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नागरिकता कानून विरोधः आंदोलन के बीच 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का भविष्य

Thu, 19 Dec 2019 07:39 PM IST
Sanjiv Pandey संजीव पांडेय
Updated Thu, 19 Dec 2019 07:39 PM IST
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citizenship amendment bill 2019 protest indian economic crisis
देश की इकनॉमी को 5 ट्रिलियन की इकनामी बनाने की बात सरकार कर रही है। पर कैसे ? - फोटो : फाइल फोटो

नागरिकता कानून का विरोध बढ़ता जा रहा है। दिल्ली और असम के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन काफी तेज हो गया है। दिल्ली पिछले कई दिनों से आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान संसद में पारित नागरिकता संसोधन कानून के विरोध में चलाए गए आंदोलन की तीव्रता का अंदाजा शायद सरकार को नहीं था। हालांकि अभी भी बहुत लोग इस कानून को चुनावी फायदा और नुकसान के गणित से देख रहे है। लेकिन देश के अर्थव्यवस्था इससे कितनी ज्यादा प्रभावित होगी इसका अंदाजा लोगों को नहीं है।

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दरअसल, रविवार को वाम पार्टियों दवारा आयोजित बंद के दौरान दिल्ली में योगेंद्र यादव को गिरफ्तार किया गया। बेंगलुरु में रामचंद्र गुहा को हिरासत में लिया गया। नागरिकता कानून के विरोधी और समर्थकों दोनो की अपनी राय है, जिस पर बहस की जरूरत है। लेकिन फिलहाल देश की अर्थव्यवस्था पर ग्रहण लगना तय है।

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5 ट्रिलियन की इकोनॉमी और आंदोलन
देश की इकोनॉमी को 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनाने की बात सरकार कर रही है। पर कैसे ? किसी भी मुल्क के विकास के लिए जरूरी है कि मुल्क में शांति व्यवस्था हो। देश में इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली माहौल हो। लेकिन पिछले कुछ सालों में देश में बढ़े धार्मिक, जातीय तनाव ने विकास की गति को धीमा किया है।

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इधर, कई आंदोलनों ने देश की विकास की गति को प्रभावित किया है। कई मोर्चे पर कई चुनौतियों से जूझ रही अर्थव्यवस्था को नागरिकता संशोधन कानून पारित होने के बाद इसके विरोध में हुए आंदोलन से और नुकसान पहुंचेगा। देश की राजधानी दिल्ली में तेज आंदोलन से पूरी दुनिया में अच्छे संकेत नहीं गए हैं।

निवेश करने वाली कॉरपोरेट ताकतें अपनी पूंजी को सुरक्षित देखना चाहती हैं। लेकिन फिलहाल आंदोलन उन जगहों पर ज्यादा तीव्र है, जो अर्थव्यवस्था के केंद्रबिंदु हैं। इससे निश्चित तौर पर आर्थिक शक्तियों को निराशा होगी।

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन से पहले ही देश में अर्थव्यवस्था को लेकर अच्छे संकेत नहीं मिल रहे थे। इस साल की शुरुआत से ही अर्थव्यवस्था को लेकर बुरी खबरें आ रही थीं। टैक्स की रिकवरी के मोर्चे पर बुरे संकेत हैं। जीएसटी से लेकर इनकम टैक्स में टारगेट पूरा करने में अभी तक सरकार विफल रही है।

टारगेट से 20 से 25 प्रतिशत कम जीएसटी और इनकम टैक्स का कलेक्शन सरकार कर पाई है। सरकार की चुनौती अगले तीन महीनें में और ज्यादा होगी। सरकार ज्यादा से ज्यादा टैक्स वसूली की योजना बना रही है। लेकिन वर्तमान हालात में अगर आंदोलन तेज हुआ तो व्यापार प्रभावित होगा। व्यापार प्रभावित होगा तो टैक्स कलेक्शन में भारी दिक्कत होगी।

