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जैविक युद्ध और महाशक्ति बनने की होड़: चीन का जैविक हथियार तो नहीं कोरोना?

Fri, 21 May 2021 10:31 AM IST
shashank dwivedi शशांक द्विवेदी
Updated Fri, 21 May 2021 10:31 AM IST
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Coronavirus is China biological weapon is India ready for biological warfare
कोरोना वायरस कैसे और कहां से आया, इसको लेकर कई तरह की बातें पिछले एक साल से की जा रही हैं, - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है, हर दिन हजारों लोग असमय काल कलवित हो रहे हैं। दूसरी लहर के साथ-साथ अब विशेषज्ञ तीसरी लहर की भी संभावना जता रहे हैं। ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत किसी जैविक युद्द का शिकार तो नहीं हुआ है, जिसने अचानक चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त करके इतनी बड़ी तबाही मचा दी हो?

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कोरोना वायरस कैसे और कहां से आया, इसको लेकर कई तरह की बातें पिछले एक साल से की जा रही हैं, लेकिन हाल में ही इससे जुड़े कुछ चौकानें वाले तथ्य सामने आए हैं कि इस वायरस को चीन ने अपनी लैब में तैयार किया है। चीन कोरोना वायरस के माध्यम से कई देशों के खिलाफ एक जैविक युद्ध लड़ रहा है। चीन के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 महामारी से पांच साल पहले कथित तौर पर कोरोना वायरस को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में जांच की थी और उन्होंने तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियार से लड़ने का पूर्वानुमान लगाया था।
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क्या हैं दावेे और तथ्य?  
अमेरिकी विदेश विभाग को प्राप्त हुए दस्तावेजों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है। ब्रिटेन के 'द सन' अखबार ने 'द ऑस्ट्रेलियन' की तरफ से सबसे पहले जारी रिपोर्ट के हवाले से कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग के हाथ लगे 'विस्फोटक' दस्तावेज कथित तौर पर दर्शाते हैं कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के कमांडर यह घातक पूर्वानुमान जता रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों को मिले दस्तावेज कथित तौर पर वर्ष 2015 में उन सैन्य वैज्ञानिकों और वरिष्ठ चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा लिखे गए थे जोकि कोविड-19 की उत्पत्ति के संबंध में जांच कर रहे थे।
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चीनी वैज्ञानिकों ने सार्स कोरोना वायरस का 'जैविक हथियार के नए युग' के तौर पर उल्लेख किया था, कोविड जिसका एक उदाहरण है। पीएलए के दस्तावेजों में दर्शाया गया कि जैव हथियार हमले से दुश्मन के चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त किया जा सकता है। दस्तावेजों में अमेरिकी वायुसेना के कर्नल माइकल जे के कार्यों का भी जिक्र किया गया है, जिन्होंने इस बात की आशंका जताई थी कि तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियारों से लड़ा जा सकता है।

दस्तावेजों में इस बात का भी उल्लेख है कि चीन में वर्ष 2003 में फैला सार्स एक मानव-निर्मित जैव हथियार हो सकता है, जिसे आतंकियों ने जानबूझकर फैलाया हो। सांसद टॉम टगेनधट और ऑस्ट्रेलियाई राजनेता जेम्स पेटरसन ने कहा कि इन दस्तावेजों ने कोविड-19 की उत्पत्ति के बारे में चीन की पारदर्शिता को लेकर चिंता पैदा कर दी है। हालांकि, बीजिंग में सरकारी ग्लोबल टाइम्स समाचारपत्र ने चीन की छवि खराब करने के लिए इस लेख को प्रकाशित करने को लेकर दी ऑस्ट्रेलिया की आलोचना की है।

अर्थव्यवस्था और चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त करने की कोशिश

Coronavirus is China biological weapon is India ready for biological warfare
चीनी वैज्ञानिकों ने सार्स कोरोना वायरस का 'जैविक हथियार के नए युग' के तौर पर उल्लेख किया था - फोटो : Pixabay

अमेरिका लगातार कहता रहा है। 
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार चीन ने कोरोना वायरस को जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, ताकि दुश्मन देशों की अर्थव्यवस्था और चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त कर सके। चीन, अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर और हॉन्गकॉन्ग आंदोलन को काबू में करना चाहता था, इसके लिए डोनाल्ड ट्रम्प को रास्ते से हटाना जरूरी था। ऐसे में कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने अमेरिका में बड़ी तबाही मचाई, इसी वजह से ट्रंप राष्ट्रपति का चुनाव भी हार गए। वास्तव में डोनाल्ड ट्रंप चीन की तेज रफ्तार में कांटा बनकर खड़े थे।

जबकि इधर एशिया में भारत मोदी के नेतृत्व में अंतराष्ट्रीय पटल पर तेजी से उभर रहा था। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भारतीय सेना ने 2015 में म्यांमार की सीमा में घुसकर आतंकियों को मार गिराया था, जो चीन द्वारा पाले-पोसे जाते थे। उसके बाद 2016 और 2019 में पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक, पिछले साल गलवान घाटी से अपने इरादे साफ जता दिए थे कि अब ये नया भारत है। हाल में ही चीन के साथ गलवान घाटी में सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण हो गए थे। इसके कुछ महीने बाद ही भारत में कोरोना की दूसरी लहर आई जिसने पूरे चिकित्सा तंत्र को लगभग ध्वस्त कर दिया। 

