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Earth Day 2021: जलवायु परिवर्तन पर वर्चुअल शिखर सम्मेलन से ठोस क्या होगा हासिल?

Thu, 22 Apr 2021 06:46 AM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Thu, 22 Apr 2021 06:46 AM IST
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Climate Change What will be achieved from virtual summit
जलवायु परिवर्तन का मुद्दा एक बार फिर से विश्व एजेंडे पर आ जाएगा। - फोटो : iStock

गुरुवार और शुक्रवार को अमेरिकी मेजबानी में होने वाले वर्चुअल शिखर सम्मेलन से कुछ ठोस हासिल होगा, इसको लेकर विशेषज्ञ आश्वस्त नहीं हैं। फिलहाल, इतनी उम्मीद जताई जा रही है कि इस आयोजन से जलवायु परिवर्तन का मुद्दा एक बार फिर से विश्व एजेंडे पर आ जाएगा। जानकारों के मुताबिक असल चुनौती ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए ऐसी ठोस कार्ययोजना की है, जिस पर अमल के लिए सभी देशों को बाध्य किया जा सके। इसके बिना अतीत में ऐसे आयोजन सिर्फ अच्छे इरादे जताने का मौका बन कर रह गए हैं।  

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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले साल अपने चुनाव अभियान के दौरान अमेरिका को फिर से जलवायु वार्ताओं में अग्रणी बनाने का वादा किया था। समझा जा रहा है कि वर्चुअल शिखर सम्मेलन का आयोजन कर वे अपना घरेलू वादा निभा रहे हैं, लेकिन उन्होंने अब तक जलवायु परिवर्तन रोकने की कोई नई रणनीति दुनिया के सामने नहीं रखी है।
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने इस हफ्ते ये बात साफ शब्दों में मानी कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ दुनिया को नेतृत्व देने के मामले में अमेरिका चीन से पिछ़ड़ गया है। मेरीलैंड राज्य में एक थिंक टैंक की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा- 'इस बात की कल्पना करना मुश्किल है कि बिना अक्षय ऊर्जा स्रोतों में क्रांति का नेतृत्व किए दीर्घकालिक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में अमेरिका चीन से जीत पाएगा। फिलहाल, हम पिछड़ रहे हैं।'   
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इस बयान के बाद पर्यवेक्षकों ने सवाल उठाया है कि अमेरिका का मकसद जलवायु परिवर्तन रोकने की कारगर रणनीति पर वैश्विक सहमति तैयार करना है या फिर वह इसे चीन से होड़ का एक क्षेत्र मान रहा है?

ब्लिंकेन की इस टिप्पणी पर भी ध्यान दिया गया है कि चीन सौर पैनल, पवन टरबाइन, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन आदि जैसी अक्षय ऊर्जा तकनीकों के मामले में सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक बन गया है। साथ ही उसके पास अक्षय ऊर्जा संबंधी एक तिहाई पेटेंट हैं। ब्लिंकेन ने कहा कि इससे इन बाजारों में अमेरिकी हित खतरे में पड़ गए हैं। इन बातों को इस बात का संकेत माना गया है कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को व्यापारिक नजरिए से देख रहा है।

वर्चुअल शिखर बैठक में 40 विश्व नेता भाग लेंगे। उनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी हैं। इसके पहले बाइडन प्रशासन के जलवायु दूत जॉन केरी ने चीन का दौरा किया था, जिसमें दोनों देशों के बीच जलवायु परिवर्तन मुद्दे पर सहयोग करने की सहमति बनी। गौरतलब है कि अमेरिका और चीन ग्रीन हाउस गैसों के सबसे बड़े उत्सर्जक देश हैं। इसलिए इस मामले में किसी ठोस रणनीति के लिए इन दोनों देशों का सहमत होना जरूरी माना जाता है।

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वर्चुअल शिखर सम्मेलन इस दिशा में एक शुरुआत है। - फोटो : iStock

केरी की चीन यात्रा और सोमवार को दिए ब्लिंकेन के भाषण के बाद चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक टिप्पणी में जलवायु मुद्दे पर अमेरिकी नजरिए की कड़ी आलोचना की। इसमें अमेरिका को सलाह दी गई कि वह जलवायु के मसले को शीत युद्ध के नजरिए से देखना बंद करे।

टिप्पणी में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन एक ऐसा क्षेत्र है, जिस पर दोनों देशों में सहमति है। इसके बावजूद अगर शीत युद्ध का नजरिया अपनाया गया, तो इस मामले में भी गतिरोध पैदा हो जाएगा और उससे दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ेंगे। ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि केरी की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच जारी संयुक्त बयान सकारात्मक दिशा में था। लेकिन उसके बाद ब्लिंकेन ने जो कहा कि उससे ऐसा लगता है कि अमेरिका मिला-जुला संकेत दे रहा है।

पश्चिमी मीडिया में छपी टिप्पणियों में अमेरिका में जलवायु मुद्दे पर जारी मतभेदों का जिक्र किया गया है। वहां डेमोक्रेटिक के प्रोग्रेसिव धड़े की तरफ से हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की सदस्य अलेक्जैंड्रिया ओकासियो कॉर्तेज ने सोमवार को फिर से सदन में महत्त्वाकांक्षी ग्रीन डील का विधेयक पेश किया है। लेकिन अभी तक बाइडन प्रशासन ने इसे नहीं अपनाया है।

रिपब्लिकन पार्टी किसी ऐसे कदम की विरोध रही है। इसलिए ये योजना आगे बढ़ पाएगी, इस पर संदेह है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक अमेरिका ऐसे ठोस कदम उठाता नहीं दिखता, जलवायु चर्चाओं में उसका वैश्विक नेता बन बन पाना मुश्किल बना रहेगा। वर्चुअल शिखर सम्मेलन इस दिशा में एक शुरुआत है, लेकिन बिना ठोस कदमों के ये शुरुआत ज्यादा आगे नहीं जाएगी।  


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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