दरअसल, देश की जीडीपी ग्रोथ पर लगातार पहले से ही ग्रहण लगा हुआ है। जीडीपी ग्रोथ रेट चार से पांच प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई जा रही है। ऊर्जा से लेकर ऑटो सेक्टर में मांग की कमी हुई है। इससे सीधे विकास प्रभावित हुआ है। वैसे में तेज आंदोलन जीडीपी के विकास दर को और प्रभावित करेंगे।

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नागरिकता संशोधन कानून से माहौल में एक अस्थिरता को भी पैदा किया है। - फोटो : Amar Ujala Graphics

सरकार की चूक और पूर्वोतर भारत
भारत की प्राथमिकता पहले दस सालों में पूर्वोतर भारत रहा है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान से खराब संबंध ने भारत के पास पूर्वी सीमा पर अवसर तलाशने को मजबूर किया। भारत को दक्षिण-पूर्वी एशिया से जोड़ने वाले प्रस्तावित आर्थिक कॉरिडोर भी अब नागरिकता कानून के काऱण हिंसा के चपेट में है।यही नहीं पूरा पूर्वोतर भारत इस समय हिंसा के चपेट में है।

दरअसल, सरकार को खुफिया एजेंसियों ने मौके पर असम को लेकर सही रिपोर्ट नहीं दी। सरकार को अंदाजा ही नहीं था कि असम में लोग इस कदर नागरिकता कानून में संशोधन के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।

पूर्वोतर भारत  बांग्लादेश, म्यामांर से आगे थाईलैंड, वियतनाम, लाओस का रास्ता भारत के लिए खोलता है। यह रास्ता आगे साउथ-ईस्ट एशिया और भारत के व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा। लेकिन पूर्वोतर में अब तनाव बढ़ गया है। इससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ प्रस्तावित आर्थिक कॉरिडोर को नुकसान पहुंचेगा।

दरअसल इस इलाके में नागरिकता कानून का विरोध मुस्लिम नहीं बल्कि हिंदू, इसाई और कई स्थानीय जनजातियां कर रही है।

शिंजो अबे का दौरा रद्द होना अच्छे संकेत नहीं
जिस समय नागरिकता संशोधन कानून को लेकर असम में आंदोलन शुरू हुआ उसी समय जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे का असम में दौरा प्रस्तावित था। दोनों मुल्कों के प्रधानमंत्री की बैठक असम में होनी थी। शिंजो अबे को मणिपुर भी जाना था। यह दौरा एक महत्वपूर्ण दौरा था, क्योंकि जापान और भारत मिलकर पूर्वोतर भारत के रास्ते ईस्ट एशिया के आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने को उत्सुक है। लेकिन असम में हुए हिंसक आंदोलन ने जापान के अंदर भारत की छवि पर सवाल उठाए हैं। शिंजो अबे का दौरा रद्द हो गया है। अब अगले साल आएंगे।

दरअसल, जापान की मीडिया ने पूर्वोतर में हुई हिंसा पर काफी गंभीरता दिखाई। इसे भारत की रणनीतिक भूल बताया गया। भारत की योजना थी कि जापान के प्रधानमंत्री नॉर्थ-ईस्ट के राज्य में बढ़िया स्वागत कर चीन को भी सांकेतिक संदेश दिया जाए। लेकिन नागरिकता कानून के पारित किए जाने की जल्दीबाजी में यह योजना फेल हो गई है।

एक तरह से देखा जाए तो नॉर्थ-ईस्ट में बंगालियों की घुसपैठ की समस्या काफी पुरानी है। पूरे नॉर्थ ईस्ट में इस मुद्दे पर हिंसा लंबे समय से होती रही है। आसाम का आंदोलन का आधार ही यही था। अब नागरिकता कानून ने नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दिमाग में यह भर दिया है कि बंगालियों को किसी भी कीमत पर सरकार यहां बसाएगी। उनके दिमाग से खासकर असमिया आबादी के दिमाग से यह बात निकालने में काफी समय लगेगा। खुद आसाम भाजपा के नेता आसाम में हुए आंदोलन से घबरा गए हैं।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।       

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