कोरोना से जंग: पश्चिम बंगाल में अब राशन पर घमासान
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कोरोना की वजह से जारी लंबे लॉकडाउन के दौरान आम लोगों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए ममता बनर्जी सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए गरीबों को छह महीने तक मुफ्त राशन देने का एलान किया था। लेकिन अब यही एलान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार के लिए सिरदर्द बन गया है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में राशन के तहत पूरा सामान नहीं होने और राशन के खाद्यन्नों की काला बाजारी के आरोपों के बाद सरकार ने कई राशन डीलरों को गिरफ्तार किया है और कइयो केे लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।
वहीं राज्यपाल जगदीप धनखड़ औऱ भाजपा समेत तमाम विपक्षी राजनीतिक दल भी इस कथित राशन घोटाले पर सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इस मुद्दे पर कई जगह हिंसा भी हो चुकी है। भाजपा ने सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस पर राशन का सामाना अपने चहेतों और समर्थकों में बांटने का आरोप लगाया है।
भाजपा शुरू से ही पीडीएस में धांधली का आरोप लगा रही है। पार्टी का दावा है कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को एक बड़े हिस्से को न तो खाने को मिल रहा है और न ही उनको राशन मिल रहा है। इससे लोगों के सामने भुखमरी का संकट पैदा हो गया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि राज्य की राशन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। भूखे लोगों तक राशन नहीं पहुंच रहा है। कांग्रेस और वामपंथी दलों ने भी राशन के वितरण में पारदर्शिता के अभाव का आरोप लगाते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है।
दूसरी ओर, राज्यपाल जगदीप धनखड़ इस मुद्दे पर सरकार पर लगातार हमले कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य में गरीबों को मुफ्त में चावल, दाल आदि देने के लिए केंद्र सरकार लगातार राशन भेज रही है।
सरकार को इस वस्तुओं की कालाबाजारी पर रोक लगा कर गरीबों तक राशन पहुंचाना चाहिए। धनखड़ ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि पांच मई तक केंद्र ने बंगाल के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 9889 मिलियन टन मसूर दाल आवंटित किया है। इसमें से 6800 मिलियन टन पहले ही पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री को इस मामले में स्थिति साफ कर देनी चाहिए।
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गरीबों के लिए हर महीने पांच किलो चावल और पांच किलो दाल दिया जा रहा है। पीडीएस को दुरुस्त करना जरूरी है ताकि कालाबाजारियों तक राशन नहीं पहुंच सके।
माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी राशन वितरण में धांधली का आरोप लगाया है। वह कहते हैं कि गरीबों को पूरा राशन नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है।
माकपा का आरोप है कि राशन के जरिए सत्तारुढ़ पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को तो पूरा खाद्यान्न मिल रहा है। लेकिन बाकी लोगों को नहीं। पार्टी ने बढ़िया किस्म के खाद्यन्नों की बजाय राशन के जरिए खराब क्वालिटी की चीजों के वितरण का भी आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, राज्य के गृह सचिव अलापन बनर्जी ने राशन वितरण में भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि लाकडाउन के दौरान बंगाल में 10 करोड़ लोगों को मुफ्त में राशन दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लॉकडाउन के दौरान लगभग 10 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया है। डिजिटल राशन कार्डधारकों के अलावा इस प्रणाली से उन 61 लाख लोगों को भी लाभ मिला है जिनको कूपन दिए गए हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि पीडीएस में कोई अनियमितता नहीं है। उन्होंने कहा कि 359 राशन डीलरों पर कार्रवाई की गई है और 65 को निलंबित कर दिया गया है। गृह सचिव बताते हैं कि 25 डीलरों पर जुर्माना लगाया गया है और 50 से अधिक राशन डीलरों को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन सरकार की लाख सफाई के बावजूद राज्य में कथित राशन घोटाले पर विवाद लगातार तेज होता जा रहा है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।