implement in all over india NCRB crime against women
भारत में रेप के कुछ ऐसे मामले हुए, जिसने पूरी मानवता को हिला कर रख दिया। - फोटो : AMAR UJALA

शर्मनाक आंकड़ा: हर 6 घंटे में एक दुष्कर्म

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार भारत में हर छह घंटे में एक लड़की का रेप हो जाता है। रेप पीड़ितों में ज्यादातर की उम्र 18 से 30 साल के बीच थी। हर तीसरे पीड़ित की उम्र 18 साल से कम है। वहीं, 10 में एक पीड़ित की उम्र 14 साल से भी कम है।

साल 2010 के बाद से महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 7.5 फीसदी वृद्धि हुई है। साल 2012 के दौरान देश में 24,923 मामले दर्ज हुए, जो 2013 में बढ़कर 33,707 हो गई।

साल 2017 में इस साल देश में 28,947 महिलाओं के साथ रेप की घटना दर्ज की गईं। रेप के मामले में 4,882 की संख्या के साथ 2017 में मध्य प्रदेश सबसे आगे था। इस मामले में उत्तर प्रदेश 4,816 और महाराष्ट्र 4,189 रेप की घटनाओं के साथ देश में दूसरे और तीसरे स्थान पर था।

नाबालिग बच्चियों के साथ रेप के मामले में भी मध्य प्रदेश देश में सबसे ऊपर है, जहां ऐसे 2,479 मामले दर्ज किए गए, जबकि महाराष्ट्र 2,310 और उत्तर प्रदेश 2,115 ऐसी घटनाओं के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। पूरे देश में 16,863 नाबालिग बच्चियों के साथ रेप के मामले दर्ज किए गए थे।

दिल दहला देती है ऐसी घटनाएं
भारत में रेप के कुछ ऐसे मामले हुए, जिसने पूरी मानवता को हिला कर रख दिया। इनमें साल 2012 का निर्भया गैंगरेप कांड, साल 2013 का 22 वर्षीय फोटो जर्नलिस्ट से गैंगरेप, साल 2015 का 71 वर्षीय नन के साथ पश्चिम बंगाल के रानाघाट में गैंगरेप, साल 2016 में लड़की की हत्या और रेप, साल 2018 में कठुआ रेप केस और साल 2019 में उन्नाव रेप केस शामिल हैं।

पिछले दिनों हैदराबाद में महिला डॉक्टर का गैंगरेप, रांची में लॉ की छात्रा के साथ गैंगरेप और बिहार के तीन शहरों में गैंगरेप की हुई घटनाएं तो जेहन से उतर ही नहीं रही है।

Disha bill in andhra pradesh but its need to be implement in all over india NCRB crime against women
'दिशा विधेयक' के अनुसार महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों का निपटारा 21 दिनों में किया जा सकेगा - फोटो : Amar Ujala

आंध्र प्रदेश की पहल सराहनीय, केंद्र सरकार क्यों नहीं करती?

हैदराबाद की घटना के बाद पीड़िता के काल्पनिक नाम 'दिशा' पर पिछले महीने 13 दिसंबर को आंध्र प्रदेश विधानसभा में 'दिशा विधेयक' पास हुआ, जिसके अनुसार महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों का निपटारा 21 दिनों में किया जा सकेगा।

इसके अनुसार, दोषी को फांसी की सजा देने का भी प्रावधान है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए कानून के तहत रेप के मामलों में पुख्ता सबूत होने पर अदालतें 21 दिन में दोषी को मौत की सजा सुना सकती हैं। पुलिस को सात दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होगी। स्पेशल कोर्ट को 14 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा और सारी प्रक्रियाएं 21 दिन में पूरी करनी होगी।

आंध्र प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने कहा है कि इस भले ही हाल ही में हुई रेप की घटना पड़ोसी राज्य तेलंगाना में हुई थी, लेकिन उनकी सरकार इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह कानून लाया गया है।

इस कानून में आईपीसी की धारा 354(e) और 354(f) को भी रखा गया है। मालूम हो कि 354(f) धारा में बाल यौन शोषण के दोषियों के लिए 10 से 14 साल तक की सजा का प्रावधान है और मामला बेहद गंभीर और अमानवीय हाने पर उम्र कैद हो सकती है।

यौन हिंसा और बार-बार रेप झेल चुकी फूलन देवी जब सांसद बनीं तो उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था:

पुरानी जिंदगी में काफी कुछ अफसोस रहा, लेकिन ये भी लगता था कि गरीब घर में औरत बन के काहे पैदा हुए? भले ही अगले जनम में जानवर बनके पैदा हो जाएं, मगर औरत नहीं


एक महिला होने के नाते न केवल मेरे मन में, बल्कि हर लड़की या संवेदना रखने वाले हर व्यक्ति के मन में यह सवाल उठता होगा कि आखिर देश की राजधानी में हुए निर्भया कांड के इतने सालों बाद भी केंद्र सरकार ऐसा बिल क्यों नहीं पास करती!

सीएए और एनआरसी जैसे मसलों की तरह क्या यौन शोषण, छेड़छाड़, रेप/गैंगरेप जैसी घटनाएं अहम नही हैं। रेप की घटनाएं तो हर धर्म, जाति और समाज में हो रही है! हर तीसरे या चौथे दिन ऐसी खबरें पढ़ने के बाद मैं और मेरे जैसी हर बेटी तो यही कहेगी न कि अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो!

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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