इस लहर में कोरोना ने पूरे देश में बड़ी तबाही मचाई ऐसे में चीन के ऊपर यह शक गहराता जा रहा है कि कही भारत जैविक युद्द का शिकार तो नहीं हुआ। हालिया वैश्विक रिपोर्ट इस बात की पुष्टि भी कर रहे है। अमेरिका से बदला, भारत और मोदी सरकार की तेज रफ्तार को रोकने के लिए चीन ने जैविक अस्त्र चाइनीज वायरस को पहले वुहान में ड्रामैटिक शेप दिया। जब पूरी दुनिया चीन के इस खतनाक मंसूबे से अनजान 5जी, अन्य तकनीकी पहलुओं और आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित किए हुई थी, तब चीन अपने सार्स जैविक हथियार को पैनापन व अपडेशन दे रहा था।

चीन ने चाइनीज वायरस का केंद्र बिंदु वुहान में ही रखा। जहां दुनियाभर के लोग काम करते हैं। बाकी चीन के अन्य शहरों में इसका असर नहीं पहुंचा, लेकिन चाइनीज वायरस वुहान से अन्य देशों में छोड़ा गया और देखते ही देखते तबाही मचा कर रख दी, क्योंकि जब वुहान में हालात बिगड़ने लगे या कहें बिगाड़े, तो दूसरे देशों के लोग अपने देश को भागने पर मजबूर हो गए। भारत और अमेरिका ने अपने नागरिकों को एयरलिफ्ट किया। इसके साथ चाइनीज वायरस भी एयरलिफ्ट हुआ और लोगों की आम जिंदगी में घुल-मिलकर जिदंगियां बर्बाद करना शुरू कर दिया।

कोरोना का आर्थिक पहलू

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चीन ने चाइनीज वायरस का केंद्र बिंदु वुहान में ही रखा। - फोटो : Pixabay

ब्राजील ने भी लगाए आरोप, क्या पुष्ट हैं दावे 
अंततः ब्राजील ने भी चीन पर आरोप लगा कर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दावों पर मुहर लगा ही दी कि यह महामारी प्राकृतिक नहीं, बायोलॉजिकल वॉर फेयर है । कोविड की पहली लहर में ही जापान के नोबेल प्राइज विजेता वायरोलॉजिस्ट ने भी कहा था यह मानव निर्मित वायरस है। 2019 तक लगातार तीन वर्ष से चीन की जीडीपी नीचे गिर रही थी, लेकिन कोरोना महामारी आने के बाद चीन की जीडीपी में तेजी से उछाल आया और अब तक उसमें 70 फीसदी वृद्धि हो चुकी है, जबकि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा भाग चीनी वायरस से लड़ने में व्यय हो रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में प्री पैंडेमिक वैक्सीन का रिसर्च चल रहा था, इसी क्रम में कुछ अनपेक्षित हुआ और वायरस चीन के वुहान में ही फैल गया... इटली चीनी भाई-भाई के चक्कर मे इटली में भी कोरोना ने बड़ी तबाही मचाई।

दूसरी लहर के प्रति भारत सरकार की अदूरदर्शिता की तरह अमेरिका ने पहली लहर में इसे हल्के में लिया और चीन की योजना बिना किसी परिश्रम के सफल हो गई, अमेरिका जैसा देश रुक गया और अपने लाखों नागरिकों की मृत्यु का साक्षी बना। दूसरी ओर इसके फैलने के तुरंत बाद चीन की वैक्सीन बाजार में आ गई, पूरा विश्व हैरान रह गया कि अभी तो वायरस का विश्लेषण भी आरम्भ नहीं हुआ था, वैज्ञानिक वैक्सीन पर रिसर्च ही कर रहे थे और चीन ने वैक्सीन बेचना भी शुरू कर दिया। चीन ने सबसे पहले वुहान में लॉकडाउन लगाया था, तो अमेरिका हैरान था कि चीन को यह कैसे पता कि लॉकडाउन लगाने से कोरोना खत्म हो सकता है।

उसी लॉकडाउन में चीन ने अपने सभी नागरिकों को वैक्सीन लगा दी थी और कुछ ही महीनों में पूरे चीन में वैक्सीनेशन का कार्य पूर्ण हो गया। चीन ने अपने लोगों में पहले ही टीका लगा कर बचाव भी कर लिया और दुनियाभर में अपना सामान भी बेच लिया।

अन्य देशों में अभी तक काल बना हुआ
वुहान से शुरू होने वाला चाइनीज वायरस दुनिया के अन्य देशों में अभी तक काल बना हुआ है, थमने का नाम नहीं ले रहा है, जबकि चीन ने मात्र 6 से 8 महीने में ही इस वायरस से छुटकारा पा लिया। जिंदगी को पहले की तरह पटरी पर आ गई। भारत में दूसरी लहर ने तबाही मचा दी, जो 2020 की पहली लहर न कर पाई थी। यकीनन चीन चाइनीज वायरस को बराबर अपडेट कर रहा है और अपने दुश्मन देशों को हेल्थ सिस्टम में उलझाकर रखना चाहता है। इससे देशों की रफ्तार कछुए जैसी हो चली है। इसने अर्थव्यवस्था और हेल्थ सिस्टम को बेबस कर दिया है । 

भारत में दूसरी लहर के माहौल में चीन बगुला भगत बनकर मदद की पेशकश कर रहा है, जबकि इस समस्या की असली जड़ चीन ही है। इतना सब होने के बावजूद सारा मामला खुफिया दस्तावेजों में कैद है और रहेगा। जैविक अस्त्र का प्रयोग करके, चीन ने गुरिल्ला वॉर की शुरुआत कर दी है। कल कोई दूसरा देश ऐसा करेगा। ऐसे में अब पूरी विश्व बिरादरी को चीन के विरुद्ध एकजुट होना होगा, साथ ही भविष्य में जैविक हथियारों या जैविक युद्ध से निपटने के लिए भी बड़ी तैयारी करनी होगी। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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