एक कलाकार की नजर में आंखों की अहमियत
दीपक कुमार घोष वैसे तो कला के तमाम रूपों और माध्यमों में काम करते हैं, लेकिन उनके चारकोल, एक्रेलिक और वाटर कलर में किए गए काम अद्भुत हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
किसी कलाकार को गहराई से देखना हो तो उसके भीतर की दृष्टि और समझ को टटोलने की जरूरत होती है। आम तौर पर अमूर्त या एब्सट्रैक्ट कला में ये देखना और परखना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन अगर चित्र आपके आस पास के हों, आपके मन के भावों को समझने की कोशिश करते हों और स्वाभाविक हों तो एक आम आदमी भी उसे समझ सकता है, महसूस कर सकता है। दीपक कुमार घोष ऐसे ही कलाकार हैं जो आम तौर पर आंखों की भाषा पढ़ने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि आंखें आपके व्यक्तित्व का आईना हैं, आंखें आपके भीतर चल रहे भावों को अभिव्यक्त कर देती हैं और इंसान की सबसे खूबसूरत चीज़ अगर कोई है तो वह है उसकी आंखें। इसलिए वह लंबे समय से आंखों पर बहुत गहराई से काम कर रहे हैं। कुछ साल पहले भी उन्होंने ‘आईज़ से इट ऑल’ यानी आंखें सबकुछ कहती हैं शीर्षक से अपनी कला प्रदर्शनी लगाई थी। अब उसी की अगली कड़ी इसी शीर्षक से आप देख सकते हैं दिल्ली के द स्टेनलेस गैलरी में।
दीपक कुमार घोष वैसे तो कला के तमाम रूपों और माध्यमों में काम करते हैं, लेकिन उनके चारकोल, एक्रेलिक और वाटर कलर में किए गए काम अद्भुत हैं। खासकर चारकोल उनका प्रिय माध्यम बन गया है और इसके जरिये वह कई बहुत ही आकर्षक पॉर्टरेट को आकार देते हैं। काफी कुछ पेंसिल स्केच की तरह बहुत ही बारीक और बेहद गहरी लकीरों और बिंदुओं का इस्तेमाल करते हैं। इस प्रदर्शनी में उनकी 60 से ज्यादा कलाकृतियां हैं। आप यहां घोष की बनाई हुई रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, अल्बर्ट आइंस्टीन, मदर टेरेसा और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसी हस्तियों के चित्र देख सकते हैं और इन चित्रों की खासियत आपको इनकी आंखों में नज़र आएगी। एकदम गहरी, भावों और अभिव्यक्ति से भरी हुई।
दीपक कुमार घोष कहते हैं कि आंखें आत्मा की खिड़कियां हैं। छोटे छोटे पलों में भी आंखें भावनाओं और अनुभवों की गहराई व्यक्त कर सकती हैं। घोष का कैनवस बहुत व्यापक है और उनका मानना है कि कला सामाजिक परिवर्तन के लिए एक असरदार माध्यम हो सकती है। इसके जरिये वह नई पीढ़ी और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। उनकी देख रेख में कई गरीब और प्रतिभावान बच्चे अपने भीतर के हुनर को पहचान और निखार रहे हैं।
यह प्रदर्शनी प्रत्येक ब्रशस्ट्रोक में अपने विषयों के भावपूर्ण सार को पकड़ने की घोष की क्षमता को सामने लाती है। उनके चित्र भावनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को दर्शाते हैं, उत्साह से लेकर गहरा दुःख और बीच में सब कुछ। अपने शिल्प में घोष का अनुभव और विशेषज्ञता उनके हर स्ट्रोक पर गहराई से ध्यान देने से साफ हो जाती है। प्रदर्शनी के साथ साथ दीपक कुमार घोष एक कला कार्यशाला भी आयोजित कर रहे हैं जिससे बड़ी संख्या में युवा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं।