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बलूचिस्तान और सियासत: जब बोए पेड़ बबूल के तो बलूच, पख्तून, पीओके होय..!

Sat, 22 Mar 2025 07:27 PM IST
Raman Rawal रमण रावल
Updated Sat, 22 Mar 2025 07:27 PM IST
सार

Pakistan Baloch War: भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान अपने कर्मों का फल भोग रहा है। उसने अपने पड़ोसी भारत को लगभग स्वतंत्रता के बाद से ही नाक में दम किए रखा। ऐसा करने के लिए उसने जो सांप-बिच्छू पाले और उन्हें विषबुझा बनाया, अब वे उसे ही डंस रहे हैं।

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आज कमोबेश समूची दुनिया आतंकवाद,अलगाववाद की चपेट में है। इसमें विकसित व विकासशील देश समान रूप से पीड़ित हैं। - फोटो : ANI

विस्तार

Pakistan Baloch War: भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान अपने कर्मों का फल भोग रहा है। अपने पड़ोसी भारत को लगभग स्वतंत्रता के बाद से ही नाक में दम किए रखा। ऐसा करने के लिए उसने जो सांप-बिच्छू पाले और उन्हें विषबुझा बनाया, अब वे उसे ही डंस रहे हैं। यूं तो यह पड़ोसी धर्म के नाते अनुचित है कि भारत उसकी मदद न करे, लेकिन जिसने भारत से भातृत्व व मित्रता की बजाय भारत को अस्थिर और आक्रांत बनाए रखने में रसद-पानी जुटाया, उसके लिए भारत भला क्यों सहानुभूति रखे और पाकिस्तान भी किस मुंह से उम्मीद रखे।

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दरअसल, पिछले कुछ बरसों से अपने ही घर में आतंकवाद का दंश झेल रहे पाकिस्तान के इतिहास में हाल ही के बलूचिस्तान आर्मी के हमले को भुलाया नहीं जा सकेगा। युग बीत जाते हैं फिर भी कहावतें अपने अर्थ नहीं खोतीं, जैसे-बोये पेड़े बबूल के तो आम कहां से पाए ?

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आज कमोबेश समूची दुनिया आतंकवाद,अलगाववाद की चपेट में है। इसमें विकसित व विकासशील देश समान रूप से पीड़ित हैं। दशकों तक भारत, पाक समर्थित आतंकवाद के जख्म लिए घूमता रहा, लेकिन किसी ने खास चिंता-पहल नहीं की। यहां तक कि कुछ पाक परस्त संपन्न राष्ट्रों ने तो हमारी बात को अनसुना कर पाक की मदद जारी रखी। ये वे देश हैं जिनका मंतव्य दुनिया को अस्थिर बनाए रखकर हथियार सहित युद्ध सामग्री निर्यात करना रहता है। जब ये भी एक-एक कर आतंकवाद की चपेट में आए तब तक काफी देर हो चुकी थी। जिसका खामियाजा दुनिया भुगत भी रही है। फिलहाल बात पाकिस्तान के हालात की कर लेते हैं।

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जब मुस्लिमों ने अपने लिए अलग देश पाकिस्तान ले लिया, उसके बाद उन्होंने अपने नए राष्ट्र की खुशहाली पर ध्यान देने की बजाए पहली सुबह से ही भारत की संप्रभुता, संपन्नता, अखंडता पर हमले करने प्रारंभ कर दिए। कश्मीर में घुसपैठ पर कब्जे की कोशिश से उसने शुरुआत की, जो विफल रहने पर उसने सारी शक्ति इसी बात पर लगा दी कि किस तरह से उसे अस्थिर किया जाए। उसी कश्मीर हमले में उसने एक हिस्से पर जो अनधिकृत कब्जा किया, उसे अभी तक नहीं छोड़ा। साथ ही अलग-अलग कारणों से 1965 व 1971 के युद्ध छेड़े और मई 1999 में कारगिल पर हमला कर उसे कब्जाने का प्रयास किया। हमेशा की तरह इसमें भी वह विफल रहा।

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पाकिस्तान और बलूचिस्तान के बीच लड़ाई - फोटो : Freepik

इससे पहले 1989 में पाकिस्तान ने कश्मीर में छापामार लडाई प्रारंभ की, जिसके लिए उसने पाकिस्तान में कट्टर इस्लामिक संगठनों के लोगों को बाकायदा सैन्य प्रशिक्षण देना शुरू किया। फिर इन्हें कवर फायर देकर कश्मीर में भेजने का सिलसिला शुरू हुआ। पूरे 25 साल तक कश्मीर को बरबादी की भट्टी में झोंक देने के बाद भी पाकिस्तान को तो अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी, लेकिन इस दरम्यान जिन आतंकवादी समूहों को पाल-पोसकर पुष्ट बनाया था, वे धीरे-धीरे पाकिस्तान के लिये ही भस्मासुर साबित होने लगे। जैसे यदि आप पालतू कुत्ते को बचपन से ही आगंतुक पर भोंकना,आक्रमण करना सिखाए, उसे सिर्फ मासांहारी बनाए, उसे गुस्सैल बनाये तो संभव है कि किसी दिन वह आप पर भी हमला कर दे। यही नियति अब पाकिस्तान की हो चुकी है।

इस समय पाकिस्तान में करीब 40 आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं। इन्हें जिस पाक सेना व नेताओं ने प्रश्रय दिया,अब वे ही उनसे हलाकान हैं। उधर, पाकिस्तान के गठन के बाद से ही बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनख्वाह जैसे राज्य पाकिस्तान के साथ दिल से मिले ही नहीं। पख्तून नेता अब्दुल गफ्फार खान ने स्वतंत्रता आंदोलन में जोर-शोर से भाग लिया था और अपने प्रांत को पाक में मिलाने का विरोध भी किया था, लेकिन तत्कालीन भारतीय नेतृत्व ने उनका समर्थन नहीं किया और न ही अंग्रेजों ने सुनी।

बलूच व पख्तून दोनों ही स्वतंत्र राष्ट्र चाहते थे। आजादी के बाद जब गफ्फार खान भारत यात्रा पर आये तो उनकी पीड़ा छलक पड़ी और कहा भी कि आपने हमें भेड़ियों के सामने डाल दिया। इसी तरह 17 से 19 फरवरी 2025 तक लाहौर में आयोजित फैज फेस्टिवल में भारत के शायर जावेद अख्तर ने मंच से कहा कि हमारे देश के 26/11 के आरोपी आपके यहां खुलेआम घूम रहे हैं तो ज्यादातर लोगों ने तालियां बजाकर साथ दिया, लेकिन पाकिस्तानी सेना व नेताओं के आगे किसी का जोर नहीं चलता।

दरअसल, पाकिस्तान अपने साथ बलूचिस्तान को इसलिए बनाए रखना चाहता है कि उस प्रांत में दुनिया का बड़े स्वर्ण भंडार समेत अनेक बहुमूल्य खनिज भी है। वह तो इसका खनन करने में सक्षम नहीं है, लेकिन चीन का कर्जदार होने के नाते वह उसे यह खजाना सौंपना चाहता है। इसका प्रबल विरोध बलूच कर रहे हैं और वे किसी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। वहां की भौगोलिक स्थिति ऐसी नहीं कि किसी सैन्य अभियान से वे बलात कब्जा कर ले।

हाल ही में पाक सैनिकों से भरी रेलगा़ड़ी को रोककर विस्फोट करने व करीब डेढ़ सौ सैनिकों को मार देने के पीछे भी बलूच आर्मी का ही हाथ रहा, जिसने भविष्य के अपने इरादों को स्पष्ट कर दिया है। इसके बाद खैबर पख्तूनख्वाह में 48 घंटे में 57 हमलों ने पाक सेना व नेतृत्व को नई चिंता में डाल दिया।
 

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तहरीक-ए-तालिबान ने भी पाकिस्तान की नींद कर रखी है हराम - फोटो : ANI

वैसे भी इस प्रांत में अपने ही पाले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की हरकतों ने पाक प्रशासन की नींद हराम कर रखी है। यह प्रांत अफगानिस्तान की सीमा से सटे होने के कारण उसे अफगान तालिबान का भी साथ मिलता है। यह वही संगठन है, जिसने 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला कर 140 बच्चों व शिक्षकों को बेरहमी से मार डाला था। 

इस संगठन को पाक सेना ने देश में शरीयत को बाहुबल से लागू करवाने के लिए 2007 में गठित करवाया था। अब यह पाक के गले की हड्डी बन चुका है। यह संगठन मस्जिद, सैन्य संस्थान, स्कूलों पर हमले करने में रत्ती भर विचार नहीं करता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ तो यहां तक कह चुके हैं कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान(पीपीटी) को कुचले बिना पाक आगे नहीं बढ़ सकता। सच तो यही है कि यह संगठन किसी सैन्य अभियान से समाप्त नहीं हो सकता। वैसे भी पाक के आतंकी संगठनों के 2024 में विभिन्न हमलों में करीब 1300 सैनिक मारे गये और 49 को बंदी बना लिया गया।


इन सारे संदर्भों के साथ एक बात विशेष तौर से ध्यान देने लायक है। भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने हालिया लंदन यात्रा के दौरान कहा है कि कश्मीर का जो हिस्सा(पीओके) चोरी हो गया था, उसकी वापसी का इंतजार है। इसके अर्थ अपने-अपने हिसाब से लगाये जा सकते हैं। पीओके के लोग भी अलग राष्ट्र की लड़ाई तो लड़ ही रहे हैं।

उधर,पख्तूनख्वाह व बलूचिस्तान भी खदबदा रहे हैं। पूरे पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिरता चरम पर है। महंगाई सर्वोच्च स्तर पर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष व चीन के कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। मार्च में ही चीन ने इस वर्ष दी जाने वाली कर्ज की किस्त 2 बिलियन डॉलर की वसूली एक साल के लिये बढ़ा दी है। चीन का पाकिस्तान पर कुल कर्ज 29 बिलियन डॉलर हो चुका है।

मुद्रा कोष सहित पाक पर कुल कर्ज 131 बिलियन डॉलर का है। कर्ज के बदले चीन को ग्वादर बंदरगाह व गिलगिट-बाल्टीस्तान एक तरह से पाक सौंप ही चुका है, जो खनिज संपदा व सामरिक महत्व के हैं। पाकिस्तान के भीतर लावा जिस वेग के साथ बह रहा है, वह किसी भी दिन ऐसा बड़ा विस्फोट करेगा, जिसके बाद इस मुल्क का खंड-खंड होकर बिखऱ जाना कोई रोक नहीं सकेगा।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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