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कॉकरोच जनता पार्टी : क्या राजनीतिक जमीन तैयार कर पाएगी?

सार

Cockroach Janata Party : सीजेपी सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुकी है। जानिए क्या यह छात्र और युवा आंदोलन भारतीय राजनीति में नया विकल्प बन सकता है, इसकी चुनौतियां क्या हैं और भविष्य की संभावनाएं क्या हैं।
 

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Cockroach Janata Party Protest Analysis In Hindi Abhijeet Dipke CJP Youth Movement Politics In India
कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अभियान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) अब वर्चुअल दुनिया से निकलकर सड़कों पर उतर चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पहल राजनीतिक जमीन तैयार कर पाएगी? क्या यह भारतीय राजनीति में किसी विकल्प के रूप में उभर सकती है? खासकर तब, जब इसके समर्थक केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की बात कर रहे हैं।

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सीजेपी के बैनर तले हुए विरोध प्रदर्शन में जिन प्रमुख मांगों को उठाया गया, उनमें शिक्षा के बेहतर डिजिटलीकरण, मणिपुर में सामान्य शैक्षणिक व्यवस्था की बहाली, प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता, छात्रों और अभिभावकों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान तथा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जवाबदेही शामिल थी।
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सीजेपी प्रदर्शनकारियों की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि यदि इस्तीफा नहीं दिया गया तो अगले सप्ताह फिर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि, यह संभावना कम ही दिखती है कि धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वयं इस्तीफा दें। शिक्षा मंत्रालय को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन जवाबदेही तय होने के उदाहरण कम ही देखने को मिले हैं।  भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का वह पुराना बयान भी याद आता है जिसमें उन्होंने कहा था, "यह यूपीए की सरकार नहीं, एनडीए की सरकार है, यहां मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते।" ऐसे माहौल में प्रदर्शनकारियों की मांग पूरी होना आसान नहीं दिखता।
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ये पूरी तरह जेन-जी का आंदोलन नहीं
इस आंदोलन को कुछ लोग 'जेन ज़ी' का प्रदर्शन बता रहे हैं। जेन ज़ी से आशय 1997 से 2012 के बीच जन्मी उस पीढ़ी से है जिसे 'डिजिटल नेटिव' कहा जाता है, क्योंकि उसने बचपन से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की दुनिया देखी है। हालांकि, प्रदर्शन में युवाओं की मौजूदगी तो थी, लेकिन इतनी नहीं कि इसे पूरी तरह जेन ज़ी का आंदोलन कहा जा सके। वहां विभिन्न आयु वर्गों के लोग भी मौजूद थे। यही वजह है कि फिलहाल यह मानना कठिन है कि बिना राजनीतिक अनुभव वाला यह समूह किसी बड़े जन आंदोलन का रूप ले पाएगा। फिर भी यह प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर देता है।

देश का युवा लंबे समय से परीक्षा घोटालों, बढ़ती बेरोजगारी और अवसरों की कमी से परेशान है। यह असंतोष अब सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है।

असल मुद्दे धर्म और जाति की बहस में उलझ जाते हैं
समस्या यह भी रही है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को जब-जब उठाने की कोशिश हुई, बहस अक्सर धर्म और जाति के सवालों में उलझ गई। ऐसे में सीजेपी का उभार व्यवस्था के प्रति बढ़ते असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन किसी भी गंभीर राजनीतिक आंदोलन के लिए केवल गुस्सा पर्याप्त नहीं होता; उसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, संगठन और रणनीति भी जरूरी होती है। फिलहाल सीजेपी के पास ऐसी कोई स्पष्ट रणनीति दिखाई नहीं देती। सीजेपी युवाओं के भीतर मौजूद आक्रोश को आवाज तो दे रही है, लेकिन उस ऊर्जा को दिशा देने की ठोस योजना नजर नहीं आती। जब तक कोई आंदोलन अपने उद्देश्यों और कार्ययोजना को स्पष्ट नहीं करता, तब तक उसके भटकने की आशंका बनी रहती है।

सीजेपी की चुनौतियां
सीजेपी के सामने एक और बड़ी चुनौती होगी- उस विरोध और दबाव का सामना करना, जिसका सामना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में उभरे कई आंदोलनों को करना पड़ा है। इतिहास बताता है कि केवल सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल कर लेना किसी आंदोलन की स्थायी सफलता की गारंटी नहीं होता। ऑनलाइन समर्थन और वायरल लोकप्रियता को जमीनी जनाधार मान लेना जल्दबाजी होगी। यह भी संभव है कि मौजूदा उत्साह समय के साथ कमजोर पड़ जाए। फिलहाल परिस्थितियां ऐसी नहीं दिखतीं कि सीजेपी, वी.पी. सिंह, जयप्रकाश नारायण या अन्ना हजारे जैसे व्यापक जनांदोलन का रूप ले सके। बहरहाल, इतना तो तय है कि इस ने युवाओं के भीतर मौजूद असंतोष को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल यह देश में एक सशक्त और प्रभावी विपक्ष के अभाव को भरने की भूमिका निभा रहा है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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